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एफआईआई के लिए मॉरीशस बदलेगा नियम
एन सुंदरेश सुब्रमण्यन / नई दिल्ली October 22, 2012

मॉरीशस सरकार विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को नए प्रारूप में कर रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (टीआरसी) जारी कर सकती है और इसमें भारत सरकार की ओर से सुझाई गई जरूरी बातों को शामिल किया जा सकता है। मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मॉरीशस का राजस्व प्राधिकरण कर संधि के तहत निवेशकों के वास्ते लाभ पाने के लिए सरकार द्वारा मांगी गई तीन अहम सूचनाओं को शामिल कर सकता है। इस बारे में मसौदा प्रारूप जल्द ही जारी किया जा सकता है।
मॉरीशस सरकार के इस कदम से भारत में मॉरीशस के जरिये निवेश करने वाले सभी विदेशी निवेशकों पर असर पड़ सकता है। इसके तहत निवेश में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। भारत और मॉरीशस ने दोहरा कराधान निषेध समझौता (डीटीएए) किया है। इसके तहत भारत में निवेश से प्राप्त पूंजीगत लाभ पर केवल मॉरीशस में कर वसूला जा सकता है। लेकिन मॉरीशस निवेशकों से कोई कर नहीं वसूलता है, जिससे भारत में निवेश करने के लिए मॉरीशस पसंदीदा देश बना हुआ है।
मॉरीशस सरकार के प्रस्तावित प्रारूप को भारत में कर विशेषज्ञों के बीच वितरित किया गया है, जिसमें लाभार्थी के पते, उनका कर पहचान नंबर (टीआईएन) और इकाई (व्यक्तिगत, कंपनी या साझेदार कंपनी) की स्थिति का ब्योरा शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि जिन इकाइयों को पहले से टीआरसी जारी किया जा चुका है, उन्हें भी नए प्रारूप के तहत टीआरसी फिर से जारी किया जाएगा। इस साल के शुरुआत में भारत सरकार ने वित्त कानून, 2012 के तहत आयकर कानून की धारा 90 और 90 (ए) में संशोधन कर डीटीएए के तहत कर लाभ का दावा करने वाले निवेशकों को कुछ निश्चित ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया है। सितंबर में सरकार ने इस बारे में नियम प्रकाशित किए थे। डीटीएए के तहत आने वाले सभी देशों को टीआरसी प्रारूप में बदलाव करना होगा। हालांकि मॉरीशस की पहल भारत के लिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी देश के जरिये भारी मात्रा में विदेशी निवेश आता है। सेबी के आंकड़ों के अनुसार 721 से ज्यादा एफआईआई खाते मॉरीशस के हैं और इसके जरिये भारतीय शेयर बाजार में करीब 56 अरब डॉलर का निवेश किया गया है। यानी देश के कुल एफआईआई निवेश में इसकी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि एफआईआई के जरिये भारत में काला धन वापस लाने को लेकर पिछले कुछ समय से चिंता जताई जा रही है। टीआरसी प्रारूप में बदलाव से निवेश के स्रोत को चिह्निïत करने में मदद मिलेगी।

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