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सरकार आसान बना सकती है अनिवार्य टीआरसी के नियम
वृष्टि बेनीवाल /  January 27, 2013

भारत सरकार द्विपक्षीय कर संधि के तहत लाभ का दावा करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (टीआरसी) साबित करने के नियम को आसान बना सकती है। जनरल ऐंटी-अवॉयडेंस रूल्स (गार) के नियमों को नरम करने के बाद राजस्व विभाग अब टीआरसी में संशोधन करने की तैयारी कर रहा है। दोहरे कराधान निषेध करार (डीटीएए) के तहत कर लाभ लेने वालों के लिए पिछले बजट में टीसीआर प्रमाण को अनिवार्य बनाया गया था।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की सितंबर 2012 में जारी अधिसूचना के तहत विदेशी निवेशकों ने सरकार के समक्ष प्रस्तुतीकरण किया था और कुछ देशों ने भी टीआरसी फॉर्म और इससे संबंधित नियमों के बारे में स्पष्टïता की मांग की थी। इसके बाद ही राजस्व विभाग नियमों को सरल बनाने की दिशा में विचार कर रहा है। निवेशकों ने इस पर चिंता जताई थी कि रेजिडेंस देश से बहुत से ब्योरे मांगे गए हैं, जिससे उनके लिए टीआरसी हासिल करने में खासी परेशानी आ सकती है।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, 'निवेशकों ने कुछ चिंता जाहिर की है। ऐसे में नियमों में कुछ बदलाव किया जाएगा। नया टीआरसी ज्यादा स्पष्ट होगा
और टीआरसी फॉर्म को सरल बनाया जाएगा।'
कुछ देशों ने भारत से इस बारे में स्पष्टïता मांगी है कि टीआरसी एक बार ही जारी किया जाए या फिर निवेशक के हर लेनदेन के लिए टीआरसी जारी करना होगा। इन देशों ने भारत से यह भी पूछा है कि कैसे और कितने समय में टीआरसी का नवीनीकरण करने की जरूरत होगी। अगर कोई देश टीआरसी के तहत मांगी गई सभी जानकारी देने को इच्छुक न हो और सर्टिफिकेट जारी करने में लंबा समय लग जाए तो निवेशकों को कर संधि के तहत लाभ देने से भारतीय कर प्राधिकरण इनकार कर सकता है।
एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'सर्टिफिकेट जारी करने के बाद उनके प्राधिकरण यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि निवेशक ने बाद में अपना पता नहीं बदला है।' वे नहीं जानते कि कोई कंपनी या व्यक्तिगत निवेशक कल वहां का निवासी होगा या नहीं। इन्हीं सब बातों को नए नियम में स्पष्टï किया जाएगा।'
टीआरसी आवेदन का प्रारूप कुछ इस तरह से बनाया जाएगा
कि निवेशक खुद ही अधिकांश ब्योरे भर सकेंगे और उस पर सर्टिफिकेट जारी करने वाले देश का हस्ताक्षर होगा।
मौजूदा टीआरसी फॉर्म में निवेशक या कंपनी का नाम, पता, स्थिति, राष्ट्रीयता/किस देश में पंजीकृत है, निवास स्थिति, कर पहचान संख्या (टिन) आदि का ब्योरा मांगा जाता है।
वित्त कानून 2012 में एक प्रावधान शामिल किया गया है जिसके तहत कर लाभ के लिए प्रवासियों को अप्रैल 2013 से टीआरसी फॉर्म जमा करना होगा।
बजट 2012-13 के लिए ज्ञापन में कहा गया है, 'कई मामलों में पाया गया है कि जिन देशों के साथ सरकार ने करार किया हुआ है, उन देशों के ऐसे करदाता, जिनके पास टैक्स रेजिडेंसी नहीं है, वे डीटीएए के तहत मिलने वाले लाभों का दावा करते हैं। इस तरह यहां तक कि थर्ड पार्टी रेजिडेंट भी संधि के अनपेक्षित लाभ का दावा करते हैं।'
भारत सरकार ने फिलहाल 80 से ज्यादा देशों के साथ डीटीटीए किया हुआ है, लेकिन मॉरिशस जैसे कुछ देशों के साथ ऐसी संधियों के प्रावधानों पर नए सिरे से गौर किया जा रहा है, ताकि इनका गैर-वाजिब लाभ न उठाया जा सके। 

Keyword: TRC, Foreign investor, Indian government,
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