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भेदिया कारोबार: कंपनियों के द्वार पहुंचा सूचना का अधिकार
एन सुंदरेश सुब्रमण्यन / नई दिल्ली November 08, 2012

सरकार के लिए खासी मुश्किलें खड़ी करने के बाद सूचना का अधिकार (आरटीआई) अब देश के उद्योग जगत के दरवाजे पर दस्तक देने लगा है। एक अहम कदम में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने  भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को आदेश दिया है कि वह 2007 के रिलायंस पेट्रोलियम (आरपीएल) मामले में भेदिया कारोबार में शामिल विभिन्न कंपनियों के नाम सार्वजनिक करे।
सीआईसी ने सेबी को इस मामले की जांच रिपोर्ट और इस मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा दायर आवेदन पर की गई सहमति आदेश प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने के लिए कहा है। सीआईसी ने यह आदेश बेंगलूर के एक वकील अरुण कुमार अग्रवाल की याचिका पर जारी किया है। इससे पहले सेबी के  मुख्य सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने अग्रवाल द्वारा दायर आरटीआई याचिका पर यह जानकारी देने से इनकार कर दिया था। अधिकारी का कहना था कि अभी इस मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया लंबित है।
लेकिन 6 नवंबर को आयोग ने कहा, 'हमारे सामने इस मामले के जो तथ्य और जानकारी पेश की गई है, उस पर ध्यान देते हुए हम याची की मांग पर सहमति जताते हैं कि इस जानकारी को सार्वजनिक करना व्यापक जनहित में है।' आयोग ने कहा, 'हम सीपीआईओ को यह आदेश देते हैं कि वह मांगी गई पहली दो सूचनाएं इस आदेश के जारी होने के 10 कार्यदिवस के भीतर याची को मुहैया कराए।'
आयोग ने पूंजी बाजार नियामक को भी निर्देश दिया कि वह उन फाइल नोट और अन्य कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मुहैया कराए, जिनके आधार पर 2007 में सहमति आदेश प्रक्रिया अधिसूचित की गई थी। सेबी के चेयरमैन यू के सिन्हा की नियुक्ति को चुनौती देते हुए अग्रवाल उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर कर चुके हैं। सीआईसी के आदेश के बाद सेबी के पास उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का विकल्प है। लेकिन अभी यह स्पष्टï नहीं है कि सेबी ऐसा करेगा या नहीं और अगर करेगा तो किस आधार पर  क्योंकि सीआईसी कह चुका है कि इस जानकारी को सार्वजनिक करना जनहित में है। इस बारे में सेबी के प्रवक्ता को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं आया।
जांच में सेबी ने कई कंपनियों की पहचान की थी, जो 2007 में रिलायंस पेट्रोलियम के भेदिया कारोबार में शामिल थीं। हालांकि इन कंपनियों के बारे में जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इस फैसले की वजह विस्तार से बताते हुए सीआईसी ने कहा, 'अगर एक नियामक के तौर पर सेबी ने किसी कंपनी या कंपनियों द्वारा निजी फायदे के लिए कानून, नियम या दिशानिर्देश के उल्लंघन का संज्ञान लिया है, तो इसकी जांच प्रक्रिया में हासिल हुई सूचना को सार्वजनिक करने की दरकार है। ऐसे खुलासे आम जनता को उन जोखिम के बारे में जानकारी देंगे, जिनसे उन्हें बाजार में निवेश करने पर दो-चार होना पड़ सकता है। यह कई कंपनियां को भी गैर-कानूनी तरीके से मुनाफा कमाने के लिए छोटे रास्ते अख्तियार करने से रोकेगा।'

Keyword: Insider trading, RTI, CIC, Sebi,
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