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एनालॉग को लपकने के लिए फिर दौड़भाग
गौरव लघाटे / मुंबई November 16, 2012

डिजिटलीकरण अब हकीकत बन चुका है, जिसे स्थानीय केबल परिचालकों (एलसीओ) सहित सभी कंपनियों ने स्वीकार कर लिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एनालॉग सिग्नल्स से डिजिटल ऐड्रेसेबल सिस्टम (डीएएस) व्यवस्था लागू करने के लिए घोषित चरणबद्ध समयसीमा पर दृढ़ रहने के साथ ही अब यह दौड़ शुरू होती दिख रही है।
मान लीजिए कि दूसरे चरण के अंतर्गत 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले 15 राज्यों के 38 शहर आते हैं। इनमें बेंगलूर, हैदराबाद, पुणे, फरीदाबाद, नवी मुंबई, चंडीगढ़ जैसे शहर भी शामिल हैं, जहां सेट टॉप बॉक्स (एसटीबी) लगाने का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है। इन शहरों में हैथवे केबल ऐंड डाटाकॉम का वर्चस्व है, क्योंकि उसकी 25 शहरों में पहले से मौजूदगी है। डेन नेटवक्र्स 19 शहरों में, सुभाष चंद्रा के स्वामित्व वाली सिटी केबल (वायर ऐंड वायरलेस इंडिया लि.) 18 शहरों, जबकि इंडसइंड मीडिया ऐंड कम्युनिकेशंस (आईएमसीएल) की इनकेबल 16 शहरों में मौजूद है। उदाहरण के लिए हैथवे दूसरे चरण में 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। पहला चरण खत्म हो चुका है और अब कंपनी पूंजी जुटाने पर विचार करेगी।
विदेशी कंपनियों को 74 फीसदी (पहले यह सीमा 49 फीसदी थी) तक हिस्सेदारी लेने की मंजूरी के साथ एमएसओ और डीटीएच कंपनियों को उम्मीद है कि इससे नई पूंजी आएगी और ब्रॉडकास्ट कैरिज सेवा क्षेत्र को रफ्तार मिलेगी।
डेन और आईएमसीएल दोनों दूसरे चरण में 300 करोड़ रुपये के निवेश पर विचार कर रही हैं। डेन नेटवक्र्स के सीओओ एम जी अजहर ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हम दूसरे चरण में 35 लाख से 40 लाख एसटीबी लगाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं। हम इस चरण में 300 से 350 करोड़ रुपये तक निवेश करेंगे।' आईएमसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि उनका निवेश 300 करोड़ रुपये के दायरे में होगा। अधिकारी ने कहा, 'हम 25 से 30 लाख एसटीबी लगने की उम्मीद कर रहे हैं और हम नई पूंजी जुटाने पर विचार करेंगे।' आईएमसीएल ने पूर्व में आंतरिक स्रोतों और प्रवर्तकों से मिली पूंजी का निवेश किया था।
यह पूछने पर कि क्या एमएसओ अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में कामयाब होंगे, अजहर ने कहा, 'अभी तक हमारा ध्यान वर्तमान एनालॉग आधार को डिजिटल केबिल में बदलने पर केंद्रित है। बाद के चरणों में हमें डीटीएच को डिजिटल केबल में बदलाव देखने को मिल सकता है।' उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि प्रसारकों को इससे फायदा होता है तो स्थानीय केबल परिचालकों को डीएएस से सबसे ज्यादा नुकसान होगा। हालांकि एक वरिष्ठ केबल परिचालक ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि पहले चरण की समयसीमा पूरी हो चुकी है, जहां एमएसओ मजबूत स्थिति में थे तो मंत्रालय कैसे उम्मीद कर सकता है कि दूसरे चरण की समयसीमा पूरी हो जाएगी।
एडलवाइस की हाल की एक रिपोर्ट कहती है कि दूसरे चरण में डिजिटल केबल के डीटीएच की तुलना में अच्छा प्रदर्शन करने का अनुमान है क्योंकि अंतिम छोर तक संपर्क स्थापित करना कोई बड़ी बाधा नहीं है।

Keyword: digitalization, cable operators, analog,
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