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वित्तीय साक्षरता बढ़ाने में मददगार हिंदी
आशुतोष मणि त्रिपाठी /  September 13, 2012


दिल्ली के चावड़ी बाजार में शादी के कार्ड का कारोबार करने वाले रमेश अग्रवाल इन दिनों बहुत ही परेशान हैं। परेशानी का सबब पूछने पर वह कहते हैं, 'भाईसाहब, सरकार नित नए नियम लागू कर रही है। ऐसे में हमारे लिए कारोबार चलाना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। नए नियमों को समझ पाना हमारे लिए कठिन है क्योंकि ये सब कुछ अंग्रेजी में होता है।' ये परेशानी अकेले रमेश की नहीं बल्कि ऐसे तमाम कारोबारियों की है।
भारत की स्थिति
वित्तीय ढांचे की कम समझ और भाषा की कम जानकारी के चलते व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अपने देश में प्रचलित वित्तीय व्यवस्था की समझ रखते हुए धन के प्रबंधन की समझदारी को हम वित्तीय साक्षरता का नाम देते हैं। पिछले दिनों मास्टरकार्ड द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक वित्तीय साक्षरता के मामले में भारत 20वें स्थान पर रहा। ताइवान और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने बाजी मारी, जबकि चीन तो आगे है ही। सरकार भी मानती है कि वित्तीय साक्षरता की कमी के चलते देश में धन का काफी नुकसान होता है। कम समझ के कारण ही आम लोग धन प्रबंधन के लिए दूसरों पर निर्भर होते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले एफएसडीसी ने वित्तीय साक्षरता को 11वीं और 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल करने की सिफारिश भी की है।
हिंदी है मददगार
ऐसे में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिहाज से हिंदी भाषा काफी महत्त्वपूर्ण साबित हो रही है। व्यापारी संगठनों ने कारोबारियों की वित्तीय समझ को बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टे्रड (सीएआईटी) के आदर्श गुप्ता इस बात से भलीभांति वाकिफ हैं। समस्या के कारण की ओर इशारा करते हुए वह कहते हैं, 'हमारे कारोबारियों के पास खास डिग्री तो होती नहीं है, इस वजह से उन्हे नई चीजें समझने में दिक्कत होती है।' कारोबारियों की इसी समस्या का हल निकालने के लिए सीएआईटी ने रिसेप्टिव एक्युमेन स्किल डेवलेपमेंट (आरएएसडी) नाम की कॉरपोरेट ट्रेनिंग देने वाली कंपनी के साथ मिलकर 'रिटेल स्कूल' नाम का प्रयास शुरू किया है। इस प्रयास के बारे मेें बताते हुए आरएएसडी की मुख्य कार्याधिकारी सिमी कोचर कहती हैं, 'वैसे तो हम कॉरपोरेट ट्रेनिंग का काम कर रहे थे। लेकिन कारोबारियों को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव बिल्कुल नया था।' सिमी कहती हैं, 'फिलहाल हम दिल्ली के कारोबारियों को कराधान, निवेश प्रक्रियाओं और अनेक अन्य विकल्पों के बारे में बताते हैं।'
तकनीकी का भी है योगदान
इसके अलावा इस दिशा में तकनीकी के योगदान को भी नहीं नकारा जा सकता है। इस ओर कदम बढ़ाते हुए वोडाफोन ने गुजरात के अपने ग्राहकों के लिए हिंदी एसएमसएस की सेवा शुरू की है। इस सेवा के तहत कंपनी बाजार की दिनभर की गतिविधियों के बारे में हिंदी में एसएमएस मुहैया कराती है।
अपेक्षाएं
इन उपायों की मदद से लोगों को वित्तीय रूप से साक्षर बनाने के प्रयास जारी हैं। कोचर कहती हैं, 'हम कोशिश करेंगे कि ऐसे प्रयासों को और गति दी जाए ताकि लोगों को वित्तीय प्रबंधन के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।'

Keyword: hindi, divas, india,
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