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भारी परेशानी में मोबाइल ऑपरेटर
कृष्ण कांत / मुंबई October 29, 2012

वर्ष 2006 और 2007 का दौर ऐसा था, जब मोबाइल ऑपरेटर भारतीय उद्योग जगत के चमकते सितारे हुआ करते थे। उनका विकास बहुत तेजी से हो रहा था और वे हर महीने नेटवर्क के साथ जुडऩे वाले करोड़ों की तादाद में नए ग्राहकों को न्यूनतम टैरिफ की पेशकश करने के बावजूद अपने-अपने शेयरधारकों के लिए भारी मात्रा में संपत्ति पैदा कर रहे थे। उस दौरान ऐसा लग रहा था कि इस उद्योग के लिए कुछ भी बुरा नहीं हो सकता। भारती एयरटेल और रिलायंस कम्युनिकेशंस तो कुछ समय के लिए देश की सबसे मूल्यवान कंपनियां बन गईं थी।
लेकिन, पांच वर्षों बाद अब हालात बदल गए हैं। दूरसंचार क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियां मुश्किल दौर का सामना कर रही हैं और शेयरधारकों ने इस क्षेत्र से कन्नी काट ली है।
प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के अनुमान के मुताबिक इस साल मार्च के अंत तक इस उद्योग पर कुल मिलाकर 1,85,720 करोड़ रुपये का ऋण है, जो चार साल पहले के ऋण मूल्य का ढाई गुना है। आशंका जताई जा रही है कि यदि सरकार भारतीय दूर संचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों के मुताबिक 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आक्रामक बोली का तरीका अपनाती है तो मार्च 2016 तक दूरसंचार कंपनियों का कर्ज बढ़कर 4,00,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि यह उद्योग ऋण चुकाने के लिए पर्याप्त कमाई करने में सक्षम होता तो यह कोई समस्या नहीं थी। दिक्कत यह है कि दूरसंचार क्षेत्र में पैसा बनाना दिनोंदिन मुश्किल होता जा रहा है।
मुंबई की एक ब्रोकरेज फर्म के दूरसंचार विश्लेषक कहते हैं, 'कुछ को छोड़कर, ज्यादातर टेलीकॉम ऑपरेटरों का नकदी प्रवाह नकारात्मक है और वे परिचालन संबंधी दैनिक जरूरतों के लिए कर्ज पर निर्भर हैं।'
यह अतिशयोक्ति नहीं है। वित्त वर्ष 2009 में परिचालन मुनाफे का हरेक रुपया ऋण के तीन रुपये के दम पर आ रहा था। फिलहाल यह अनुपात 5 रुपये के स्तर पर चला गया है और एक अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2016 तक यह 7.4 के स्तर तक पहुंच सकता है। इस उद्योग का परिचालन मार्जिन फिलहाल 30 फीसदी है, जो दर्शाता है कि यह उद्योग किस कदर गंभीर वित्तीय अस्थिरता के दौर का सामना कर रहा है। इसका असर पहले ही दिख चुका है।
पिछले वित्त वर्ष के दौरान 11 सक्रिय मोबाइल ऑपरेटरों में से केवल तीन कंपनियों ने शुद्घ मुनाफा कमाया था और केवल एक ऑपरेटर (भारती एयरटेल) ने लगाई गई पूंजी पर दोहरे अंक (13 प्रतिशत) में प्रतिफल (आरओसीई) हासिल किया था। पांच साल पहले भारती एयरटेल का आरओसीई 35 फीसदी था, जिसके चलते यह कंपनी निवेशकों को बहुत पसंद आ रही थी।

Keyword: Mobile operator, Bharti Airtel, Reliance communication,
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