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विकास की बयार से ही बदलेगी मेवात की तस्वीर
सत्येन्द्र प्रताप सिंह / नई दिल्ली August 06, 2008
देश के विकसित राज्यों में शुमार हरियाणा का मेवात जिला आज भी विकास से कोसों दूर है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय देश में सबसे ज्यादा, 32712 रुपये है।
2006-07 के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 9636 पंजीकृत फैक्टरियां हैं, लेकिन मेवात के करीब 95.36 प्रतिशत लोग गांवों में रहते हैं और उनके रोजगार का मुख्य साधन खेती है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से 145 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत शृंखला के किनारे बसा यह ऐसा इलाका है, जहां आज भी बेरोजगारों की फौज सड़कों के किनारे ताश के पत्ते खेलते हुए मिलती है। हालांकि सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों की कोशिशों के बाद अब हालात बदल रहे हैं।

एनसीआर के विकसित इलाकों में से एक, गुड़गांव से महज 25 किलोमीटर आगे बढ़ने पर गरीबी का वीभत्स चेहरा दिखाई देता है। यहां फैक्टरियों, मॉल्स और विकास के अन्य सोपानों की सीमा समाप्त हो जाती है। मेवात जिले का गठन 4 अप्रैल, 2005 को किया गया, जिसका मुख्यालय नूंह में है। पूरा जिला 6 ब्लॉक में विभाजित है। जिले की कुल आबादी करीब 12 लाख है, जिनमें 70 फीसदी जनसंख्या मेव (मुस्लिम) की है।

इसके अलावा, यहां 78,802 लोग अनुसूचित जाति के हैं। पहाड़ी इलाका होने की वजह से यहां पानी की भी किल्लत है और मीठे पानी की खोज में गांव की महिलाओं को चंद कुओं पर निर्भर रहना पड़ता है। पिछड़ेपन की शृंखला यहीं खत्म नहीं होती। राज्य में शिक्षित लोगों का प्रतिशत जहां 67.91 है, वहीं मेवात जिले में शिक्षा का प्रतिशत 44 है। इसमें भी 61.54 प्रतिशत पुरुष और केवल 24.26 प्रतिशत शिक्षित महिलाएं हैं।

मेवात के एक आला प्रशासनिक अधिकारी का कहना है, 'यहां पर रूढ़िवादिता इतनी ज्यादा है कि सरकार की कोशिशें बेकार साबित हो रही हैं। अगर रोजगारपरक शिक्षा मुफ्त में देने के लिए छात्र-छात्राओं को दूसरे राज्य में सरकारी खर्चे पर भी भेजना होता है, तो ढूंढना मुश्किल हो जाता है। किसी भी नई योजना के लागू होने पर लोग उसमें शामिल होने को तैयार ही नहीं होते।' मेवात के विकास के लिए सरकार ने अलग से मेवात डेवलपमेंट एजेंसी का गठन किया है। यह न केवल विकास कार्यों की निगरानी करती है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में जरूरत के मुताबिक आर्थिक मदद भी देती है। विभिन्न गावों को सड़कों से जोड़ा जा चुका है।

हरियाणा ऐसा राज्य है, जहां नवंबर 1970 में ही सभी गावों का विद्युतीकरण कर दिया गया था। मेवात भी इससे अछूता नहीं है। अब इलाकाई विकास (क्लस्टर डेवलपमेंट) के माध्यम से विकास को गति देने की कोशिश की जा रही है। इस आधार पर कुछ इलाकों को दुग्ध उत्पादक क्षेत्र, सब्जी उत्पादक क्षेत्र, कृषि के साथ अन्य रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ने और सिलाई-कढ़ाई, अपैरल ट्रेनिंग और शिक्षा के लिए ब्लॉकवार व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए एलऐंडटी, डॉन बोस्को जैसी तमाम संस्थाओं की मदद ली जा रही है।

मेवात डेवलपमेंट एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अतर सिंह अहलावत कहते हैं, 'इस इलाके में अशिक्षा सबसे बडी समस्या है। कोशिशों के बाद यहां के विद्यालयों में शत-प्रतिशत शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कर ली गई है। इसके साथ स्वास्थ्य क्षेत्र और पेयजल की स्थिति में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।' सरकारी आंकडों के मुताबिक, मेवात का कुल क्षेत्रफल 19,1154 हेक्टेयर है। इसमें 14,6805 हेक्टेयर कृषि और 44349 हेक्टेयर गैर कृषि भूमि है।

कृषि भूमि में 1,0100 हेक्टेयर भूमि ही सिंचित है। इसके अलावा, शैक्षिक पिछड़ापन कोढ़ में खाज का काम करता है। इलाके में पिछले 8 साल से एक स्वयंसेवी संस्था स्मार्ट का संचालन करने वाली अर्चना कपूर कहती हैं, 'लोगों में सकारात्मक सोच विकसित हो रही है और विभिन्न योजनाओं को लेकर जागरूकता आ रही है, लेकिन अभी भी सरकारी और गैर सरकारी संगठनों को पेयजल, रोजगारपरक शिक्षा और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में काम करने की जरूरत है।'
(कल के अंक में पढ़िए 'समाज की मुख्य धारा से जुड़तीं महिलाएं')
Keyword: picuture of mewat will change only from swing of development,
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