बिजनेस स्टैंडर्ड - काले धन पर रिपोर्ट में हो सकती है देरी
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काले धन पर रिपोर्ट में हो सकती है देरी
संतोष तिवारी / नई दिल्ली August 09, 2012

देश के भीतर और विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन के बारे में आधिकारिक अनुमान सितंबर में आना था लेकिन अब उसमें देरी हो सकती है। तीन संस्थाएं नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी), नैशनल काउंसिल ऑफ एप्लाएड इकोनॉमिक रिसर्च (एचसीएईआर) और नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनैंशियल मैनेजमेंट (एनआईएफएम) काले धन को लेकर स्वतंत्र तौर पर काम कर रही हैं। एनआईपीएफपी के एक अधिकारी ने अपना नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया, 'हमने रिपोर्ट के सौंपे जाने के बारे में थोड़े और समय की मांग की है। हम इस साल के अंत तक मसौदा रिपोर्ट को सौंपने की कोशिश कर रहे हैं और यह बहुत अधिक देरी नहीं है।'
एनसीएईआर के अधिकारियों ने हालांकि इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि यह सरकारी काम है और इस संबंध में सरकार ही आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी कर सकती है। एनसीएईआर को भेजे गए ईमेल पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। वहीं एनआईएफएम के किसी भी अधिकारी से बिजनेस स्टैंडर्ड संपर्क नहीं कर पाई। आंकड़ो को जमा करने में आ रही परेशानी की वजह से निर्धारित समयावधि के भीतर रिपोर्ट जमा कराने में अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय इस काम में तेजी लाए जाने के लिए वित्त मंत्रालय को निर्देश दे चुका है और इस बात की पुष्टि करते हुए वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के इस निर्देश से संंबंधित संस्थानों को अवगत कराया जा चुका है। काले धन को लेकर अलग अलग आंकड़ो के सामने आने और इस मामले में भ्रम की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने इन संस्थानों को आधिकारिक अनुमान जारी करने का जिम्मा सौंपा है। काले धन से संबंधित आधिकारिक अनुमान के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने पिछले साल मार्च में देश के इन तीन शीर्ष आर्थिकथिंक टैंक  के साथ समझौता किया था। काले धन से संबंधित आधिकारिक अनुमान के सामने आने के बाद सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए नीतियों को बनाने में मदद मिलेगी।
समझौते के प्रावधानों के मुताबिक ये संस्थान भारतीयों के बेनामी संपत्तियों और उनके काम काज का आकलन करेगी जो कि काले धन और धन शोधन का मुख्य स्रोत है। तीनों संस्थान काले धन की पहचान के  तरीके और उसकी रोकथाम के उपायों की अनुशंसा करेगी ताकि उसे आधिकारिक तौर पर देश की अर्थव्यवस्था में शामिल किया जा सके। समझौते के तहत तीनों संस्थानों को स्वतंत्र तरीके से 18 महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। हालांकि इसी बीच सरकार काले धन पर श्वेत पत्र जारी कर चुकी है।

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