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गन्ने में 20 फीसदी की उछाल चाहते हैं किसान
दिलीप कुमार झा / मुंबई October 29, 2012

प्रमुख उत्पादक राज्यों के किसानों ने डीजल की कीमतें, मजदूरी व अन्य लागत में उछाल के चलते गन्ने की कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की मांग की है। किसानों की इस मांग से चीनी मिलों को झटका लग सकता है क्योंकि चीनी वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) की आखिरी तिमाही में मिलें लाभ कमाने लगी थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तरफ से राज्य सलाहकारी कीमतें (एसएपी) की घोषणा से पहले उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े किसान संगठन किसान जागृति मंच (केजेएमए) ने गन्ने की कीमतें 300 रुपये प्रति क्विंटल तय करने का अनुरोध किया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी ज्यादा है। पिछले सीजन में मायावती सरकार ने एसएपी में 42 फीसदी की भारी भरकम बढ़ोतरी कर इसे 240-250 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया था।
इसी तरह महाराष्ट्र के किसानों ने इस सीजन में गन्ने की न्यूनतम कीमतें 300 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। पिछले सीजन में उचित व लाभकारी कीमतों से जुड़ाव रखते हुए महाराष्ट्र में इसका भुगतान 88-250 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किया गया। ये कीमतें गन्ने की गुणवत्ता और मिलों को दी गई डिलिवरी के हिसाब से थीं।
इस साल जुलाई में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने साल 2012-13 के लिए गन्ने की एफआरपी 170 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले सीजन के मुकाबले 17 फीसदी ज्यादा है। यह कीमत चीनी मिलों की तरफ से दी जानी है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महासचिव अविनाश वर्मा ने कहा, किसान हर साल गन्ने की कीमतों में भारी भरकम बढ़ोतरी की मांग करते रहे हैं। इस साल वे 300 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। लेकिन इस सीजन के लिए एसएपी तय करने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार को मिलों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।
वास्तव में केजेएम के अध्यक्ष सुधीर पंवार ने किसानों, चीनी मिलों आदि के प्रतिनिधियों की गन्ना आयुक्त के साथ हुई बैठक के बाद इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। गन्ना आयुक्त ने यह बैठक एसएपी की घोषणा से पहले की है। महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। महाराष्ट्र स्टेट फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (शुगर फेडरेशन) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, राज्य सरकार व किसान संगठनों के बीच जल्द ही संघर्ष शुरू होने वाला है। चूंकि गन्ने की कटाई की निगरानी राज्य के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण कर रहे हैं, लिहाजा किसानों की तरफ से होने वाले विरोध का निपटारा आमसहमति से होगा क्योंकि राज्य की राजनीति में चीनी क्षेत्र का प्रमुख योगदान है। शुगर फेडरेशन के प्रबंध निदेशक अजीत चौगले ने कहा, किसान इस सीजन में अपने गन्ने की कीमतें थोड़ी ज्यादा चाहते हैं। गन्ने की कीमतों की अनिश्चितता के बीच महाराष्ट्र की आठ मिलों ने इस सीजन में पेराई शुरू कर दी है जबकि अन्य मिलें उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से एसएपी के ऐलान का इंतजार कर रही हैं।
वर्मा ने कहा, सामान्य तौर पर दीवाली के बाद गन्ने की उपलब्धता को देखते हुए पेराई शुरू होती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में गन्ने की पेराई दीवाली के बाद शुरू होने की संभावना है। इस्मा का मानना है कि इस साल 240 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा जबकि पिछले साल 262 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस बीच, चीनी मिलों ने रिफाइंड चीनी पर आयात शुल्क 10 से बढ़ाकर 20 फीसदी करने और कच्ची चीनी पर 10 फीसदी शुल्क वसूलने का आग्रह किया है। चीनी उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, मौजूदा कीमत 545 डॉलर प्रति टन पर कच्ची चीनी का आयात और इसकी बिक्री भारत में करना घाटे का सौदा है। हालांकि 50,000 टन की खेप भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच गई है, लेकिन आगे कच्ची चीनी का आयात असंभव नजर आ रहा है क्योंकि देसी स्रोतों से पर्याप्त चीनी उपलब्ध है।
उत्पादन लागत के मुकाबले हाजिर कीमतें नरम रहने के चलते मिलों ने लगातार तीन तिमाहियों तक नुकसान उठाया है, लेकिन चीनी की कीमतों में सुधार के चलते सितंबर की शुरुआत से मिलें मुनाफा कमा रही हैं। चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें 3600 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं जबकि औसत उत्पादन लागत 3200 रुपये प्रति क्विंटल है, इस तरह से 400 रुपये प्रति क्विंटल का मुनाफा हो रहा है। लेकिन चीनी की कीमतें फिलहाल उत्तर प्रदेश में 3400 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई हैं। इस स्तर पर भी मिलों को 200 रुपये प्रति क्विंटल का मुनाफा हो रहा है। लेकिन गन्ने की कीमतों में इजाफे से मिलों पर दबाव बढ़ जाएगा, जब तक कि रंगराजन समिति की सिफारिशों के मुताबिक चीनी क्षेत्र का विनियंत्रण नहीं होता है। अधिकारी ने कहा कि अगर गन्ने की कीमतें बढ़ाई जाती हैं तो चीनी की कीमतें उसी अनुपात में बढ़ाई जानी चाहिए और वह भी सरकारी हस्तक्षेप के बिना।
मौजूदा माह के लिए आवंटित पूरा कोटा खुले बाजार में बेचने के सरकारी निर्देश से थोक बाजार में आपूर्ति बढ़ गई है और इस वजह से चीनी की कीमतें पिछले हफ्ते नरम हो गईं। हालांकि त्योहारी सीजन की मांग से नुकसान सीमित रहा है। एक महीने में चीनी की कीमतें 6 फीसदी से ज्यादा यानी 250 रुपये नरम हुई हैं और सोमवार को इसकी कीमतें (एक्स-फैक्ट्री) 3400 रुपये प्रति क्विंटल रहीं।

Keyword: Sugarcane, sugar mills, Crushing,
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