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ई-बुक ललचाए, बच्चों से रहा न जाए
प्रियंका जोशी /  June 08, 2012

छह साल की त्रिकाया शर्मा रोजाना दो घंटे अपने पापा के आईपैड से खेलती है, जिसमें वह ज्यादातर समय अपनी डिजिटल पुस्तकों को पढऩे और उन पर कार्य करने में बिताती है। टेलीफोन पर उसने कहा, 'मैं अपनी आईपैड पुस्तकों के साथ गाना, रंग और वस्तुओं को गिनना पंसद करती हूं।' उसके पिता तिनेश शर्मा का कहना है, 'हालांकि हमने उसकी उम्र के हिसाब से आईपैड में बहुत से गेम डलवाये हैं, लेकिन वह इस पर पुस्तकें पढऩा ज्यादा पसंद करती है। हम टैबलेट पर नई शिक्षण सामग्री खरीदकर बहुत खुश हैं, क्योंकि खेल वाली इस पढ़ाई में वह बहुत रुचि लेती है।' यह बच्ची कहती है कि उसे हाल ही में पैट दी कैट : आई लव माई व्हाइट शूज शीर्षक वाली ई-बुक बहुत पसंद आई, जिसमें वह आईपैड पर अपनी उंगलियों के स्पर्श से पैट के जूतों का रंग बदल सकती है, साथ ही गीत की आ रही आवाज के साथ गा सकती हूं, आवाज को सुन सकती हूं और जोर-जोर से बोलकर पढऩे के समय अपनी आवाज को रिकॉर्ड कर सकती हूं।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्री-स्कूल में जाने वाले बच्चे और डिजिटल मीडिया का उपयोग करने वाले युवा शिक्षण की अवधारणा में क्रांति ला रहे हैं। एक फील्ड अध्ययन में दावा किया गया है कि ई-बुक्स या प्रिंट बुक्स में से एक पढऩे का विकल्प दिए जाने पर बच्चे ई-बुक्स को ज्यादा पसंद करते हैं। क्विक स्टडी में कहा गया है कि प्रिंट बुक्स के समान ही ई-बुक्स से पढऩे वाले बच्चे उस सामग्री को याद कर सकते हैं और समझ सकते हैं। इसका क्विक स्टडी नाम इसके थोड़े समय और इसके सैंपल ग्रुप के लघु आकार के कारण दिया गया है। इस अध्ययन में 24 परिवारों को शामिल किया गया जिनके बच्चे 3-6 साल के बीच थे और प्रिंट और ई-बुक्स पढ़ रहे थे। इसके अलावा बच्चों के लिए बाजार में डिजिटल बुक्स और ई-रीडर ऐप्स की बाढ़ आ गई है। अकेले ऐपल के ऐप स्टोर में बच्चों की पुस्तकों के 6,000 से अधिक ऐप्स उपलब्ध हैं।
प्रकाशकों का मानना है कि डिजिटल बुक्स ने स्कूलों और विद्यार्थियों में जगह बनानी शुरू कर दी है। यूनिक पब्लिशर्स के निदेशक (उत्पाद विकास) अमृत सिंह चोपड़ा कहते हैं, 'श्रव्य और दृश्य याददाश्त बहुत अहम होती है और डिजिटाइजेशन यह मकसद पूरा करता है। परीक्षाओं के डिजिटलाइजेशन पर विशेष जोर है। अब  प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाएं जैसे जीमैट, कैट आदि  ऑनलाइन होने लगी हैं और अन्य परीक्षा आयोजित करवाने वाली संस्थाएं यह रास्ता अपना सकती हैं।' चोपड़ा का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों की ऊबाऊ पंक्तियां थोड़े समय तक ही युवा पाठकों की रुचि बनाए रख सकती हैं, लेकिन अगर इसमें वीडियो, इंटरेक्टिव रिविजन मॉड्यूल्स को जोड़ दिया जाए तो पढ़ाई ज्यादा आसान और रोचक हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिविजन के लिए हर चैप्टर के मुताबिक टेस्ट से विद्यार्थियों को उचित व्याख्या सहित सही उत्तर जानने में मदद मिलती है।' मुंबई में एक 15 वर्षीय स्कूली छात्र शांतनु देशमुख का कहना है कि अचानक ही उसे अटानो डॉट कॉम पर फ्री डिजिटल बुक्स और टेस्ट पेपर्स मिल गए और उसने अपने पिताजी के सैमसंग गैलेक्सी टैबलेट पीसी (ऐंड्रॉयड प्लेटफॉर्म) पर कंपनी का ऐप डाउनलोड कर लिया। उसने कहा, 'डायग्राम के आपसे संवाद करने से टेस्ट पेपर्स सॉल्व करना या कंप्यूटर या फिजिक्स की थ्योरी समझना बहुत रोचक बन जाता है।' अट्टानो की सीईओ सौम्या बनर्जी को विश्वास है कि भारत में 10,000 करोड़ रुपये के डिजिटल सामग्री तैयार करने का बाजार 2012 में लंबी छलंाग लगाएगा। भारत में अट्टानो की शैक्षणिक पुस्तक प्रकाशकों के साथ साझेदारी है। बनर्जी इसकी वजह बताते हुए कहती हैं, 'अट्टानो पर शैक्षणिक सामग्री पेपरबैक पुस्तकों की कीमत से औसतन 20 फीसदी सस्ती है। विद्यार्थी केवल 5 मिनट में सामग्री को डाउनलोड कर पढ़ाई शुरू कर सकते हैं।' अट्टानो ई-बुक्स को सभी प्रमुख प्लेटफॉर्मों- ऐंड्रॉयड, आईपैड और विंडो पर प्राप्त किया जा सकता है और कंपनी के पास 10,000 मुफ्त शिक्षण वीडियो और 250 ई-बुक्स का संग्रह है।
डिजिटल सामग्री में मौकों को भांपते हुए कार्टून नेटवर्क ने अट्टानो के साथ मिलकर वीडियो ई-बुक्स और इंटरेक्टिव एक्टिविटी बुक्स पेश की हैं, जो बेन 10, जीवेन 10, जेनरेटर रैक्स और पावरपफ गल्र्स समेत चैनल के विभिन्न ब्रांडों पर आधारित हैं। यह इंटरेक्टिव प्लेटफॉर्म ड्रॉइंग, कलरिंग और नोट्स आदि बनाने के लिए विभिन्न टूल मुहैया कराता है। वीडियो ई-बुक्स एपिसोड्स की वीडियो क्लिप को प्ले सकती है, जो पढऩे और देखने के बीच के अंतर को भर देता है। ये किताबें 40 रुपये से लेकर  200 रुपये तक की हैं, जो 4-14 साल के बच्चों के लिए हैं।

Keyword: ipad, internet, telephone,
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