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घई को आखिर फिल्म ही भायी
आभास शर्मा /  August 19, 2012

वर्ष 1965 में जब सुभाष घई भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) से पढ़ाई पूरी करके मुंबई आए थे, तो उनका एकमात्र लक्ष्य अभिनेता के रूप में शोहरत कमाना था। राजेश खन्ना की बड़ी हिट फिल्म 'आराधना' समेत छह फिल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं निभाने के बाद उन्होंने महसूस किया कि अभिनय की बदौलत वह कोई मुकाम नहीं हासिल कर पाएंगे, लिहाजा उन्होंने शत्रुघन सिन्हा अभिनीत कालीचरण (1976) से फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। वह कहते हैं, 'जब मैने एफटीआईआई की पढ़ाई पूरी की थी तब मुझे बिलकुल पता नहीं था कि करना क्या है और कोई भी फिल्मकार मुझे मौका देना नहीं चाहता था। तभी मैने सोचा था कि एक दिन मैं एक स्कूल शुरू करूंगा, जो उन लोगों को रास्ता दिखाएगा जो फिल्म उद्योग में बड़ा नाम कमाना चाहते हैं।'
उनका यह सपना तब पूरा हुआ, जब वर्ष 2006 में उन्होंने मुंबई में अत्याधुनिक फिल्म संस्थान ह्विस्लिंग वूड्स इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूडब्ल्यूआई) स्थापित की। चूंकि अब वह परियोजना परेशानी में पड़ गई है, इसलिए 80 और 90 की दशक में अपने निर्देशन का लोहा मनवाने वाले 67 वर्षीय सुभाष घई अब उसी क्षेत्र में दोबारा किस्मत आजमाने की कोशिश कर रहे हैं जहां एक खास दौर में उन्होंने बड़ी शोहरत कमाई थी- फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में। अटकलें हैं कि उन्होंने अपनी अगली फिल्म के लिए सलमान खान को साइन किया है। घई ने इन अटकलों को न तो खारिज किया है और न ही पुष्टि की है। खबरें तो यह भी हैं कि वह जैकी श्रॉफ के बेटे को बतौर अभिनेता पेश कर रहे हैं। लेकिन अब वह जमाना नहीं रहा, जब उन्होंने एक के बाद ब्लॉकबस्टर दी थी, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई थी। कर्ज, कर्मा, राम लखन और खलनायक ऐसी ही फिल्में थीं। वर्ष 2009 में आई उनकी फिल्म युवराज नहीं चल पाई थी, जिसमें सलमान खान, अनिल कपूर और कैटरीना कैफ प्रमुख भूमिकाओं में थे। इससे पहले वर्ष 2005 में आई उनकी फिल्म किसना और वर्ष 2001 में आई फिल्म यादें भी फ्लॉप साबित हुईं थी।
हालांकि घई कहते हैं कि उन्होंने फिल्म निर्देशन से कभी तौबा नहीं किया, लेकिन हकीकत तो यही है कि वह डब्ल्यूडब्ल्यूआई में इतना मशगुल रहे कि निर्देशन कहीं पीछे छूट गया। उनकी मुश्किलें तब शुरू हुईं, जब इस वर्ष फरवरी में बंबई उच्च न्यायालय ने उनके संस्थान के लिए मुंबई के गोरेगांव में आवंटित 20 एकड़ जमीन का आवंटन रद्द कर दिया। इसके बाद उनकी कंपनी मुक्ता आट्र्स की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में की गई वह अपील भी खारिज हो गई, जिसके जरिये उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी। श्याम बेनेगल, शबाना आजमी, अनुपम खेर और शेखर कपूर जैसे फिल्म उद्योग के दिग्गज उनके समर्थन में आगे आए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
घई का कहना है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया और वह नहीं चाहते कि 'किसी भी कीमत पर छात्रों को कोई परेशानी हो।' आरोप लगाए गए कि घई ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख से तगड़ी रियायत पर जमीन हासिल की थी।

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