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नियामकीय मंजूरियों के लिए वेदांत एल्युमीनियम की कोशिश जारी
अभिनीत कुमार / मुंबई December 20, 2012

अनिल अग्रवाल प्रवर्तित वेदांत समूह को इस महीने के आरंभ में बॉक्साइट किल्लत के कारण 10 लाख टन सालाना क्षमता वाली लांजीगढ़ एल्युमिना रिफाइनरी बंद करनी पड़ी थी। समूह ने नियमगिरि पहाड़ी से बॉक्साइट के खनन के लिए राज्य सरकार की स्वामित्व वाली उड़ीसा माइनिंग कॉरपोरेशन के साथ करार पर हस्ताक्षर किए थे। इसके 15 वर्ष बाद लांजीगढ़ रिफाइनरी को बंद किया गया है।

समूह वेदांत एल्युमीनियम के तहत एल्युमीनियम कारोबार स्थापित करने के लिए छह वर्षों के दौरान करीब 30,000 करोड़ रुपये निवेश कर चुका है। कंपनी को उम्मीद थी कि संयंत्रों को चालू होने तक वह निजी (कैप्टिव) बॉक्साइट खदानों के लिए जरूरी मंजूरियां हासिल कर लेगी। वेदांत एल्युमीनियम ने अंतत: 1 एमटीपीए क्षमता का एक रिफाइनर, 0.5 एमटीपीए क्षमता का एक स्मेल्टर और 1,215 मेगावॉट क्षमता का एक बिजली संयंत्र चालू कर दिया, लेकिन बॉक्साइट खनन की मंजूरी नहीं मिली।
वेदांत एल्युमीनियम के मुख्य कार्याधिकारी मुकेश कुमार ने ओडिशा से फोन पर कहा, 'ऐसी परिस्थिति में किसी परियोजना को चालू रखना कठिन होगा।Ó कंपनी अब औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा के तहत अपने 550 नियमित कर्मचारियों में से अधिकांश को बाहर करने की संभावनाएं तलाश रही है। लांजीगढ़ संयंत्र के बंद होने से करीब 2,500 ठेका मजदूर भी प्रभावित हुए हैं।

सितंबर 2004 में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने लांजीगढ़ रिफाइनरी को पर्यावरण मंजूरी दी थी और अक्टूबर 2004 में वेदांत एल्युमीनियम ने इस रिफाइनरी का निर्माण शुरू किया था। 2008 के आरंभ तक इस रिफाइनरी का निर्माण कार्य पूरा हो चुका था और इसके तुरंत बाद एल्युमिना का उत्पादन शुरू किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय ने नियमगिरि में बॉक्साइट खनन के खिलाफ तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए टिकाऊ विकास की शर्तों पर मंजूरी दी थी। इसके बाद वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने खनन परियोजना के लिए सैद्धांतिक पर्यावरण मंजूरी दे दी थी। अगस्त 2010 में सर्वोच्च न्यायालय ने गैर-सरकारी संगठनों के विरोध को देखते हुए अपने फैसले को पलटते हुए नियमगिरि खदानों के लिए उड़ीसा माइनिंग कॉरपोरेशन की वन मंजूरी को खारिज कर दिया।

इस प्रकार वेदांत एल्युमीनियम को कैप्टिव बॉक्साइट का अपना स्रोत खोना पड़ा। हालांकि उड़ीसा माइनिंग कॉरपोरेशन ने वन मंजूरी खारिज करने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की है और जनवरी में इस मामले की अगली सुनवाई होने की उम्मीद है। कंपनी पिछले तीन महीने से गुजरात और अन्य राज्यों से बॉक्साइट की आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंतत: उसे संयंत्र बंद करना पड़ा।

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए के विश्लेषक अभिजित नाइक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा, 'हमारा मानना है कि कंपनी को अब नियमगिरि पहाड़ी से बॉक्साइट हासिल करना मुश्किल होगा।' उन्होंने कहा, 'इसलिए वेदांत एल्युमीनियम सरकार से अपनी एल्युमिना रिफाइनरी के लिए बॉक्साइट के वैकल्पिक स्रोत के आवंटन का आग्रह कर रही है।' यदि राज्य सरकार किसी बॉक्साइट खदान का आवंटन तुरंत कर देती है तब भी नए खदान के लिए तमाम मंजूरियां हासिल करने में कंपनी को वर्षों लग सकते हैं। इसके बाद खदान के विकास में भी काफी समय लगेगा। रिपोर्ट में कहा गया है, 'ऐसा लगता है कि बॉक्साइट खनन के लिहाज से कंपनी को वित्त वर्ष 13-17 तक कोई राहत नहीं मिलने वाली है।'

उद्योग विश्लेषकों के अनुसार उद्योग जगत को मुफ्त में खदान आवंटन के दिन अब लद चुके हैं। खनन विधेयक पारित होने के बाद धातु कंपनियों को खनिज संसाधन हासिल करने के लिए बोली प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। उस परिस्थिति में वेदांत एल्युमीनियम को भी भविष्य में कोई बॉक्साइट खदान हासिल करने के लिए बोली प्रक्रिया में भाग लेना पड़ेगा जिससे कंपनी को कैप्टिव खदान के आर्थिक लाभ नहीं मिल पाएंगे। ऐसे में वेदांत एल्युमीनियम की वित्तीय हालात पर दबाव पड़ सकता है।
      

Keyword: Vedanta, Captive, Alluminium,
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