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'2015 तक हासिल होगा 5वां बड़ा बैंक बनने का लक्ष्य'
टी ई नरसिम्हन /  December 24, 2012

वर्तमान में इंडियन ओवरसीज बैंक देश का 7वां बड़ा बैंक है और उसने वर्ष 2014 तक 5 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के साथ 5वां बड़ा बैंक बनने का लक्ष्य तय कर रखा है। बैंक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एम नरेंद्र ने टी ई नरसिम्हन से बातचीत में कहा कि यदि अवसर और पूंजी मिलती है तो बैंक के पास वैश्विक बैंक बनने की क्षमताएं हैं। उन्होंने कहा कि छोटे बैंकों के अधिग्रहण के लिए उनके विकल्प खुले हुए हैं। मुख्य अंश :

वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में बैंक का प्रदर्शन कैसा है?
अभी तक बैंक का कारोबार 3,40,486 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो जनवरी के 2,10,347 करोड़ रुपये के कारोबार से 62 फीसदी ज्यादा है। अग्रिम और जमाओं में क्रमश: 72 फीसदी और 54 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

2014 तक 5 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के लक्ष्य को आप कहां तक हासिल कर लेंगे?
अर्थव्यवस्था में मंदी के चलते हम 2014 तक यह लक्ष्य हासिल नहीं कर सकते। 2015 में यह संभव है।

आप क्या कदम उठा रहे हैं और इस लक्ष्य हासिल करने में क्या अवसर व चुनौतियां देखते हैं?
पहला कदम शाखा विस्तार है। हम हर साल 300-400 शाखाएं खोल रहे हैं। अगले दो सालों में हम हर साल 500-600 शाखाएं खोलेंगे। अधिकांश विस्तार ऐसे राज्यों में होगा, जहां हमारी पहुंच सीमित है। उदाहरण के लिए, पूर्वोत्तर में। जहां तक अवसरों की बात है अभी तक आईओबी बहुत ज्यादा खुदरा ऋण नहीं दे रही थी। लेकिन अगले दो सालों में यह हमारे लिए महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक होगा। हमने इसके लिए 40,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है, जो फिलहाल 19,000 करोड़ रुपये है। हमारे लिए प्रमुख चुनौती मानव संसाधन है। बीते दो सालों में बैंक ने 7,500 नियुक्तियां की हैं और 2012-13 में हम 4,000 नई भर्तियां करेंगे, जो 20-21 साल के आयु वर्ग में होंगी। वित्तीय समावेशन भी एक चुनौती है। इसके लिए क्षमता विस्तार पर खासे निवेश की जरूरत है।

लक्ष्य को हासिल करने के लिए आपको किस तरह की पूंजी की जरूरत है?
जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था में सुधार आता है, कारोबार और मार्जिन में भी सुधार आएगा। फिलहाल इनमें नरमी है। बीते दौर में हमने अपने नेटवर्क को काफी बढ़ा है। जैसे-जैसे हम बेसिल 2 से बेसिल 3 को जाते हैं, पहले 2 सालों में हम उपलब्ध मुनाफे के साथ प्रबंधन कर सकते हैं। सिर्फ तीसरे साल से हमें पूंजी की जरूरत पड़ेगी। आईओबी ने आंतरिक शोध कराया है और इसमें 2018-19 तक 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी की जरूरत का आकलन किया गया था। इसके लिए सरकार से, क्यूआईपी, राइट इश्यू, तरजीही आवंटन के माध्यम से पूंजी जुटाई जाएगी। हाल में आईओबी को सरकार से पत्र मिला है, जिसमें लिखा है कि सरकार बैंक में 1,500 करोड़ रुपये लगाएगी। हाल में बोर्ड ने एक या ज्यादा किस्तों में टियर 1 बॉन्डों के माध्यम से 800 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दी थी। अगले 6 से 12 महीनों में हम एफपीओ पर गौर करेंगे। वर्तमान में हमारी बुक वैल्यू 1 से 1.5 फीसदी से कम है, हम इसके सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।

आपने मीडियम टर्म नोट की भी योजना बनाई थी?
पहले हमने दो किस्तों में 1 अरब डॉलर जुटाए थे, जिसके लिए अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। अब हम अगले 1.5 से 2 सालों में 2 अरब डॉलर जुटाने के लिए नए मसौदे पर काम कर रहे हैं, जो जनवरी तक तैयार हो जाएगा।

विदेशी कारोबार के विस्तार के लिए आप क्या योजना बना
रहे हैं?
हम मंगोलिया में प्रवेश के लिए यूनियन बैंक के साथ संयुक्त उपक्रम की योजना बना रहे हैं। अभी योजना शुरुआती चरण में है। शाखा विस्तार के अलावा अगले 5 सालों में सियोल, थाईलैंड और अन्य स्थानों पर 10 शाखाएं खोली जाएंगी।

वित्त मंत्री ने कहा है कि बैंकों को एकीकरण पर गौर करना चाहिए, जिससे कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा की जा सके। आपकी टिप्पणी?
अगर हमें अवसर मिलता है और सरकार से पूंजी मिलती है तो क्यों नहीं। अगर अवसर मिलते हैं तो भारत में छोटे बैंकों के अधिग्रहण के लिए हमारे विकल्प खुले हुए हैं। लेकिन हमारा ऐसा इरादा नहीं है, यदि बाजार की वास्तविकता को देखते हुए ऐसा जरूरी होता है तो सहयोग के वास्ते ऐसा किया जा सकता है। वैश्विक स्तर पर अन्य बैंकों के अधिग्रहण का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन मलेशिया जैसे देशों में संयुक्त उपक्रम या एक सहायक कंपनी के लिए हमारे विकल्प खुले हुए हैं।

Keyword: indian overseas bank, Business,
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