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ल्यूपिन: दूसरी तिमाही दमदार नहीं, पर आगे मजबूत राह
उज्ज्वल जौहरी /  October 28, 2012

हालांकि दवा कंपनी ल्यूपिन ने सितंबर 2012 की तिमाही में अच्छा प्रदर्शन दर्ज किया है, लेकिन बाजार इससे अधिक प्रभावित नहीं हुआ है। यही वजह है कि यह शेयर मंगलवार को 1.25 फीसदी कमजोर होकर 563 रुपये पर बंद हुआ। सालाना आधार पर 30 फीसदी की राजस्व वृद्घि ठीक-ठाक है, लेकिन जून तिमाही की 44 फीसदी की वृद्घि की तुलना में कम है। इलारा कैपिटल के सुरजीत पाल का कहना है कि बिक्री की तुलना में कच्चे माल की लागत का अनुपात भी बढ़ रहा है और इसे लेकर कुछ चिंताएं भी हैं। हालांकि शुद्घ लाभ महज 9 फीसदी बढ़ कर 290 करोड़ रुपये रहा है, लेकिन यह 280 करोड़ रुपये की उम्मीद की तुलना में अधिक है। शुद्घ लाभ में धीमी वृद्घि का प्रमुख कारण कर दर में बढ़ोतरी है। ल्यूपिन के गोवा और मंडीदीप संयंत्रों के लिए कर छूट की अवधि समाप्त होने के बाद कर में इजाफा हुआ है। हालांकि भविष्य में कर दर 25 फीसदी के स्तरों पर रहने का अनुमान है। बाजार को कुछ हद तक निराशा इस बात से भी हुई है कि कंपनी के मुनाफे पर आरऐंडडी खर्च में 22 करोड़ रुपये की गिरावट से झटका लगा है। आरऐंडडी खर्च घट कर 94 करोड़ रुपये रह गया जो सितंबर 2011 की तिमाही में 138 करोड़ रुपये पर था।
हालांकि अमेरिकी बाजारों के लिए लॉन्च होने वाले उत्पादों की मजबूत पाइपलाइन को देखते हुए ल्यूपिन का परिदृश्य मजबूत बना हुआ है। कुल मिला कर आरऐंडडी खर्च में फिर से इजाफा हो सकता है। विश्लेषकों को मार्जिन 21-22 फीसदी के बीच मजबूत रहने की उम्मीद है। मार्जिन को जापानी व्यवसाय से भी मदद मिल सकती है जिसमें एपीआई (ऐक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट) की शुरुआत के बाद भारतीय इकाइयों से तैयार उत्पादों की आपूर्ति के साथ 6-8 फीसदी की तेजी आने की उम्मीद है। वहीं घरेलू व्यवसाय लगभग 20 फीसदी की दर से बढ़ सकता है। एमके ग्लोबल के दीपक मलिक का मानना है कि कंपनी की आय वित्त वर्ष 2012-14 के दौरान 22 फीसदी तक बढ़ जाएगी। इसे देखते हुए और 637 रुपये के कीमत लक्ष्य (ब्लूमबर्ग डेटा के अनुसार) के साथ निवेशक किसी भी गिरावट पर इस शेयर को खरीद सकते हैं।

अमेरिकी बाजार
सितंबर तिमाही में ल्यूपिन के कुल राजस्व में अमेरिकी बाजार की भागीदारी 38 फीसदी की रही। अमेरिका ज्यादातर भारतीय दवा कंपनियों के लिए बेहद अहम बाजार बना हुआ है। हालांकि अमेरिकी बिक्री 21 फीसदी सालाना वृद्घि के साथ 781.8 करोड़ रुपये रही जो जून 2012 की तिमाही के 802 करोड़ रुपये की तुलना में थोड़ी कम है। तिमाही आधार पर यह गिरावट एंटी-साइकोटिक दवा जियोडीन की वजह से आई है जिसकी एक्सक्लूसिविटी अवधि समाप्त हो रही है। कंपनी द्वारा लॉन्च दवाओं में फोर्टमेंट (एंटी-बायोटिक दवा) के जेनेरिक का सीमित प्रतिस्पर्धा के साथ मजबूत योगदान बरकरार है और उसकी बाजार भागीदारी अच्छी है।
ब्रांडों में सुप्रैक्स (एंटी-इन्फेक्टिव) और अंटारा में 5-10 फीसदी की वृद्घि बरकरार है। सुप्रैक्स वित्त वर्ष 2013 की दूसरी छमाही के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर सकता है, क्योंकि अमेरिका में फ्लू सीजन चरम पर है। ल्यूपिन ने मार्च 2013 की तिमाही तक सुप्रैक्स का ड्रॉप भी लॉन्च करने की योजना बनाई है। ल्यूपिन के निदेशक नीलेश गुप्ता का कहना है कि कंपनी अमेरिका में कई और ब्रांडों या कंपनियों के अधिग्रहण के लिए उपयुक्त अवसर तलाश रही है।
ल्यूपिन ने वित्त वर्ष 2013 के दौरान 20 उत्पाद लॉन्च करने की योजना बनाई है जिनमें 10 गर्भनिरोधक गोलियां भी शामिल हैं। इनमें से पांच उत्पाद लॉन्च किए जा चुके हैं और बाकी 15 उत्पादों को वित्त वर्ष 2013 के अंत तक लॉन्च किए जाने की संभावना है। यही वजह है कि कंपनी के अमेरिकी राजस्व में दूसरी छमाही और उसके बाद इजाफा होने की उम्मीद है।
मलिक का मानना है कि वित्त वर्ष 2012-14 के दौरान त्रिकोर, सीजनेल, सोलोडिन, एम्बियन सीआर, यास्मीन, सिम्बाल्टा, असाकोल और सिप्रो ओएस जैसे हाई प्रोफाइल वाली दवाएं अमेरिकी व्यवसाय में 29 फीसदी सीएजीआर में मददगार होंगी।

जापान
ल्यूपिन के कुल राजस्व में जापानी व्यवसाय का योगदान दूसरी तिमाही में 15 फीसदी पर स्थिर बना रहा। ल्यूपिन द्वारा खरीदी गईं दो कंपनियों क्योवा और इरोम ने येन के संदर्भ में क्रमश: 10 फीसदी और 55 फीसदी की वृद्घि दर्ज की जबकि रुपये में यह वृद्घि 30 फीसदी और 85 फीसदी रही। हालांकि जापानी व्यवसाय कम मार्जिन वाला व्यवसाय बना हुआ है, लेकिन भारतीय इकाइयों से एपीआई आपूर्ति शुरू होने से मार्जिन को ताकत (लगभग 3 फीसदी) मिल सकती है। इसके अलावा यदि ल्यूपिन फॉर्मूलेशन की आपूर्ति भी शुरू करने में सफल रहती है तो उसके मुनाफे में और अधिक सुधार दिखेगा।

घरेलू व्यवसाय
कंपनी ने अपनी घरेलू बिक्री में 18 फीसदी की वृद्घि दर्ज की है जो जून 2012 में दर्ज 25 फीसदी और मार्च 2012 की तिमाही में 21 फीसदी की तुलना में कम है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट चिंताजनक नहीं है, क्योंकि इस उद्योग ने तिमाही के दौरान धीमी वृद्घि दर्ज की है। ल्यूपिन के कारोबार में क्रोनिक सेगमेंट का योगदान 75 फीसदी का है जिस वजह से वह एक्यूट सेगमेंट पर कम निर्भर है जिसमें वृद्घि दर के संदर्भ में अधिक उतार-चढ़ाव दर्ज किया
गया है।

Keyword: lupin, pharma, Share,
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