बिजनेस स्टैंडर्ड - नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का काम कर रहे जयराम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, August 09, 2022 05:05 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का काम कर रहे जयराम
अनसुनी आवाज
श्रीलता मेनन /  January 28, 2013

'मृत्यु के बाद मेरा अंतिम संस्कार सारंडा में ही किया जाए।' झारखंड के जंगलों के बीच एक सुदूरवर्ती गांव में एक कंपकपाती सुबह कौन मंत्री, सांसद या फिर यूं कहें कि कोई भी साधारण व्यक्ति होगा जो ऐसी इच्छा व्यक्त करेगा। वह भी तब जबकि बाकी देश खासतौर पर नेतागण गणतंत्र दिवस के मौके पर सप्ताहांत की छुट्टी मनाने में जुटे हों।
दरअसल यह वाक्य संवेदनाओं से भरे उस भाषण का हिस्सा था जो केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बीते शनिवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा गांव में दिया था। उन्होंने इस इलाके की उपेक्षा के लिए माफी मांगते हुए यह वादा किया कि वह यहां के हालात सुधारने के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे।
जब से उन्होंने सारंडा की विकास परियोजना की शुरुआत की है और इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विकास कार्यक्रमों के लिए फंड इक्ट्ठा कर उसे 200 करोड़ रुपये की परियोजना में तब्दील किया है तभी से इस क्षेत्र का विकास उनके दिल के बेहद करीब रहा है।  कोई भी यहां तक कि आलोचक भी मंत्री की सच्ची मंशा पर शक नहीं कर रहा है। दरअसल रमेश को तो कांग्रेस के दूसरे नेताओं के लिए आदर्श मंत्री होना चाहिए, जो लोगों का विश्वास खो चुके हैं। मेधा पाटकर के नेतृत्व वाले नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता मधुरेश कुमार कहते हैं कि जयराम जानते हैं कि नेताओं के प्रति लोगों में विश्वास की कमी है और वह इस खो चुके विश्वास को मजबूत करने में जुटे हैं। कुमार के मुताबिक यह एक ऐसा दौर है जब लोगों को यह पता नहीं है कि वे किसके पास जाएं और जयराम ही एकमात्र ऐसे नेता और मंत्री हैं जो न केवल नक्सलियों बल्कि जनांदोलनों की बात भी सुनते हैं और उनकी राय जानते हैं। कुमार कहते हैं कि इसके लिए रमेश बड़े औद्योगिक घरानों को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं और न ही वह जयपाल रेड्डी की तरह व्यवस्था से बाहर जाकर कुछ कर रहे हैं जिन्होंने इस तरह एक बड़ी कंपनी को नुकसान पहुंचाया और उसके बाद अपना मंत्री पद खो दिया।
जब से रमेश ने ग्रामीण विकास मंत्रालय का भार संभाला है तब से उन्होंने गंभीरतापूर्वक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने का बीड़ा खुद ही उठा रखा है। झारखंड के कई सामाजिक कार्यकर्ता सारंडा योजना को आलोचना की दृष्टिï से देखते रहे हैं। वहां यह आम राय है कि सभी गतिविधियां आखिरकार खनन कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए होती हैं, जबकि रमेश ने हाल फिलहाल खनन के खिलाफ बयान दिए हैं।
रमेश का कहना है कि खनन ही इन इलाकों में गरीबी की वजह रही है, हालांकि यह पता नहीं है कि उनके इस बयान को उनकी सरकार या फिर वह खुद कितनी गंभीरता से लेते हैं। लोगों का शक तब और गहरा जाता है जब वे यह देखते हैं कि खनन कंपनियों के ही कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) कोष का पैसा सारंडा में प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के लिए खर्च किया जा रहा है। सारंडा में सड़क निर्माण के कार्य को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं क्योंकि सड़क निर्माण को इलाके में नक्सलियों को फंड मुहैया कराने से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय कार्यकर्ता बताते हैं कि फंड साझा समझौते के बिना नक्सली यहां कोई बुनियादी ढांचा निर्माण होने नहीं देते हैं।
रमेश के प्रयास की आलोचना भी होती रही है और कहा जाता रहा है कि एक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास से जुड़े प्रयोग के लिए मौजूदा कार्यक्रमों के फंड का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इस इलाके के कार्यकर्ताओं के मुताबिक सारंडा योजना एक मजाक बन कर रह गई है और इससे झारखंड में कांग्रेस को नुकसान पहुंच रहा है। पंचायत सदस्य ठगा महसूस कर रहे हैं क्योंकि कोई भी फंड पंचायत को हस्तांतरित नहीं किया गया और इसका एक बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण पर खर्च हुआ।
सारंडा में जन आंदोलन के एक अग्रणी कार्यकर्ता जेवियर डियास कहते हैं कि मंत्री जी की कोशिशें तो सही नजर आ रही हैं। मगर बुनियादी ढांचा विकास के सारे प्रयास सड़क निर्माण तक ही सीमित हैं। ऐसे में चाहे मंत्री चाहें या नहीं मगर फायदा तो खनन को ही पहुंचेगा। वह कहते हैं कि हो सकता है कि वह खनन के विरोध में हों मगर इस इलाके के लोगों के इस्तेमाल के लिए जो भी फंड आ रहा है वह खनन में दिलचस्पी रखने वाली बड़ी कंपनियों की ओर से ही है। उदाहरण के लिए सेल ने सारंडा में साइकिलों का वितरण किया था। जयराम क्या कर सकते हैं अगर उनकी सरकार में ही ताकतवर औद्योगिक और खनन लॉबी मौजूद है।
अगर सारंडा के लोगों के मन में यह भावना है कि उन्हें धोखा दिया गया है तो निश्चित तौर पर यह परियोजना कारगर नहीं रही है जिसे लोगों का दिल जीतने के लिए शुरू किया गया था। सूत्रों के मुताबिक मंत्री खुद इस बात को मान चुके हैं कि परियोजना में गड़बडिय़ां हैं।
जो व्यक्ति सारंडा के लिए मरने को तैयार है वह इस इलाके के सुधार के लिए कोई कदम उठाएगा या नहीं, यह तो देखने वाली बात है। मगर इस परियोजना के आलोचकों को छोड़ दें तो कोई भी इस आदमी को काम नहीं करने का दोषी नहीं ठहरा सकता। राहुल गांधी ने लोगों और नेताओं के बीच विश्वास का पुल बनाने की बात की है और साथ ही पार्टी में नेता तैयार करने का जिक्र भी किया है, मगर रमेश पहले से ही पार्टी में एक आदर्श हैं जिसका दूसरे लोग अनुसरण कर सकते हैं।
 रमेश न केवल सारंडा बल्कि कई दूसरे नक्सल प्रभावित क्षेत्र जैसे कि उड़ीसा में सुनभेड़ा और झारखंड में लातेहार जाते रहे हैं। हाल ही में वह एक बार फिर से नियमगिरि गए थे। रमेश को काम करने में मजा आता है और इस तरह वह खुद को ऊर्जा से भरपूर पाते हैं। उनके कुछ करीबी बताते हैं कि अगर उनके पास काम नहीं होता है तो वह अपने लिए कोई न कोई काम बना लेते हैं। उनकी इस खासियत से उनके कई सहयोगी मंत्री और दूसरे लोग भी सीख ले सकते हैं।

Keyword: Jharkhand, saranda, Jairam Ramesh,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 बिजली वितरण में बदलाव से उपभोक्ताओं को होगा फायदा
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.