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सर्वोच्च न्यायालय ने दिया एनएमसीई को झटका
दिलीप कुमार झा / मुंबई March 27, 2012

उच्चतम न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें नैशनल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एनएमसीई) के प्रमोटर कैलाश गुप्ता को वायदा बाजार आयोग के आदेश से आंशिक राहत मिली थी।
न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति चंद्रमौलि प्रसाद के दो सदस्यीय पीठ ने पिछले शुक्रवार को जारी अंतरिम आदेश में कहा है कि अगले आदेश तक उच्च न्यायालय के 9 फरवरी के आदेश पर रोक रहेगी। इस आदेश के बाद वायदा बाजार आयोग का 23 जुलाई 2011 का आदेश बहाल हो गया है। लेकिन इस आदेश के तहत कोई भी कार्यवाही, फैसला आदि विशेष अनुमति याचिका के अंतिम नतीजे से बंधा रहेगा। यह आदेश छह हफ्ते के लिए है।
यह आदेश गुप्ता के लिए झटका है, जिसके पास एनएमसीई में पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी नैप्चून ओवरसीज लिमिटेड (एनओएल) के जरिए 30.18 फीसदी हिस्सेदारी है। इस आदेश की तारीख से गुप्ता को एफएमसी के मूल आदेश के मुताबिक तीन महीने की अल्पावधि में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 2 फीसदी पर लानी होगी। जुलाई 2011 के एफएमसी के आदेश में कहा गया था - अगर गुप्ता चाहें तो तीन महीने का विस्तार मिल सकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें बताना पड़ेगा कि नियमों का अनुपालन करने में उन्हें किस तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले पर गुप्ता ने किसी तरह की टिप्पणी से इनकार कर दिया। एफएमसी के आदेश में यह भी कहा गया है कि गुप्ता द्वारा नियंत्रित कोई भी कंपनी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर (एनओएल समेत) एक्सचेंज में 2 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रखेगी।
चूंकि यह आदेश बहाल हो गया है, लिहाजा एनओएल को तीन महीने के भीतर एनएमसीई में अपनी हिस्सेदारी 2 फीसदी या कम पर लानी होगी। हालांकि एफएमसी स्वविवेक से तीन महीने का विस्तार दे सकता है, लेकिन इसके लिए एनओएल को पर्याप्त वजहों के साथ नियामक को अनुरोध करना होगा। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इस मामले में एनओएल के उस तर्क को नियामक स्वीकार नहीं करेगा कि कंपनी को उचित कीमत नहीं मिल रही है।
दिलचस्प रूप से एफएमसी ने एनएमसीई बोर्ड को गुप्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है और ऐरो टोटल सॉल्यूशन से 28.80 करोड़ रुपये के अवैध व जरूरत से ज्यादा भुगतान को वापस लेने को कहा है। यह कंपनी गुप्ता के बेटे ने स्थापित की थी और उसकी पत्नी इसमें निदेशक है। गुप्ता परिवार द्वारा प्रवर्तित कंपनी से ऐसे और भी अवैध भुगतान की वापसी होगी। एफएमसी के तत्कालीन चेयरमैन बी सी खटुआ ने कहा था कि गुप्ता कंपनी के खर्च पर अपने परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों को विदेश दौरे पर ले जाने के दोषी हैं। उनके परिवार के स्वामित्व वाली कई कंपनियों को किए गए भुगतान एफसीआरए के तहत अवैध हैं और उन्हें उनको लौटाना होगा। इस बीच, गुप्ता की स्वामित्व वाली कंपनी एनओएल ने एफएमसी के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसे एकल बेंच ने खारिज कर दिया था।
एफएमसी ने एक्सचेंज के बोर्ड को अन्य कर्मचारियों के अलावा गुप्ता की बेटी पूनम गुप्ता और दामाद कौशिक गौरव वर्मा के साथ-साथ पीआर एजेंसी टैरमेक अफेयर्स व अन्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने को कहा है। एफएमसी के एक अधिकारी ने कहा - यह हमारे लिए निश्चित तौर पर विजय है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने हमारे आदेश को सही माना है।

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