बिजनेस स्टैंडर्ड - नई अधिग्रहण नीति पर उद्योग को दिक्कत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, December 07, 2021 05:36 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

नई अधिग्रहण नीति पर उद्योग को दिक्कत
बीएस संवाददाता / मुंबई/नई दिल्ली December 14, 2012

शुरुआती उत्साह के बाद देसी उद्योग जगत को अब एहसास हो रहा है कि प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण, पुनस्र्थापन एवं पुनर्वास विधेयक से उसकी मुश्किलें आसान नहीं होने वाली हैं। इसके उलट नए विधेयक से नई परियोजनाओं पर नकारात्मक असर पड़ेगा और भूमि अधिग्रहण की लागत में 150 फीसदी इजाफा हो सकता है। जाहिर है लागत बढऩे से रियल एस्टेट टाउनशिप और हवाई अड्डा परियोजनाएं महंगी हो जाएंगी।
किसी भी परियोजना की कुल लागत का 20 से 25 फीसदी खर्च भूमि अधिग्रहण पर होता है। लेकिन सड़क, रियल्टी और हवाई अड्डा जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण व्यय की खासी हिस्सेदारी होती है। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के निदेशक अरुण नंदा ने कहा कि नए विधेयक के बाद भूमि अधिग्रहण की लागत में 100 से 150 फीसदी तक इजाफा हो जाएगा। नंदा ने कहा, 'परियोजना की लागत इस बात पर निर्भर करेगी कि कुल लागत में भूमि अधिग्रहण खर्च की कितनी हिस्सेदारी है।' नंदा ने अधिग्रहण के लिए 80 फीसदी भूमि मालिकों की सहमति हासिल करने को भी मुश्किल चुनौती बताया क्योंकि 10 फीसदी मालिकों का कोई अता-पता नहीं होता है और 20 फीसदी सिर्फ तमाशा देखते हैं। नंदा ने कहा, 'इसे कभी अमली जामा नहीं पहनाया जा सकता है।'
प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण, पुनस्र्थापन एवं पुनर्वास विधेयक के तहत निजी परियोजनाओं के लिए 80 फीसदी भूमि मालिकों की सहमति अनिवार्य है जबकि सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं के लिए यह आंकड़ा 70 फीसदी है। हालांकि किसी भी सरकारी परियोजना के लिए ऐसी सहमति जरूरी नहीं है। कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों का कहना है कि अक्सर भूमि अधिग्रहण का मुआवजा किसानों को मिलने के बजाय बिचौलियों को मिल जाता है। दरअसल जमीन बैंक बनाने वाले लोग किसी भी परियोजना के शुरू होने से पहले किसानों से जमीन की पॉवर ऑफ अटॉर्नी ले लेते हैं या फिर उनकी जमीन हड़प लेते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह विधेयक काफी जटिल है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक सरकारी कंपनी के अधिकारी ने बताया, 'पर्यावरण संबंधी और भूमि अधिग्रहण के लिए मंजूरी मिलने में वैसे ही कई साल का समय लगता है खासतौर पर सार्वजनिक उपक्रम के लिए। विधेयक में 70 फीसदी भूमि मालिकों की सहमति को अनिवार्य बताया गया है, जो चालू परियोजनाओं पर भी लागू होगा, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा सरकार को यह भी समझना चाहिए कि खनन कार्य किसी खास जगह पर ही किया जाता है और उसे अलग तरीके से देखने की दरकार होती है।'
पूर्व साक्षात्कार में इंजीनियरिंग एवं निर्माण क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो के चेयरमैन ए एम नाइक ने कहा था कि अगर भूमि मालिकों को ज्यादा मुआवजा दिया गया तो नवी मुंबई हवाई अड्डा परियोजना की लागत 4,500 करोड़ रुपये बढ़ जाएगी। हालांकि नाइक ने आज इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
 इस विधेयक में विवादास्पद बात है कि अगर अभी तक अधिग्रहण  मुआवजे का भुगतान नहीं हुआ है तो इसके प्रावधान पुरानी तिथि से लागू होंगे। इससे मुमकिन है कि जिस भूमि मालिक को अब तक किसी भी वजह से मुआवजा नहीं मिला है वह कंपनियों से ज्यादा रकम मांग सकता है और परियोजना का काम रोक सकता है। जोंस लैंग लसॉल इंडिया के प्रमुख (भूमि सेवाएं) मयंक सक्सेना ने कहा, 'सतही स्तर पर यह सकारात्मक दिखता है लेकिन इससे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में अनिश्चितता और बढ़ जाएगी। हालांकि यह सुनिश्चित करना होगा कि भूमि मालिक कीमतों में इजाफा नहीं कर सकें क्योंकि ऐसा हुआ तो परियोजना की लागत भी बढ़ जाएगी।

Keyword: land acquisition, Industry, Domestic industry,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आने वाले समय में भारत-रूस के सामरिक संबंध होंगे मजबूत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.