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फुकेट में आशियाना
आभास शर्मा /  January 09, 2013

जब गुलु लालवाणी ने रॉयल फुकेट मरीना विकसित करने पर विचार किया तो उन्हें पूरा भरोसा था कि यूरोप के कई निवेशक शीर्ष खरीदारों में शामिल होंगे। लालवाणी यह देखकर बहुत खुश हुए कि फुकेट के दस शीर्ष खरीदारों में भारतीय शुमार थे।
हॉन्ग कॉन्ग स्थित दूरसंचार कंपनी बीनाटोन ग्रुप के संस्थापक चेयरमैन लालवाणी 2004 में फुकेट आ गए। जो बात लालवाणी सहित सबको लुभाती है वह है 'एस' फैक्टर यानी सन (सूर्य), सैंड (रेत), सी (समुद्र) और सेलिंग।
2006 में लालवाणी ने रॉयल फुकेट मैरीना पर काम शुरू किया। इसके तहत महंगे और आरामदायक विला, आवासीय अपार्टमेंट और पेंटहाउस हैं। वह कहते हैं कि भारत के लोग फुकेट को दूसरे घर के तौर पर देखते हैं। उनके पास स्टूडियो अपार्टमेंट से लेकर विला और शैले तक हैं। ये लोग 30 से 50 वर्ष की उम्र के हैं जो जायदाद खरीदने पर अपना दूसरा या तीसरा निवेश कर रहे हैं। इस समय फुकेट में मकान खरीदने वाले तकरीबन 14 प्रतिशत खरीदार भारतीय हैं। लेकिन रूस और चीन के लोग आगे चल रहे हैं, 30 प्रतिशत खरीदार तो केवल रूस से ही ताल्लुक रखते हैं।
रियल एस्टेट कंसल्टैंसी कंपनी नाइट फैं्रक द्वारा 2012 किए गए एक शोध के अनुसार फुकेट पर्यटन बाजार दो अलग-अलग तरह के लोगों-निम्र मध्य वर्गीय और धनाढ्य लोगों- से बना हुआ है। नाइट फ्रैंक के निदेशक नात्था कहपाना कहते हैं, 'जो लोग फु केट आते हैं वे यहां की सुंदरता पर मुग्ध हो जाते हैं और जायदाद खरीद लेते हैं।' फुकेट में समुद्र के किनारे कलीम और पटॉन्ग के इलाकों में तीन बेडरूम, 1500 वर्गफीट अपार्टमेंट 55 लाख रुपये में मिल जाता है। इसकी तुलना में गुडग़ांव, मुंबई या ग्रेटर नोएडा में मकान की कीमतें कहीं अधिक हैं। मुंबई के उपनगर गोरेगांव में तीन बेडरू म वाले अपार्टमेंट की कीमत 1.2 करोड़ रुपये है। इसी तरह, गुडग़ांव में तीन बेडरूम अपार्टमेंट कीमत 1 करोड़ रुपये से अधिक होती है।
पिछले दो साल में फुकेट में अपार्टमेंट बाजार 50 प्रतिशत बढ़ा है। 2012 में करीब 2,200 नए मकानों की घोषणाएं हुई हैं। भारत के जो लोग यहां अपार्टमेंट खरीदते हैं उनमें ज्यादातर बैंकर, पेशेवर और कानूनविद हैं।
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फुकेट में 800 वर्गफीट से कम स्टुडियो अपार्टमेंट 35 लाख रुपये में उपलब्ध हैं। भारत के शहरों में रहने वाले लोगों को विला मुख्य तौर पर आकर्षित करते हैं। लालवाणी ने बताया कि फुकेट में विला खरीदने वाले कई धनाढ्य लोगों में एस्सार समूह के संस्थापक रुइया ब्रदर्स भी शामिल हैं। समुद्र के सामने और यहां से समुद्र का नजारा पेश करने वाले विला की कीमत 2 करोड़ रुपये से अधिक है। कमाला बीच और लयाना बीच के इलाकों में बने विला पांच बेडरूम वाले या इनसे भी बड़े हैं।
मिलियनर माइल के नाम से मशहूर एक इलाके में सबसे महंगे विला हैं जो सर्वाधिक चर्चित हैं। यहां विला की कीमत 8-10 करोड़ रुपये है। कहपाना का कहना है कि समुद्र का रुख करने वाले विला की कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है। समुद्र का नजारा कराने वाले विला की कीमत 10-145 मिलियन बहत या 2-26 करोड़ रुपये के बीच है। 2010 में 1,213 वर्ग मीटर में फैला विला 70 लाख डॉलर में बिका था। इसमें पांच बेडरूम, एक बड़ा सिनेमा और एंटरटेनमेंट रूप, एक बड़ा सा यूरोपीय और थाई किचन और साथ ही कई अन्य सुवधिाएं थीं। लालवाणी कहते हैं, 'अगर कोई महंगे विला की खोज कर रहा है तो फुकेट उपयुक्त जगह है।'
रियल एस्टेट कंसल्टैंसी कंपनी जोन्स लैंग लसॉल के कंट्री हेड अनुज पुरी का कहना है कि जायदाद के सरल नियमों से फुकेट में परिचालन आसान हो जाता है। पुरी कहते हैं, 'फुकेट के स्थानीय लोग मध्यम-आय के अनुकूल मकानों की काफी मांग कर रहे हैं। सस्ते मकान लंबी अवधि मूल्यांकन के लिहाज से सही सौदा साबित होते हैं।' पुरी का कहना है कि फुकेट में ढांचागत सुधार पर भी काफी ध्यान दिया जा रहा है जो किसी भी प्रॉपर्टी बाजार के लिए अनुकूल मानी जाती है।
शादी-विवाह के लिए भी फुकेट पसंदीदा जगह है। 2006 के बाद भारतीय खरीदारों का इसकी ओर आकर्षण बढ़ा है। 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट तक कीमतों में बढ़ोतरी सालाना आधार पर 50 प्रतिशत थी। लालवाणी का कहना है कि 2010 तक कीमतें स्थिर रही क्योंकि रियल एस्टेट बाजार की हालत उस समय खस्ता चल रही थी। लालवाणी के रॉयल फुकेट मैरीना में आवासीय अपार्टमेंट लॉन्च होने के कुछ महीने के भीतर ही बिक गए।
यहां पर जिस जायदाद की सबसे अधिक मांग है वह है एक्वामिनियम। यहां निजी ड्राइव-इन-बोट गैराज हैं, साथ ही निजी नौका तक पहुंचने के लिए डॉक की भी सुविधा है। लालवाणी के टाउनशिप में मकानों की कीमत 2 करोड़ रुपये से 30 करोड़ रुपये तक है। कहपाना का कहना है कि फुकेट में उन भूखंडों की कमी होती जा रही है जहां से समुद्र का नजारा दिखता है जिससे भविष्य में कीमतें खासी बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि उत्तरी फुकेट में माई खाओ जैसे क्षेत्रों में अधिक विकास होगा क्योंकि वहां दूसरे क्षेत्रों की अपेक्षा अब भी अधिक भूखंड उपलब्ध हैं।
पिछले कुछ साल में फुकेट में जायदाद बाजार सालाना 15 प्रतिशत की दर से बढ़ा है और पिछले छह साल में लगभग दोगुना हो गया है। दूसरे द्वीपों जैसे कैरीबियाई और भूमध्यसागरीय द्वीपों के मुकाबले फुकेट में मकान अपेक्षाकत सस्ते हैं। फुकेट भारत से हवाई जहाज से महज 4 घंटे में पहुंचा जा सकता है। ललवाणी कहते हैं, 'फुकेट में जायदाद की कीमतें ऊंची रह सकती हैं।'
हालांकि पुरी का मानना है कि निवेश के लिए मुफीद पांच शीर्ष जगहों में फुकेट शामिल नहीं है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि सालाना यहां जितने पर्यटक आते हैं उनमें आधे से अधिक रिटर्न ट्रैवलर होते हैं जो अपने आप में अहम है।
जो लोग द्वीप में निवेश करना चाहते हैं उनके लिए एक  अहम जानकारी जरूरी है। विदेशी फुकेट में जमीन नहीं खरीद सकते हैं पर मकान खरीद सकते हैं। जमीन खरीदना 30 साल की लीज के साथ संभव है जिसका नवीकरण हो सकता है।

Keyword: phuket, Apartment, Real estate,
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