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लटके पड़े विधेयकों को पारित कराने में कांग्रेस को मिलेगा विपक्ष का साथ
ज्ञान वर्मा / नई दिल्ली August 20, 2012

उद्योग संगठनों के कड़े वित्तीय सुधार के दबाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसद में प्रमुख विधेयकों को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार का समर्थन करने को तैयार हो गई है। हालांकि पार्टी का कहना है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों को स्वीकार करना होगा, जिसमें विपक्ष ने अपनी राय दी है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों, खासकर भाजपा से बातचीत की कोई पहल नहीं की और अगर सरकार विपक्षी दलों की राय का सम्मान करने पर सहमत हो जाती है तो भाजपा नेता संप्रग के साथ अहम मसलों पर बातचीत को तैयार हैं।
बहु ब्रांड खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मसले पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और भाजपा के बीच भी मतभेद हैं। विपक्षी दल के कुछ वरिष्ठ नेता  बहुब्रांड खुदरा में एफडीआई को अनुमति दिए जाने पर सहमत हैं। भाजपा की निकट सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) भी इसके समर्थन में है, लेकिन अन्य सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) इसके विरोध में है।
भाजपा नेतृत्व ने पहले ही पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को समर्थन करने का वादा किया है और साथ ही उसने विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक को भी समर्थन देने को कहा है। भाजपा नेता कहते हैं कि संसद की स्थायी समिति ने जो राय दी है, अगर केंद्र सरकार उसे विधेयक में शामिल करती है, तभी वह विधेयक का समर्थन करेंगे।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'हमने पीएफआरडीए के मसले पर संप्रग के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की है और सरकार से कहा है कि हम इसका समर्थन करेंगे। हम भूमि अधिग्रहण विधेयक का भी समर्थन करेंगे, बशर्ते हमारी सिफारिशें स्वीकार की जाएं। लेकिन सरकार ने इस मसले पर कोई बातचीत नहीं की। यह कांग्रेस और उसके सहयोगियों का सिरदर्द है कि विधेयक को संसद में नहीं पेश किया जा सका, भाजपा उसमें कोई बाधा नहीं पहुंचा रही है।' भाजपा नेताओं ने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक में राज्यों की भी राय शामिल की जाए, वर्ना उन्हें ऐसा लगेगा कि देश के संघीय ढांचे पर हमला हो रहा है।
भाजपा नेता वायदा सौदा नियामक अधिनियम संशोधन विधेय, कंपनी विधेयक, बैंकिंग नियामक संशोधन विधेयक, बीमा विधेयक और प्रत्यक्ष कर नियम विधेयक पर भी चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन वह इस पर भी जोर दे रहे हैं कि पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति ने जो सिफारिशें की हैं, उस पर सरकार सहमत हो। भाजपा नेतृत्व इन मसलों पर सरकार से बातचीत को तैयार है, लेकिन पीएफआरडीए, भूमि अधिग्रहण विधेयक और वायदा सौदा नियामक संशोधन विधेयक पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अड़ंगा डाल रही हैं, जो केंद्र में संप्रग की सहयोगी हैं। कंपनी विधेयक के बारे में भाजपा नेताओं की आपत्ति है, क्योंकि केंद्र सरकार ने स्थायी समिति की ज्यादातर सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया है। संसद में जब विधेयक पेश किया गया तो भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने तर्क किया कि यह पूरी तरह से नया विधेयक है, इसलिए इसे फिर से वित्त मामलों की स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

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