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खेल-खेल में खिलेगी दिल्ली
वंदना गोम्बर / नई दिल्ली July 23, 2008
दिल वालों की दिल्ली एक विश्वस्तरीय शहर बनने के लिए पूरे दमखम के साथ तैयार है। इंतजार कीजिए सिर्फ 800 दिनों का, जब कई हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं के पूरा होने के साथ ही दिल्ली बदली हुई नजर आएगी।
जाहिर तौर पर दिल्लीवासी अपने आसपास ढेरों बदलाव से रूबरू हो रहे होंगे लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों के करीब होने के साथ ही बदलाव की यह बयार और तेज हो चलेगी। दिल्ली में 3 से 14 अक्टूबर 2010 के बीच राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया जाना है, जिसमें अब 800 दिन बचे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी के लिए तैयार एक्शन प्लॉन 2010 के मुताबिक हर दिन 24 घंटे बिजली और पानी की आपूर्ति, बेहतरीन सार्वजनिक परिवहन प्रणाली, नए फ्लाईओवर, पुल, पैदल पार पथ (अंडरपासेज) और उत्कृष्ट मेडिकल सुविधा मुहैया कराकर दिल्ली को खूबसूरत बनाने की योजना है। दिल्ली सचिवालय में आजकल सड़कों को संजाने की चर्चा जोरों पर है और कई जगह पर स्ट्रीट फर्नीचर और विश्वस्तरीय सड़क दिशानिर्देश पहले ही लगाए जा चुके हैं।

अनुमान है कि खेलों की तैयारी के लिए दिल्ली करीब 65000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। इसमें से करीब आधी राशि गैस आधारित नए बिजली संयंत्रों की स्थापना के लिए खर्च होगी। बिजली के अलावा सबसे अधिक खर्च 17000 करोड़ रुपये का खर्च मेट्रो रेल के विकास पर किया जाएगा। इसके अलावा फ्लाईओवर्स और पुलों पर 6,700 करोड़ रुपये, नई बस प्रणाली पर 1,518 करोड़ रुपये और जल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए 1,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इसमें से कुछ राशि शहर के बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए भी खर्च की जाएगी। खेलों को लेकर महत्वाकांक्षी योजनाएं तैयार की गई हैं, जिन्हें अगले कुछ वर्षो के दौरान हकीकत में बदला जाएगा। यह योजनाएं राष्ट्रमंडल खेलों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं लेकिन ये दिल्ली के ढांचागत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी। दिल्ली के मुख्य सचिव राकेश मेहता ने बताया कि 'शहर का ढांचागत विकास तो शहर के लिए है। खेल 15 दिन में खत्म हो जाएंगे।'

सत्ता के गलियारों में आजकल यह चर्चा है कि यदि आप किसी भी खर्च के लिए फटाफट मंजूरी हासिल करना चाहते हैं तो उसे राष्ट्रमंडल खेलों के साथ जोड़ दीजिए और फिर तेजी से मंजूरी मिलनी पक्की है। ऐसे समय में जबकि ज्यादातर निवेश परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, कुछ अधिकारियों का मानना है कि स्टील और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्रियों की कीमतों में आए उछाल के कारण 65,000 करोड़ रुपये निवेश का आंकड़ा कम पड़ सकता है। भारतीय खेल प्राधिकरण के तहत 5 स्टेडियमों के उन्नयन की लागत 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,500 करोड़ रुपये हो चुकी है।

हाल में नियुक्त हुए खेल मंत्री मनोहर सिंह गिल ने बताया कि 'हर चीज की लागत बढ़ रही है।' आमतौर पर ऐसे सभी अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के साथ होता है। एक अनुमान के मुताबिक लंदन में 2012 में  आयोजित हुए ओलंपित खेलों के आयोजन पर 18 अरब डालर खर्च किया गया था जो वास्तविक अनुमानों के मुकाबले तीन गुना अधिक है।

गिल पहले ही अपने कैबिनेट सहयोगियों को बता चुके हैं कि उन्हें अतिरिक्त फंड की जरुरत पड़ेगी। उन्होंने फंड को समय से जारी करने की भी इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि 'इसमें मनमर्जी जैसी कोई बात नहीं है। अगर हमने जिम्मेदारी ली है तो हमें इसे पूरा भी करना होगा। भारत असफल नहीं हो सकता है।' उनके कथन बात को दर्शाते हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों का सरोकार सिर्फ दिल्ली से नहीं है बल्कि इसकी अहमियत पूरे देश के लिए है।
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