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कार बाजार
संपादकीय /  January 08, 2013

दिसंबर का महीना देश के कार बाजार के लिए मिलाजुला रहा और उस महीने में भ्रामक संकेत देखने को मिले। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजूकी ने दिसंबर 2011 के मुकाबले उस महीने में कारों की घरेलू बिक्री में 6 फीसदी की तेजी आने की बात कही। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की बिक्री में 18 फीसदी का इजाफा हुआ वहीं दूसरी ओर देश की दूसरी बड़ी कार निर्माता कंपनी हुंडई की बिक्री में 10 फीसदी की गिरावट आई। वहीं टाटा मोटर्स की बिक्री में 51 फीसदी की भारी गिरावट देखने को मिली। टोयोटा की बिक्री 21 फीसदी और जनरल मोटर्स की 20 फीसदी से अधिक गिरी। होंडा और फोर्ड ने क्रमश: 300 फीसदी और 9 फीसदी का लाभ होने की घोषणा की हालांकि इन कंपनियों का आधार बहुत छोटा है। ये शीर्ष आठ कार निर्माता कंपनियां देश के कुल कार बाजार के 90 फीसदी पर काबिज हैं। दिसंबर 2012 में इन कंपनियों ने 175,613 कारें बेचीं। यह संख्या ठीक एक साल पहले के इसी महीने के मुकाबले 6.23 फीसदी कम थी।
ऐसा तब हुआ जबकि अनेक कंपनियों ने तमाम नए मॉडल बाजार में पेश किए और कार डीलरों ने तमाम कारों पर भारी भरकम छूट की घोषणा की। हर साल दिसंबर का महीना कारों की बिक्री के लिहाज से कमजोर रहता है क्योंकि खरीदार अगले साल तक इंतजार करना बेहतर समझते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कारों की दोबारा बिक्री में यह बात काम आती है कि आपकी कार दरअसल किस वर्ष की बनी हुई है। कार निर्माताओं का कहना है कि इससे पता चल रहा है कि उपभोक्ताओं का रुख एकदम गिरा हुआ है।
लेकिन यहां एक और वजह हो सकती है। दरअसल ऐसा माना जा रहा है कि बैंक जल्दी ही ब्याज दरों में कमी कर सकते हैं। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने और महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए अपने स्तर पर हर कदम उठा लिया है और अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बारी है कि वह ब्याज दरों में कटौती करे। इन सब बातों ने लोगों के मन में यह उम्मीद जगा दी है कि इस महीने के अंत में जब मौद्रिक नीति की अगली समीक्षा होगी तो ब्याज दरों में कटौती देखने को मिलेगी। इस धारणा का असर दिसंबर महीने में कारों की बिक्री पर पड़ा। शायद यही वजह है कि मारुति सुजूकी की अपेक्षाकृत सस्ती कारों ऑल्टो, ए-स्टार और वैगनआर आदि जो कीमतों के लिहाज से संवेदनशील तबका खरीदता है, की बिक्री में 15 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। जबकि रिट्ज, स्विफ्ट और एस्टिलो जैसी उसकी कॉम्पैक्ट कारों की बिक्री में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस लिहाज से देखा जाए तो दिसंबर की बिक्री महज धोखा हो सकती है और ब्याज दरों में कमी आते ही बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अभी भी बिक्री बढऩे की गुंजाइश बाकी है। दिसंबर के आंकड़ों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जाए तो पता चलता है कि मारुति सुजूकी की बिक्री बढ़ाने में दो मॉडलों स्विफ्ट डिजायर और आर्टिगा का योगदान रहा है। दोनों कारों के डीजल संस्करण उपलब्ध हैं। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा का शानदार प्रदर्शन भी डीजल एसयूवी की वजह से ही है। अभी भी लोग इस उम्मीद में जमकर डीजल कार खरीद रहे हैं कि सरकार उस पर सब्सिडी नहीं कम करेगी। सरकार इस काम में लगातार देरी कर रही है। अगर वह सब्सिडी में कमी कर देती है तो कार बाजार में एक नर्ई हलचल देखने को मिलेगी।

Keyword: December, Car market, Maruti suzuki,
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