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महंगी हुई रेलगाड़ी की सवारी
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली January 09, 2013

रेल किरायों पर होहल्ला करने वाली तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) से नाता तोड़ा और सरकार को रेल किराये बढ़ाने का मौका मिल गया। तकरीबन एक दशक बाद आज सरकार ने सभी श्रेणियों के रेल किराये बढ़ाने का ऐलान कर दिया। रेल बजट आने से पहले ही किराये में इजाफे के इस कदम से सरकार को आगे काफी आसानी होगी। बढ़े किराये 21 जनवरी से लागू होंगे।
रेलवे इससे पहले वातानुकूलित श्रेणी में चेयर कार, फस्र्ट और सेकंड टियर के किराये में इसी वित्त वर्ष के दौरान बढ़ोतरी कर चुका है। लेकिन अन्य श्रेणियों के यात्री किरायों में इस साल पहली बढ़ोतरी है। इस इजाफे से रेलवे की सालाना कमाई 20 फीसदी बढ़ जाएगी और चालू वित्त वर्ष में इससे सरकार की झोली में 1,200 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी। इससे पहले सरकार का यात्री किराये से इस साल 32,000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान था। अगले वित्त वर्ष सरकार को यात्री किराये से होने वाली आय 6,600 करोड़ रुपये बढ़ जाएगी। पिछले साल बजट से पहले सरकार ने ढुलाई भाड़े में 25 फीसदी बढ़ोतरी की थी।
कुल रेल यात्रियों मे से महज 0.3 फीसदी वातानुकूलित श्रेणी में सफर करते हैं, लेकिन उनके लिए किराये बढ़ानो से रेलवे की आय करीब 15 फीसदी बढ़ जाएगी। उन्हीं से 1,000 करोड़ रुपये ज्यादा आएंगे। यह बढ़ोतरी उसी तरह की गई है, जैसी दिनेश त्रिवेदी ने पिछले साल रेल बजट पेश करते वक्त की थी। लेकिन उनकी पार्टी तृणमूल की मुखिया ममता बनर्जी के अड़ जाने पर त्रिवेदी की छुट्टी हो गई थी और केवल कुछ वातानुकूलित श्रेणियों में ही किराये बढ़ाए गए थे। बनर्जी पिछले साल सितंबर में संप्रग से अलग हो गईं।  रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने बढ़ोतरी का ऐलान करते हुए कहा, 'अपने दम पर आगे बढऩे के लिए रेलवे को यात्री किराये की सभी श्रेणियों में बढ़ोतरी करनी पड़ी, वरना रेल ठप पड़ जाती। हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि यात्री सुविधाओं और सुरक्षा में भी उतना ही सुधार हो।' उन्होंने कहा कि वर्ष 2004-05 में यात्री किराये से रेलवे को 6,159 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। 2010-11 में यह 19,964 तक पहुंच गया था जो चालू वित्त वर्ष में 25,000 करोड़ रुपये हो सकता है। इस बीच विपक्ष ने रेल किराये बढ़ाने के कदम का विरोध शुरू कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, 'बजट सत्र से पहले किराये में बढ़ोतरी का कदम जनविरोधी और अलोकतांत्रिक है।'
बहरहाल रेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि रेल टिकट पर विकास शुल्क हटा दिया जाएगा और किराया 5 रुपये के गुणक में लिया जाएगा यानी 6 रुपये के बजाय किराया 5 रुपये हो जाएगा और 8 रुपये के बजाय उसे 10 रुपये कर दिया जाएगा। इससे भी रेलवे को 400 करोड़ रुपये मिलेंगे शेष 6,200 करोड़ रुपये की कमाई किराये में बढ़ोतरी से होगी। किराये में इस बढ़ोतरी के बावजूद चालू वित्त वर्ष में रेलवे का योजना आकार 60,000 करोड़ रुपये से घटकर 51,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया, 'बजट में इसके लिए 18,000 करोड़ रुपये आंतरिक स्रोत से जुटाने थे, मगर त्रिवेदी के कार्यकाल में की गई बढ़ोतरी वापस लेने से 4,200 करोड़ रुपये कम हो गए, जिससे योजना आकार भी घटेगा।'

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Keyword: railways, Fare, trains,
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