बिजनेस स्टैंडर्ड - आनंदपुर में विरासत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, October 29, 2020 04:39 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

आनंदपुर में विरासत
आभास शर्मा /  February 27, 2012

आनंदपुर साहिब में विरासत-ए-खालसा में प्रवेश पास देने वाला एक बुजुर्ग व्यक्ति काउंटर के पीछे से कहता है, 'आप अपना कैमरा सामान कक्ष में जमा कर दें।'  विरासत-ए-खालसा 250,000 वर्गफुट पर बना भव्य स्मारक है जिसे 250 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इस  संग्रहालय में सिखों के 500 सालों के इतिहास और खालसा पंथ के 300 सालों के इतिहास को संजोया गया है। इस शानदार इमारत के बाहर कम से कम 100 युवा, बुजुर्ग, कॉलेज और स्कूलों के छात्र-छात्राओं का समूह, अंदर जाने के लिए इंतजार कर रहा है ताकि वे सिख धर्म के इतिहास की महत्त्वपूर्ण विरासत से रूबरू हो सकें।
इस संग्रहालय में प्रवेश करने से पहले एक निर्देश मिलेगा कि दर्शक तस्वीर न लें। आप इसमें जैसे ही प्रवेश करेंगे, आपको अंधेरे का अहसास होगा लेकिन यह अंधेरापन पक्षियों की चहचहाहट और नीली रोशनी की किरण से टूटता है। इस संग्रहालय के भीतर जाने पर आप दीवारों की कलाकृतियों के अलावा ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति देख सकते हैं। इनमें गुरु नानक के समय से पहले की संस्कृति, मौसम, ऋतु और त्योहारों को दर्शाया गया है। इनके अलावा 15वीं सदी से लेकर गुरु नानक देव, गुरु अंगद देव, गुरु अमरदास, गुरु रामदास, गुरु अर्जुन देव शहीद गुरु तेग बहादुर तक के समय और हरमिंदर साहिब (अमृतसर का स्वर्ण मंदिर) की स्थापना से लेकर अब तक का पूरा विवरण है। हमें ऑडियो गाइड भी दी गई ताकि हम इस वीडियो प्रेजेंटेशन को अच्छी तरह समझ सकें। यह ऑडियो गाइड तीन भाषाओं में है लेकिन हमारी कमेंट्री पंजाबी भाषा में थी। ऑडियो गाइड की स्क्रिप्ट पंजाबी कवि सुरजीत पातड़ ने लिखी है और पंजाबी वॉयसओवर में अभिनेत्री दिव्या दत्ता की आवाज ली गई है। भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक फारूख ढोंडी ने इसका अंग्रेजी अनुवाद किया है। अंग्रेजी संस्करण में अभिनेता कबीर बेदी का वॉयसओवर है। संग्रहालय के भीतर आप जब 90 मिनट तक इसे देखते हैं तो यह पूरा अनुभव आपको अद्भुत लगेगा। दिलचस्प है कि यहां आपको सिख गुरुओं का कोई स्मृति चिह्नï नहीं मिलेगा। वैसे इन गुरुओं से जुड़े स्मृति चिह्नï कई गुरुद्वारों और राज्य के निजी संग्रह में मिल जाएंगे। आनंदपुर साहिब फाउंडेशन की कोर समिति के एक पूर्व सदस्य, जो इस परियोजना को देख रहे हैं,  नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं, 'यहां रखने के लिए कुछ स्मृति चिह्नïों को हासिल करने की कोशिशें की गई थीं। लेकिन गुरुद्वारे में ही इन स्मृति चिह्नïों की पवित्रता बरकरार रखी जाती है। कोई गुरुद्वारा, जहां ये स्मृति चिह्नï रखें गए हैं, इसे साझा करने के लिए इच्छुक नहीं था।' वर्ष 2008 में पंजाब उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि नाभा के महाराजा प्रताप सिंह के वंशज हनुमंत सिंह गुरु अपने पास से गोविंद सिंह के कुछ स्मृति चिह्नïों को राज्य सरकार को दे दें ताकि आनंदपुर साहिब कॉम्पलेक्स में इन्हें संजोया जा सके। हालांकि अभी तक ये प्रदर्शनी के लिए नहीं रखे गए हैं। 
===
करीब 75 एकड़ जमीन पर बने इस कॉम्प्लेक्स को अमेरिका के बोस्टन में रहने वाले इजरायली आर्किटेक्ट मोशे साफदी ने डिजाइन किया है जो इस क्षेत्र में माहिर हैं और उनका दुनिया भर में बड़ा नाम है। उन्होंने अपने 45 साल के लंबे करियर में सिंगापुर में मरिना बे सैंड्स , यरूशलम में याड वाशेम होलोकॉस्ट हिस्टरी म्यूजियम और हैबिटैट 67 (मॉन्ट्रियल में प्रमुख आवासीय और सामुदायिक कॉम्प्लेक्स) तैयार कर कुछ मशहूर डिजाइन दुनिया के सामने पेश किए हैं। होलोकास्ट मेमोरियल देखने के बाद ही 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने साफदी को यह मेमोरियल कॉम्प्लेक्स बनाने की इजाजत दे दी। पंजाब सरकार ने इस कॉम्प्लेक्स का निर्माण खालसा की तीन सौवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में कराने का फैसला लिया था। विरासत-ए-खालसा की दो इमारतें हैं। एक इमारत के ऊपर पांच अद्र्घचंद्राकार आकृति नजर आती है वहीं दूसरी इमारत पर पांच पंखुडिय़ों वाली आकृति दिखती है। इसके जरिये सिख धर्म में पांच संख्या के महत्त्व को दर्शाया गया है। इसे स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है और स्थानीय पीले बालू के पत्थर से बनी यह इमारत एक किले की तरह नजर आती है। इन्हें 7 एकड़ जमीन में बनी तालाबनुमा आकृति के ऊपर बने एक पैदल पुल से जोड़ा गया है।
यह संग्रहालय 'पंज पाणी' से शुरू होता है जो एक 20 मीटर ऊंची नाव के आकार की इमारत है। इसके गलियारे हाथ से बनी दीवार की पेंटिंग भी हैं। इनमें पंजाब के इतिहास और वर्तमान को अच्छी तरह से दर्शाया गया है। इसकी आंतरिक साज-सज्जा करने में करीब चार साल लगे। इसकी साज-सज्जा के लिए पेंटिंग और दीवार की कलाकृतियां तैयार करने का काम 400 कलाकारों ने किया जिन्हें दिल्ली से बुलाया गया था। सिंह आट्र्स के होशियार सिंह का कहना है कि वह इस परियोजना से जुड़कर फख्र महसूस करते हैं। उनका कहना है, 'हमें इसके बीच में ही रहना था और इस काम को खत्म करने के लिए हमने 24 घंटे तक काम किया।' हालांकि उन्हें इस काम के लिए कितने पैसे दिए गए वह इसका खुलासा करने से इनकार करते हैं। अमन बहल और जयप्रकाश जैसे कलाकार जिन्होंने इस परियोजना पर काम किया, अपने काम के बारे में बात करने से इनकार करते हैं।
यह इमारत देखने में काफी प्रभावशाली लगती है और इसका डिजाइन, आपका ध्यान बरबस अपनी ओर खिचेंगा। अनद फाउंडेशन चलाने वाले भाई बलदीप सिंह, पंजाब की भक्ति संगीत की परंपरा का संरक्षण करने के लिए काम कर रहे हैं। वह इस परियोजना की कोर समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। लेकिन उनका मानना है कि इस परियोजना में छत की 'उलटे गुंबद' की संरचना सिख वास्तुकला परंपरा के बुनियादी सिद्घांतों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है, 'मैं इस संरचना में सिख समुदाय के बजाय साफदी की छाप ज्यादा देखता हूं।'
===
आनंदपुर साहिब में उत्साह की झलक साफतौर पर महसूस की जा सकती है। पंजाब के मत्स्य विपणन बोर्ड के एक सदस्य इंदरजीत सिंह को विरासत-ए-खालसा में विशेष कार्य अधिकारी का प्रभार सौंपा गया है। सिंह इस कॉम्प्लेक्स की ज्यादा जानकारी देने के लिए हमारे पास सतबीर सिंह को भेजते हैं। वह कहते हैं, 'हम इसके बाद बात करेंगे।' सतबीर सिंह बेहद दोस्ताना अंदाज में बताते हैं कि वह इस परियोजना के रोजाना कामकाज को देखने के लिए लगाए गए 33 सेवकों में से एक हैं। इस कॉम्प्लेक्स में 40 सुरक्षाकर्मी और रखरखाव का कामकाज देखने वाले 50 कर्मचारी हैं जिन्हें आनंदपुर साहिब फाउंडेशन ने पंजाब सरकार के सहयोग से मिलकर नियुक्त किया है। वह गर्व के साथ हमें बताते हैं, 'इस इमारत को तैयार करने में 13 साल लगे और अब यहां कम से कम हर रोज 5,000 लोग आते हैं।' इस भव्य इमारत का उद्घाटन पिछले साल 25 नवंबर को हुआ और तब से लेकर अब तक 400,000 से ज्यादा लोग विरासत-ए-खालसा को देखने के लिए आए हैं।
सतबीर कहते हैं कि इसे तैयार करने में जो देरी हुई और विवाद खड़े हुए उन्हें नजरअंदाज भी किया जा सकता था। विरासत-ए-खालसा या खालसा मेमोरियल कॉम्प्लेक्स (पहले यह इसी नाम से जाना जाता था) कई तरह के विवादों से घिरा रहा। इस इमारत की नींव अक्टूबर 1999 में रखी गई थी और यह परियोजना शुरुआत में 2006 तक ही पूरी की जानी थी लेकिन इसमें काफी देरी हुई। दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय और शोध कॉम्प्लेक्स स्मिथसोनियन के नैशनल म्यूजियम ऑफ अमेरिकन हिस्टरी के पूर्व परियोजना निदेशक जॉर्ज जैकब को इस कॉम्प्लेक्स का निदेशक बनाकर लाया गया लेकिन उनके साथ किया गया अनुबंध आठ महीने में ही खत्म कर दिया गया। इसके बाद जैकब ने उच्च न्यायालय में अनुबंध की समाप्ति पर गुहार लगाई। हालांकि यह मामला अब तक लंबित है। साफदी जो हर साल कई दफा यहां आते थे और कई दिनों तक रुकते थे, उन्हें भी इस परियोजना के अमल की प्रक्रिया से थोड़ी दिक्कत महसूस होती है। लेकिन वह इसके बारे में कुछ भी नहीं कहना चाहते। लेकिन वह कहते हैं कि पिछले साल अप्रैल में आनंदपुर साहिब फाउंडेशन के सीईओ के तौर पर कमान संभालने वाले कर्माजीत सिंह सरा ने यहां का काम संभाला तब सारे काम बिना किसी बाधा के पूरे हुए। वहीं सरा कहते हैं, 'उन्होंने यहां कई दिन गुजारे, उनकी कई रातें बिना सोये गुजरीं ताकि यह काम समय पर पूरा हो।' इतनी बड़ी परियोजना में कई मसले तो खड़े होने ही थे और देरी भी स्वाभाविक थी। सरकार में बदलाव आया है। जब कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे उस वक्त काम कम हुआ था। हालांकि सरा इस पर ज्यादा सोचना नहीं चाहते हैं। अब वह संग्रहालय की अच्छी शुरुआत देखकर ही खुश हैं।

Keyword: Virasat a Khalsa, Sikh, building,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या एमेजॉन जैसी कंपनियों पर डेटा सुरक्षा की तय हो जवाबदेही?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.