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पीपीपी मॉडल पर नाइट सफारी की तैयारी
वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ May 29, 2012

पर्यटन को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा में वाइल्ड लाइफ 'नाइट सफारी' शुरू करने की योजना बनाई है।
इसमें राज्य की हिस्सेदारी जमीन के रूप में होगी, जबकि अन्य निवेश डेवलपर की ओर से होगा। डेवलपर का चयन बोली की प्रक्रिया से होगा। वैश्विक स्तर का प्रस्तावित नाइट सफारी पर्यावरण के अनुकूल होगा। यह भारत की इस तरह की पहली और सिंगापुर के बाद एशिया की दूसरी योजना होगी। राज्य बुनियादी ढांचा एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) अनिल कुमार गुप्ता ने कहा, 'पर्यावरण के अनुकूल अनोखी नाइट सफारी को विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार डेवलपर के चयन के लिए बोली आमंत्रित करने पर विचार कर सकती है।'
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला हुआ। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति इस परियोजना की प्रगति की निगरानी करेगी, जिससे यह समय से लागू हो सके, जबकि बोली की प्रक्रिया का काम ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण करेगा। इस बैठक में सिंगापुर के कार्यकारी उच्चायुक्त जोनाथन टो भी शामिल हुए, जिनके साथ उनके आर्थिक सचिव चेन काह मेई भी थे।
आईआईडीसी ने कहा कि इस परियोजना के लिए 102 हेक्टेयर भूमि पहले ही चिह्नित कर लिया गया है। इसके लिए भूमि के इस्तेमाल में बदलाव की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि इसे पहले ही हरित क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। रात के लिए चिडिय़ाघर परियोजना के लिए केंद्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण और उच्चतम न्यायालय से स्वीकृति लेनी होगी।
सफारी क्षेत्र में किसी तरह के वाणिज्यिक या आवासीय निर्माण को मंजूरी नहीं दी जाएगी। इसमें 40 प्रतिशत जानवर भारतीय महाद्वीप के और 60 प्रतिशत बाहरी क्षेत्र के होंगे।
स्थानीय लोगों को रोजगार देने, पर्यावरण संरक्षण व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस परियोजना पर 2005 में विचार किया गया था। इसके लिए बर्नार्ड हैरिसन ऐंड फ्रेंड्स ने मास्टर प्लान तैयार किया था।
अनुमान के मुताबिक रोज शाम यहां 7,000 पर्यटक आनंद ले सकेंगे। यहां जानवरोंं की 71 प्रजातियों,  841 नमूनों-जिनमें स्तनधारियों की 58 प्रजातियां शामिल होंगी, पक्षियोंं की 8 प्रजातियां, सरीसृप की 3 प्रजातियां और मछलियोंं की 2 प्रजातियां होंगी।

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