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रेलवे बोर्ड ने कहा सुधारवादी बजट
सुधीर पाल सिंह और दिशा कंवर /  February 26, 2013

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनय मित्तल और वित्तीय आयुक्त विजय कंठ ने कहा कि रेल मंत्रालय ने मंगलवार को सुधारवादी बजट का ऐलान किया। एक ओर जहां किरायों में बढ़ोतरी की घोषणा नहीं हुई, वहीं मंत्रालय ने डीजल की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी की भरपाई करने के लिए पूरक शुल्कों में बढ़ोतरी की और मालभाड़े की लागत का जुड़ाव र्ईंधन सरचार्ज से कर दिया। बिजनेस स्टैंडर्ड के संवाददाताओं सुधीर पाल सिंह और दिशा कंवर की उनसे बातचीत के मुख्य अंश...

रेलवे का परिचालन अनुपात साल 2011-12 के 95 फीसदी से घटकर इस वित्त वर्ष में 88 फीसदी पर आ गया। वित्तीय आंकड़ों में चमत्कारी सुधार का क्या है राज?
वित्तीय अनुशासन इसका राज है। मामला यह है कि किसी भी सूरत में रकम बर्बाद नहीं करनी है। हमने साल की शुरुआत निराशाजनक माहौल में की। वित्त मंत्रालय से हमने 3,000 करोड़ रुपये का उधार लिया। हमने कर्ज चुकाने का वादा किया था, ऐसे में हमने रकम अलग रखी। दूसरा, 25 साल में पहली बार हमने कोई पूरक मांग नहीं रखी, चाहे मॉनसून सत्र हो या फिर शीतकालीन सत्र। तीसरा, सामान्य कामकाज के खर्च के लिए हमारी वास्तविक जरूरत 1700 करोड़ रुपये रही, लेकिन हमने अपना वादा पूरा किया।

अन्य शुल्कों में वृद्धि से रेलवे को कितना अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा?
किराये को युक्तिसंगत बनाया गया है। रेलवे में यात्रा करने वाले महज 5 फीसदी यात्री ही आरक्षित श्रेणी में यात्रा करते हैं। इसलिए यात्रियों पर इसका प्रभाव सीमित होगा। इससे गैर-आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों पर लिपिकीय अधिभार के अलावा कोई भार नहीं पड़ेगा। गैर-आरक्षित श्रेणी के यात्रियों से रेलवे को करीब 45 फीसदी आय होती है। सुपरफास्ट ट्रेनों में आरक्षण शुल्क, लिपिकीय अधिभार, रद्दकरण प्रभार और तत्काल शुल्क में वृद्धि से करीब 881 करोड़ रुपये की आय होगी। तत्काल शुल्क में वृद्धि से 5 फीसदी यात्रियों के महज 15 फीसदी यात्री ही प्रभावित होंगे। इसलिए यात्रियों पर इसका प्रभाव काफी कम पड़ेगा। इससे हमें करीब 400 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।

फ्यूएल एडजस्टमेंट कंपोनेंट (एफएसी) को माल भाड़े से जोडऩे का क्या असर पड़ेगा?
हम केवल उस अतिरिक्त रकम की भरपाई करने जा रहे हैं जो हमें ईंधन के लिए चुकाने पड़ते हैं। हम इस तरह कोई कमाई नहीं कर रहे। एफएसी महज रेलवे की वित्तीय सेहत को और खराब होने से रोकेगा। हमने यात्री किराये को ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव से दूर रखा है और याक्ष्ी किराया वर्ग में 850 करोड़ रुपये का भार हम खुद उठाएंगे। ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी से 5,100 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है मगर हम माल भाड़े से महज 4,200 करोड़ रुपये की ही उगाही कर रहे हैं। 2012 से लेकर अब तक डीजल और बिजली की कीमत में खासी बढ़ोतरी हो चुकी है। हर 6 महीने में डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की समीक्षा की जाएगी।


इस वित्त वर्ष 1.5 लाख नई नौकरियां देने का वादा किया गया है। इससे कितना खर्च बढ़ेगा?
एक साल में रेलवे की ओर से यह सबसे बड़ी भर्ती होगी। इस दौरान सेवानिवृत्तियां भी होंगी। कुल मिलाकर 1,500 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा। अगले साल तक हमारे कर्मचारियों की संख्या 14 लाख होगी। 2007-08 में छठे वेतन आयोग के बाद कर्मचारी लागत में स्थिरता आई है। यह कुल सामान्य खर्च के 55 फीसदी से घटकर 49 फीसदी हो गया है। हमें वित्त वर्ष 2014 में पेंशन बिल पर 22,000 करोड़ रुपये भी खर्चने होंगे।

वित्त वर्ष 2014 के लिए जिस डेट सर्विस फंड की घोषणा की गई है उसके पीछे क्या मकसद है?
हम कुल संसाधन उत्पादन का 15 से 20 फीसदी सालाना इस कोष में उालेंगे। अच्छे साल में कोई भी अधिक खर्च करने को तैयार रहता है। हम अपने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह यह वित्तीय कदम उठा रहे हैं।

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