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बिना प्रचार दूरदराज में खामोश बदलाव के मुखर सूत्रधार
श्रीलता मेनन /  October 29, 2012

बदलाव की आवश्यकता जिन्हें बेचैन करती हैं, उस जमात में अरविंद केजरीवाल अकेले नहीं है। इस लिहाज से देखा जाए तो ऐसे कई केजरीवाल हैं जो कि देश के मौजूदा राजनीतिक सूरते हाल में बदलाव के लिए मीडिया की चकाचौंध से दूर चुप चाप काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश केजरीवाल के प्र्रशंसक हैं जबकि कुछ ऐसे हैं जो उनसे कई नीतिगत मुद्दों पर अपनी अलग राय रखते हैं। जय प्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखने की मंशा के साथ लोक सत्ता पार्टी की स्थापना की थी और यह तब की बात है जब अरविंद केजरीवाल सामाजिक या राजनैतिक परिदृश्य पर उभरे भी नहीं थे। हालांकि जय प्रकाश नारायण की पार्टी अभी तक आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक ही सीट जीतने में सफल हो पाई है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी मुहिम में अन्य लोगों ने उनके इस कदम का अनुसरण किया। वर्ष 2007 में जागो पार्टी की स्थापना की गई थी और यह अभी भी राजस्थान में सक्रिय है। पार्टी का अपना फेसबुक पेज है और उसके 250,000 समर्थक हैं और ये सभी राजस्थान के हैं। राज्य के कुल 32 जिलों में से 22 में पार्टी की कार्यसमिति सफलतापूर्वक काम करती रही है। पार्टी के संस्थापक और हरियाणा के कारोबारी दीपक मित्तल का मानना है कि भारत की गरीबी और पिछड़ेपन के लिए गलत नीतियां और भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। उनका कहना है, 'मैं कुछ करना चाहता था और इसलिए मैंने पार्टी की शुरुआत की।' मित्तल हालांकि अरविंद केजरीवाल का समर्थन करते हैं और वे पिछले पांच वर्षों से केजरीवाल के संपर्क में भी है। लेकिन उन्हें लगता है कि केजरीवाल का झुकाव वाम विचारधारा की तरफ ज्यादा है और यह एक वजह है कि आर्थिक मामलों में उनके विचार केजरीवाल से थोड़े अलग हैं। मसलन मित्तल का मानना है कि नकदी हस्तांतरण और सभी सेवाओं के निजीकरण से भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सकता है। इसके साथ ही वे खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और अधिक औद्योगकीकरण के पक्ष में भी हैं। उनका मानना है कि खामियों और भ्रष्टाचार के दीमक में फंसी कल्याणकारी परियोजनाओं को चलाने के अलावा सरकार को सालाना 4 लाख करोड़ रुपये खर्च करने चाहिए और प्रत्येक मतदाता को हर महीने कम से कम 800 रुपये सब्सिडी दी जानी चाहिए। भ्रष्टाचार समाप्त करने की दिशा में उन्हें केजरीवाल से उम्मीदें हैं। मित्तल बताते हैं, 'मैं उन्हें राजनीति में आने के लिए अक्सर मनाता रहा हूं लेकिन वे ऐसा कभी नहीं चाहते थे। अब हाल में उन्होंने इस बारे में (राजनीति में उतरने का फैसला) अपना मन बदला है।'
इस कड़ी में एक और नाम शंतनु भागवत का है। भारतीय वन सेवा के पूर्व अधिकारी शांतनु भागवत ने वर्ष 2001 में अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी थी और वे वेंचर कैपिटल संस्थानों से जुड़ गए थे। उसके बाद उन्होंने जनमत तैयार करने के लिए ब्लॉगिंग की शुरुआत की और नये भारत के विचार के समर्थन में जनता को प्रेरित कने लगे। उन्होंने फ्रीडम टीम ऑफ इंडिया (एफटीआई) की स्थापना की। वे इसके सह संस्थापक हैं और इसका मकसद ऐसे लोगों को प्रोत्साहन देना है जो राजनीति की खामियों को दूर करने के लिए या यूं कहें की राजनीति के शुद्घिकरण के लिए चुनाव लडऩे की मंशा रखते हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक किसी दल का गठन नहीं किया है लेकिन वे पूरी गंभीरता के साथ केजरीवाल के हर कदम को देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे जय प्रकाश नारायण की भ्रष्टाचार रोधी पार्टी लोक सत्ता के काफी करीब है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी संजीव सबलोक भी व्यवस्था को लेकर काफी निराश थे। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था भ्रष्टाचार का पोषण करने वाली है और इसमें भ्रष्ट अधिकारियों से लेकर राजनेता तक शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 2001 में अपनी नौकरी छोड़ दी थी ताकि चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की स्वतंत्र पार्टी की तर्ज पर एक उदारवादी दल का गठन कर सकें। उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी जिसका नाम ब्रेकिंग फ्री ऑफ नेहरू, लेट्स अनलीश इंडिया है और वे भागवत की फ्रीडम टीम ऑफ इंडिया (एफटीआई) के साथ काम कर रहे हैं।
एफटीआई एक क्लब की तर्ज पर काम करती है और कोई भी व्यक्ति इसमें शामिल हो सकता है और बेहतर बदलाव की मंशा के साथ राजनीति में प्रवेश कर सकता है। फिलहाल इसके 150 सदस्य हैं। सबलोक ऑस्ट्रेलिया से इसका संचालन करते हैं और सरकार को सार्वजनिक जन नीतियों पर सलाह देते हैं। भारत में नई राजनीतिक पार्टी के गठन का रास्ता साफ हो जाने की स्थिति में वे भारत लौटेंगे। सबलोक और भागवत दोनों ही केजरीवाल के प्रशंसक  हैं हालांकि  कई मुद्दों पर उनके विचार केजरीवाल से पूरी तरह अलग हैं। वे केजरीवाल की आर्थिक नीतियों का समर्थन नहीं करते हैं। सबलोक कहते हैं कि उन्होंने केजरीवाल से मुलाकात की है और उनके साथ सुधारों से संबंधित अपने विचारों को बताने का कोशिश की है, लेकिन 'उन्होंने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।' मैंने इस मामले में अपने हाथ नहीं खड़े किए हैं और मैं उनसे लगातार संपर्क करने की कोशिश करता रहूंगा।
केजरीवाल के प्रशंसक उनकी कुछ बातों से इत्तेफाक नहीं भी रखते हैं। सबलोक ने बताया, 'आवश्यक वस्तुओं की कीमतें निर्धारित किए जाने जैसे उनके कई विचार पूरी तरह से समाजवादी हैं और इस तरह के विचार भारत के विकास को पीछे धकेल देंगे और इससे आर्थिक विकास चौपट हो जाएगा। दरअसल, देश को विकास पथ पर आगे बढ़ाने के लिए हमें गंभीर नीति निर्माताओं की जरूरत है, न कि आर्थिक निरक्षरों की।'

Keyword: Arvind Kejriwal, Corruption, Activist,
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