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यूपी के परंपरागत उद्योगों को दम नहीं तोडऩे देंगे
मनरेगा ने उत्तर प्रदेश में परंपरागत उद्योगों के सामने मजदूरों का संकट खड़ा कर दिया है। इस मसले पर प्रदेश के ग्रामीण विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरविंद सिंह गोप से सिद्घार्थ कलहंस ने बातचीत की।
सिद्घार्थ कलहंस / लखनऊ October 14, 2012

महंगे श्रम और श्रमिकों की कमी का संकट खड़ा हो गया है। इस सिलसिले में सरकार क्या कर रही है?
यह सही है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के कारण मजदूरी बढ़ी है, लेकिन इसमें बुराई क्या है? आज प्रदेश के मजदूरों का अपने घर में ही साल में 100 दिन या उससे ज्यादा रोजगार मिल रहा है, जिससे उनका पलायन थम गया है। हमारे प्रदेश के मजदूरों के लिए यह अच्छी बात है। यहां बड़ी तादाद में मजदूर हैं और प्रदेश की तरक्की के लिए उनकी खुशहाली जरूरी है।

लेकिन उद्योगों के सामने तो इससे संकट खड़ा हो गया है। जरी-जरदोजी, कालीन और रेशम उद्यमी खुद को मनरेगा से जोडऩे की मांग कर रहे हैं। सरकार इस बारे में क्या सोचती है?
हमारी सरकार बुनकरी, कालीन, जरी-जरदोजी और दूसरे परंपरागत उद्योगों की मदद के लिए तैयार है। इनकी दिक्कतें दूर करने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। इन्हें मनरेगा से जोडऩे के मसले पर भी सरकारात्मक फैसला लिया जाएगा। प्रदेश के परंपरागत उद्योगों को किसी भी हालत में मरने नहीं दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में मनरेगा विवाद में है। केंद्र ने कई जिलों में इसकी जांच कराने के लिए पत्र भी लिखा है। सीबीआई जांच की बात भी कही जा रही है। समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार क्या कर रही है?
केंद्र से चि_ïी मिलने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खुद ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठï से जांच के आदेश जारी किए हैं। मनरेगा जैसी महत्त्वपूर्ण योजना में घोटाला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पिछले छह महीनों में सपा सरकार ने इसमें धांधली करने वाले कई अधिकारियों और कर्मचारियों को दंडित किया है। जांच में दोषी साबित होने वालों पर आगे भी कड़ी कार्रवाई होगी।

कांग्रेस ने मनरेगा के धन का सही इस्तेमाल नहीं होने, जॉब कार्ड धारकों को काम नहीं मिलने और मनरेगा में काम करने वालों को स्वास्थ्य बीमा नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है...
मनरेगा के मद में कुछ दिन पहले तक पैसा ही नहीं था और केंद्र से पैसा हाल ही में मिला है। चालू वित्त वर्ष के अंत में आपको पता चलेगा कि इस सरकार ने कितनों को रोजगार दिया है। पिछली सरकार जो व्यवस्था चौपट कर चुकी है, अभी तो उसे पटरी पर लाया जा रहा है। रही बात ग्रामीण स्वास्थ्य बीमा योजना की तो उसके क्रियान्वयन का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग का है। अलबत्ता हम उनके साथ तालमेल में काम करेंगे।

अच्छे खासे बजट के बाद भी गांवों में भारी आबादी पक्के मकान के बगैर रह रही है। सबके सिर पर छत देने का वायदा आपकी सरकार कैसे पूरा करेगी?
हमने गांवों में आवासों के लिए पात्र लोग चुनने की व्यवस्था पारदर्शी कर दी है और इसमें जन प्रतिनिधियों का सहयोग लिया जा रहा है। हमारी सरकार गांवों में शिविर लगाकर पात्र लोग चुन रही है। गांवों में बसने वाले गरीबों को आवास उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता है।

Keyword: UP, Rural Development, Industry,
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