बिजनेस स्टैंडर्ड - जमीन के भीतर कारोबारी शहर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, July 20, 2019 04:48 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

जमीन के भीतर कारोबारी शहर
टी ई नरसिम्हन /  July 06, 2012

पश्चिमी तमिलनाडु के एक छोटे से गांव कोडुमनाल तक का लंबा सफर बेहद थकाऊ है। हाल तक इस गांव के बारे में लोगों ने नहीं सुना था। जब पुरातत्त्वविदें ने यहां खुदाई कर 2,500 साल पुरानी औद्योगिक रियासत का पता लगाया तब से यह जगह बेहद मशहूर हो गई है। चेन्नई से इस गांव तक का सफर तीन चरणों में पूरा होता है। चेन्नई से आठ घंटे की यात्रा करने के बाद इरोड आता है जो जिला मुख्यालय है। इसके बाद दो घंटे की बस यात्रा के जरिये कांगेयाम (तिरुपुर जिले का एक छोटा शहर जो कपड़े के लिए मशहूर है) पहुंचा जा सकता है।
उसके बाद आखिरी बस यात्रा कोडुमनाल तक के लिए होती है। सफर का आखिरी चरण बेहद दिलचस्प है। सबसे पहले जर्जर बस खेतों और बेहद शानदार बंगलों के रास्ते से होकर गुजरती है। लेकिन उसके बाद चारों तरफ बंजर भूमि नजर आने लगती है। वहां कहीं-कहीं नारियल के पेड़ दिख जाते हैं। इस रास्ते से गुजरते हुए यह कल्पना करना जरा मुश्किल होता है कि यहां कभी चहल-पहल वाला एक शहर हुआ करता था। आधुनिक कोडुमनाल में केवल 1,000 लोग हैं जो अपनी आजीविका के लिए मवेशी पालते हैं और कपड़े के लिए मशहूर शहर तिरुपुर में काम करते हैं।
बस में मौजूद बेहद बातूनी बस कंडक्टर मुझसे पूछता है, 'क्या आप पुरातत्त्व विभाग से आए हैं?' जब मैंने अपना सिर ना में हिलाया तो उसने कहा, 'आजकल यहां कई लोग पुरातत्त्व विभाग से आते हैं इसलिए मुझे लगा कि आप उन्हीं में से एक हैं।' कोडुमनाल के नजदीक जहां पुरातात्त्विक खुदाई का काम चल रहा था, वहां सुबह के 8 बजे भी धूप काफी कड़ी लगती है। खुदाई क्षेत्र का इलाका निर्जन सा लगता है। इस इलाके में पहुंचने पर आपको खुदाई की आवाज सुनाई पड़ती है। यहां पुरातत्त्व के दर्जनों छात्र मौजूद हैं जिन्हें दिशानिर्देश दिए जा रहे हैं। पुडुचेरी विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रमुख और प्रोफेसर के राजन पुरातत्त्व के छात्रों के दल की अगुआई करते हैं। राजन करीब 45-50 साल के दिखते हैं। वह अपने आसपास मौजूद छात्रों से बड़ी तल्लीनता से बातचीत कर रहे हैं। कई दिनों तक खुदाई का सिलसिला यूं ही चलता रहा।
राजन का कहना है कि कोडुमनाल चौथी सदी ईसा पूर्व निर्माण और व्यापार का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था। तमिल भाषा के संगम साहित्य में भी इसका जिक्र है जो 300 ईसा पूर्व के करीब लिखा गया था। जब यह बस्ती अपनी समृद्घि की पराकाष्ठा के दौर में थी उस वक्त यहां हजारों लोग रहा क रते थे। ऐसा लगता है कि तीसरी सदी में यहां से उनका पलायन हो गया।
वर्ष 1961 में कुछ पुरातत्त्वविद् कोडुमनाल आए जब भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के वी एन श्रीनिवास देसीकन के नेतृत्व में यहां पहली बार खुदाई की गई। वर्ष 1980 में दूसरी बार तमिलनाडु राज्य पुरातत्त्व विभाग ने परीक्षण खुदाई कराई। इसके बाद तमिलनाडु विश्वविद्यालय के पुरालेख और पुरातत्त्व विभाग, मद्रास विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास और पुरातत्त्व विभाग और राज्य पुरातत्त्व विभाग ने मिलकर 1985, 1986 और 1990 में और भी खुदाई कराई। हालांकि उनमें ज्यादा कुछ नहीं मिल सका। वर्ष 1985 और 1990 के बीच पुरातत्त्वविदों ने 49 खुदाई कराई गई लेकिन केवल 170 धातु और मिट्टी के बर्तन के टुकड़े मिले जिन पर खुदी हुई कुछ लिखावट मिली थी।
वर्ष 2012 में खुदाई में एक नया मोड़ आया। राजन की टीम को सोना मिला। 21 अप्रैल से उन्होंने 4 जगहों पर खुदाई की और करीब 130 मिट्टी और धातु के बर्तन के टुकड़े मिले जिस पर कुछ आकृति बनी हुई थी। पुडुचेरी विश्वविद्यालय के पुरातत्त्व विभाग के 32 साल के एक पीएचडी छात्र यतीश कुमार वीपी ने करीब दो महीने तक कोडुमनाल में काम किया। उनका कहना है, 'मैंने वर्ष 2005 से ही चार विभिन्न खुदाई स्थलों के लिए काम किया है। इन क्षेत्रों में एक लिपि पाना मुश्किल था लेकिन एक ही खुदाई स्थल पर हमें 130 लिपियां मिली।'
कुमार और दूसरे छात्रों को दो बड़े बर्तन मिले जिनमें से एक पर तमिल ब्राह्मी लिपि के बड़े अक्षरों में (संबान सुमानन) लिखा गया था जो एक नाम की तरह लग रहा था। कुमार का कहना है कि वह बर्तन 4 फुट लंबा है जिसका इस्तेमाल संभवत: पानी रखने के लिए किया जाता था। खुदाई से लगभग जो भी शिलालेख मिले हैं उन पर निजी नाम खुदे हुए हैं जो किसी व्यक्ति के द्वारा किए जाने वाले कारोबार का संकेत भी देते हैं। बर्तनों पर जो शब्द लिखे गए हैं वे प्राकृत में लिखे गए हैं जो उस वक्त उत्तर भारत की भाषा हुआ करती थी। राजन का कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि कोडुमनाल का उत्तर के साथ सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क था।
धीमी रफ्तार से हो रहे इस मुश्किल काम में कई तरह की खोजें हुईं। राजन इस जगह पर खुदाई के काम से 1984 से ही जुड़े रहे हैं। आखिरी खुदाई 1990 में हुई थी। इस साल की खुदाई के लिए इस प्रोफेसर ने भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल से 3.5 लाख रुपये हासिल किए।
इस खुदाई से कई आकर्षक और सुंदर कलाकृतियां मिली हैं। ये सभी कलाकृतियां सुंदर सजावटी सामान के माफिक हैं जिनमें अर्धनिर्मित चूडिय़ां और कंगन आदि शामिल हैं जो हरितमणि और स्फटिक से बने हैं। इनमें से कुछ पत्थर तो इतने शुद्घ हैं कि वे रंगहीन हैं। एक खुदाई में एक शेर के आकार का कुछ सामान मिला जो तांबे का बना हुआ था और करीब 15 सेंटीमीटर लंबा है। इसमें नीलम, हीरे और कुछ लाल-नारंगी रंग के रत्न जड़े हुए हैं। पुराने नीलम, फीरोजा, गोमेद,जंबुमणि, नीले, लाल, हरे रंग के पत्थर, रक्तमणि,  शैलखटी और क्वॉटर्ज के टूटे हुए मोती भी उस गांव के आसपास बिखरे मिले हैं।
एक यादगार वाकया यह हुआ था कि पुरातत्त्वविदों को एक ही कब्र में 2,220 कार्नेलियन मोती मिले। राजन का कहना है कि देश में यह अपनी तरह की इकलौती मिसाल है। कोडुमनाल के आसपास नीलम, हरितमणि और क्वॉट्र्ज के स्रोत हैं लेकिन कार्नेलियन, गोमेद और नीले रंग का पत्थर दूर से ही यहां आया होगा। मुमकिन है कि ये पत्थर गुजरात, श्रीलंका और अफगानिस्तान से आए हों। प्राचीन अर्थव्यवस्था भी वैश्विक रही होगी। शोध से यह अंदाजा मिलता है कि महंगी मणियों को काटने और उन्हें एक शक्ल देने का काम यहां होता होगा ताकि उनके कम मूल्यवान उपरत्न और मोती बनाए जा सकें। इत्तफाक से कोडुमनाल में सीप की कटाई का काम 2,300 वर्ष पहले हुआ करता था।
लेकिन कामगारों की तकनीकी क्षमता केवल मणि निर्माण तक ही सीमित नहीं थी बल्कि वे लोहे और स्टील के साथ भी काम करते थे। चेन्नीमलाई पर्वत और उसके आसपास लौह अयस्क के पुराने स्रोत दिखते हैं जो पूर्व दिशा से 15 किलोमीटर की दूरी पर हैं। पुरातत्त्वविद कहते हैं, 'चेन्नीमलाई में विदेशी व्यापारियों के आने-जाने का सिलसिला बरकरार था जहां लौह अयस्क का भंडार है और कोडुमनाल में लौह अयस्क का प्रसंस्करण किया जाता था और वहीं से तैयार माल का निर्यात किया जाता था।'
राजन की टीम को कोडुमनाल में ऐसी भ_ïी के टुकड़े मिले जो आसानी से पिघल नहीं सकते। ऐसी भट्ठी 1,300 डिग्री सेल्सियस की गर्मी को भी बर्दाश्त कर सकती है जो लोहे के पिघलने की सीमा से भी ज्यादा है। राजन का कहना है कि बेंगलूर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की शारदा श्रीनिवासन ने इसका परीक्षण कर इसकी पुष्टिï की है।
कोडुमनाल दुनिया का सबसे बड़ा वुट्ज स्टील केंद्र हुआ करता था। वुट्ज स्टील, कार्बन स्टील का एक रूप है जो प्राचीन भारत में ज्यादा टिकाऊ वस्तुओं में शुमार किया जाता था, उसके बाद पश्चिम में इसकी मांग बढ़ी। रोमन साहित्य में दक्षिण भारत के चेर साम्राज्य से स्टील के आयात का संदर्भ मौजूद है। संगम साहित्य में भी वुट्ज स्टील का संदर्भ मौजूद है जिससे यह संकेत मिलता है कि रोमन-मिस्र यहां से शुद्घ स्टील का आयात किया करते थे। दिल्ली के कुतुब मीनार में जंगरोधी लोहे का जो पुराना खंभा है वह भी इसी क्षेत्र के लोहे का बना हुआ है। कोडुमनाल तिरुपुर से दूर नहीं है जो आधुनिक भारत का प्रमुख कपड़ा केंद्र है। प्राचीन कोडुमनाल में भी कपड़े तैयार कराए जाते थे। यहां खुदाई के दौरान टेराकोटा की कई कतली मिली हैं। आश्चर्यजनक रूप से संभाल कर रखे गए धागे भी पाए गए। ऐसा माना जाता है कि ये धागे 2,200 साल पुराने हैं।
कोडुमनाल के कारोबार की कडिय़ां रोमन सिक्के के रूप में भी मिलती हैं। यह शहर तेजी से अपने कारोबार का विस्तार करने वाले शहरों में से था और रोमन कारोबारी इस शहर में विभिन्न तरह के पत्थर और रत्न खरीदने आते थे। पश्चिम में निर्यात होने वाले सामान को सड़क के रास्ते तिरुसूर के पास मौजूद पश्चिमी तट के मुजिरिस (पट्टीनाम) चेर बंदरगाह तक ले जाकर उसे जहाज से भेजा जाता था। दक्षिण पूर्व एशिया के लिए सामान को पूर्व में करूर तक ले जाया जाता था जो चेर साम्राज्य की राजधानी थी।
उसके बाद भेजे जाने वाले सामान को कावेरी के मुहाने पर पोंपुहार तक ले जाया जाता था और फिर विदेश भेजा जाता था। व्यापार के स्वरूप को देखते हुए और पूर्वी यूरोप में हरितमणि आभूषणों की मौजूदगी से यह अंदाजा मिलता है कि कोडुमनाल का निर्यात काफी दूर देशों तक किया जाता था। कोडुमनाल कावेरी की सहायक नदी नोयाल पर स्थित है। इस नदी का इस्तेमाल नौवहन के लिए नहीं किया जाता है। नोयाल कम गहरी, पथरीली है और इसकी धाराएं काफी तेज हैं इसलिए कारोबार का रास्ता इसके किनारे से जुड़ा हुआ है। राजन के शोध के मुताबिक कोडुमनाल का आधा क्षेत्र जो करीब 100 एकड़ का है वह प्राचीन काल से ही बसा हुआ था। आधा क्षेत्र दबा हुआ है।
पिछले कुछ महीनों में पुरातत्त्वविदों ने 180 कब्रों की खुदाई की है। उनके मुताबिक राजन का कहना है कि इनमें बर्तन, केतली, सुराही और पत्थर पाए गए हैं। जिन कब्रों में पत्थर हैं उससे लोगों की हैसियत का अंदाजा मिलता है और इन कब्रों में पुरातत्त्वविदों को सोना और दूसरे सामान भी मिले हैं। कुछ बड़ी कब्रें भी हैं जहां बड़े पत्थर लगाए गए हैं। हालांकि ऐसे करीब 300 बड़े पत्थरों वाली कबेंर हैं जो विभिन्न श्रेणियों का संकेत देती हैं।
पुरातत्त्वविदों को 3 हड्डिïयों का ढांचा भी मिला है जिनमें से दो महिला और एक पुरुष का है। इनमें से पुरुष के पैर एक के ऊपर एक हैं और उसके एक घुटने के नीचे एक बड़ा पत्थर है और हाथ में सोने की अंगूठी है। राजन इसके बारे में हमें बताते हैं कि इससे मृतक व्यक्ति के काम का अंदाजा मिलता है। वह व्यक्ति संभवत: सुनार हो सकता है जो इस तरह बैठकर महंगी धातु पर काम कर रहा हो। यहां पाए गए पत्थर के ताबूत की तीन किस्में हैं जो किसी व्यक्ति की हैसियत के हिसाब से बनाई गई हैं। यहां पर जिस तादाद में और जिस किस्म की कब्र दिखती हैं उससे अंदाजा मिलता है कि यह काफी संपन्न इलाका रहा होगा और यहां के निवासियों को अपने काम पर फख्र महसूस होता होगा जिसे एक बड़े औद्योगिक स्तर पर संगठित किया गया होगा।
इस साल यहां अप्रैल से लेकर  तीन महीने तक काम होता रहा जिसे छह पीएचडी शोधार्थियों, कई छात्र और 40 स्थानीय मजदूरों ने पूरा किया। लेकिन इसके बावजूद ऐसा लगता है कि पुरातत्त्वविदों ने अभी ये काम शुरू ही किया हो। यहां अब भी एक ऐतिहासिक बहुमूल्य खजाने का पता लगाने की पूरी गुंजाइश है। राजन के मुताबिक यहां खुदाई का काम अच्छी तरह पूरा होने में करीब 10 साल लग जाएंगे। इस खुदाई से इस क्षेत्र के न केवल संपन्न औद्योगिक और सांस्कृतिक इतिहास पर रोशनी पड़ी है बल्कि इससे भारत के आर्थिक इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण अध्याय से भी पर्दा हटा है। इससे कोडुमनाल के निवासियों के बेहतर भविष्य का संकेत भी मिल रहा है। यहां सड़कें बनाई जा रही हैं, पीने के पानी और बिजली का इंतजाम हो रहा है। कोडुमनाल के युवाओं ने स्कूल और कॉलेज जाना शुरू कर दिया है और कुछ लोग इस इतिहास से प्रेरणा भी लेंगे।

Keyword: tamilnadu, archaeologist, Industrial,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के संकेत के बाद कर्ज सस्ता करेंगे बैंक?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.