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इस मॉनसून में दावा करने में कहीं छूट न जाए आपका पसीना
बारिश के मौसम में मोटर दुर्घटनाएं होने की आशंका बढ़ जाती है, ऐसे में सरल तरीके से दावा करने के कुछ तरीके
योगिनी जोगलेकर /  July 01, 2012

मॉनसून ज्यादातर गाडिय़ों के मालिकों के लिए सिरदर्द लेकर आता है। भारी बारिश के मौसम में दुर्घटनाओं का खतरा अधिक रहता है। ऐसे मौसम में तो आप अपनी गाड़ी पार्किंग में खड़ी कर के भी सुकून से नहीं बैठ सकते क्योंकि पार्किंग में भी पानी भर जाने का खतरा बना रहता है। हो सकता है कि आपने अपनी गाड़ी का बीमा करा रखा हो, पर इतने भर से बात बनने वाली नहीं है। ऐसे समय में सबसे बड़ी समस्या क्लेम हासिल करने की होती है। आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर किस तरह आप बाधा मुक्त बीमा दावे कर सकते हैं।

आम धारणा है कि मॉनसून में गाडिय़ों के रखरखाव पर खर्च बढ़ जाता है। विश्लेषक बताते हैं कि साल के बाकी दिनों की तुलना में इन दिनों गाडिय़ों के दुर्घटना की आशंका 10 फीसदी तक बढ़ जाती है। भारती ऐक्सा जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अमरनाथ अनंतनारायण ने बताया, 'दावे का अनुपात मॉनसून की गंभीरता पर निर्भर करता है। मगर इस मौसम में दावों की संख्या तकरीबन 30 फीसदी तक बढ़ जाती है।'

हम सभी जानते हैं कि गाडिय़ों के लिए बीमा खरीदना जरूरी है, मगर इसके बाद भी आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय सड़कों पर दौडऩे वाली आधी से अधिक गाडिय़ों के पास बीमा कवर नहीं है। विशेषज्ञ जानकारी के अभाव को इसकी वजह मानते हैं। मालिकों को मॉनसून के पहले और मॉनसून के दौरान कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। आइये हम आपकी थोड़ी मदद करते हैं।

अपनी पॉलिसी को समझें
अगर कभी आपकी गाड़ी रास्ते पर अटक जाए तो आपको इन बातों का पता होना चाहिए। आपकी कार का बीमा कितने का है (सुनिश्चित रकम कितनी है), आपकी बीमा कंपनी के साथ पंजीकृत गराजों का नेटवर्क कैसा है, कौन से गराज कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराते हैं और बीमा कंपनी कौन-कौन सी आपातकालीन सुविधाएं दे रही है, इसकी जानकारी आपको पहले से होनी चाहिए। आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस में अंडरराइटिंग और दावों के प्रमुख संजय दत्ता बताते हैं, 'दावे के भुगतान से अब तक सर्विसिंग का कोई लेना देना नहीं है। फिर भी यह सलाह दी जाती है कि गाड़ी की माइलेज और अवधि के हिसाब से तीन या छह महीने में एक बार सर्विसिंग जरूर करा लें।'

दावे की प्रक्रिया जानें
आपको यह भी पता होना चाहिए कि अपनी बीमा कंपनी के पास दावे की क्या प्रक्रिया है। जैसे ही आपको दुर्घटना या नुकसान का पता चलता है, तत्काल बीमा कंपनी के कॉल सेंटर पर फोन करें जो आपको नजदीक के गैराज का पता बताएगी। सर्वे करने वाला सबसे पहले नुकसान का सर्वे करेगा और दावों की पुष्टिï करेगा। उसके बाद बीमा कंपनी सीधे गराज के साथ कैशलेस श्रेणी के तहत उसे भुगतान करेगी। आपको अपनी जेब से खर्च नहीं करना होगा। पर अगर आप अपने खर्च पर मरम्मत कराते हैं तो बाद में क्षतिपूर्ति हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको आवश्यक दस्तावेज जैसे मरम्मत कराने का बिल आदि बीमा कंपनी को उपलब्ध कराना होगा। दस्तावेज जमा कराने के सात कार्य दिनों के अंदर आप खर्च की गई रकम की वापसी की उम्मीद कर सकते हैं।

नो-क्लेम बोनस का पता लगाएं
भारती ऐक्सा के अनंतनारायण बताते हैं, 'मोटर क्लेम करने से पहले यह जांच लें कि मरम्मत खर्च नो क्लेम बोनस से अधिक है।Ó उदाहरण के लिए मान लीजिए कि आपकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और मरम्मत खर्च में से केवल 2,000 रुपये की भरपाई बीमा कंपनी आपको करेगी। आपकी गाड़ी के बीमा का सालाना प्रीमियम 20,000 रुपये है जिसका रिन्युअल किया जाना है। अब अगर आप 20 फीसदी यानी कि 4,000 रुपये एनसीबी के हकदार हैं तो चतुराई इसी में है कि आप मरम्मत खर्च की भरपाई के लिए दावा न करें। इससे बेहतर होगा कि आप 4,000 रुपये का एनसीबी हासिल करें।

न छिपाएं सूचनाएं
सूचनाएं छिपाने की वजह से कई सारे दावों को खारिज कर दिया जाता है। गाडिय़ों के मालिक या ड्राइवर दावे हासिल करने के लिए गलत रास्ते अपनाने से नहीं हिचकते हैं। कई तो अपनी गाडिय़ों का बीमा रिन्यू करना भूल जाते हैं और ऐसे में बीमा रहित अवधि के लिए दावे नहीं किये जा सकते। अगर गाड़ी चला रहे व्यक्ति के पास उस समय लाइसेंस न हो या फिर फर्जी लाइसेंस हो तो भी उसका दावा खारिज किया जा सकता है।

एचडीएफसी अर्गो जनरल इंश्योरेंस में रणनीतिक योजना, मानव संसाधन और मार्केटिंग के प्रमुख मुकेश कुमार कहते हैं, 'ज्यादातर दावों का भुगतान इसलिए नहीं किया जाता है क्योंकि नुकसान बीमा कवर में शामिल वजहों से नहीं हुआ होता है और कई बार तो बीमा धारक बीमा कंपनियों को नुकसान का सर्वे करने का मौका (दुर्घटना के समय) ही नहीं देता है।'

कागजात रखें पास
अपनी कार के बीमा दस्तावेज हमेशा कार में साथ रखें। बीमा कंपनी का टोल फ्री नंबर भी अपने पास रखें ताकि अचानक जरूरत पडऩे पर आप कंपनी में फोन कर सकें। साथ ही अपने बीमा एजेंट का पता और नंबर भी अपने साथ रखें। दुर्घटना के तत्काल बाद सर्वे करने को वाले को पूरी घटना की जानकारी देना आसान होता है क्योंकि तब पूरी घटना आपके दिमाग में ताजा होती है।

Keyword: motor insurance, claims, monsoon,
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