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... शटल एक्सप्रेस
इतिश्री सामल /  February 17, 2012

उनसे मिलने के लिए मुझे करीब डेढ़ घंटे के बाद का समय मिला। प्रवेशार्थियों के माता-पिता, वेंडरों और अतिथियों के साथ-साथ मैं भी उनके दफ्तर के बाहर इंतजार कर रही थी। उनके सेके्रटरी ने हमें बताया कि शनिवार उनके लिए सबसे व्यस्त दिनों में से होता है। अपने जमाने के मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद ऑल इंगलैंड चैंपियनशिप ट्रॉफी विजेता हैं और देश के सबसे जाने माने बैडमिंटन कोच हैं। पिछले महीने बेंगलूर में हुई 76वीं राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप के टॉप 5 खिलाड़ी उनकी अकादमी से थे। उन्होंने दुनिया की नंबर 2 खिलाड़ी साइना नेहवाल को भी कोचिंग दी है।
गुरु तड़के 4.30 बजे अकादमी में आ जाते हैं। उनका पूरे दिन का कार्यक्रम तय होता है। वह कोचिंग देते हैं, खिलाडिय़ों को प्रोत्सााहित करते हैं, माता-पिता से बात करते हैं, प्रायोजकों से मिलते हैं और पोषक चीजें बेचने वाले विके्रताओं से मिलते हैं। एक अकेला इंसान ये सारे काम करता है। इस वक्त गोपीचंद की मांग जोरों पर है क्योंकि इस खेल के लिए जागरूकता बढ़ी है। 1980 के दौर में प्रकाश पादुकोण एक स्टार खिलाड़ी हुआ करते थे और गोपीचंद, नेहवाल ने उनकी जगह भरने की कोशिश की है।
इस खेल में अपना हाथ आजमाने के लिए नई पीढ़ी भी तैयार बैठी है। पीवी संधू, सौरभ वर्मा, बी साई प्रणीत, ज्वाला गट्टा, पी कश्यप, अरुंधती पंटवाने, अदिति मुताकर, तुुलसी पीसी, अपर्णा पोपट, मोहिता सहदेव, धान्या नायर, नेहा पंडित, अजय जयराम और आनंद पवार जैसे खिलाडिय़ों के नाम इस सूची में शुमार हैं। इन खिलाडिय़ों ने पिछले 5-6 सालों के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में अच्छा प्रदर्शन किया। सिर्फ 16 साल की उम्र में पीवी सिंधू सबसे कम उम्र की राष्ट्रीय चैंपियन बनी। दुनिया के पुरुष खिलाडिय़ों के बीच 25 वीं रैंकिंग वाले पी कश्यप और सिंधु गोपीचंद की अकादमी में खोजे गये सितारे हैं। इन बेहतरीन खिलाडिय़ों से ही बैडमिंटन आज भारत में उस मुकाम पर है जहां वह कभी नहीं था। खिलाड़ी इसे उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।
गोपीचंद कहते हैं, '1980 और 1990 के दौर में इस खेल को लेकर लोगों में समझ और जागरूकता कम थी। उन दिनों एक अच्छा कोच, अच्छा साथी खिलाड़ी और शटल तक मिल पाना मुश्किल होता था।' इसके बावजूद उन्होंने एक के बाद एक 5 बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती। वर्ष 1996 से 2000 तक लगातार वह राष्ट्रीय विजेता रहे। 1980 में पादुकोण के बाद 2001 में ऑल इंगलैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप में पुरुष एकल का खिताब जीतने वाले वह दूसरे भारतीय बने। देश में खिलाडिय़ों के लिए सबसे बड़े सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से गोपीचंद नवाजे जा चुके हैं। इसके अलावा पद्म श्री, द्रोणाचार्य पुरस्कार भी उनको मिल चुका है। अब उनकी अकादमी पुलेला गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी देश के बेहतरीन बैडमिंटन खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण दे रहा है।
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हैदराबाद के आईटी उपनगर गाचीबावली में बहुत सारे बिजनेस स्कूलों और आईटी की बड़ी-बड़ी कंपनियों के बीच मौजूद यह अकादमी बैडमिंटन के पावरहाउस की तरह काम कर रही है। इस अकादमी की शुरूआत 2008 में 60 प्रशिक्षुओं के साथ की गई थी और अब प्रशिक्षुओं की संख्या 250 तक पहुंच चुकी है और 200 प्रशिक्षु प्रतीक्षारत सूची में हैं। यह अकादमी बैडमिंटन एशिया कनफेडरेशन के एशिया में मौजूद कुछ प्रशिक्षण केंद्रों में से है। इसके दूसरे केंद्र चीन, मलेशिया और इंडोनेशिया में हैं। आंध्र प्रदेश सरकार ने वर्ष 2003 में अकादमी के लिए 45 वर्षों के पट्टे पर 1,000 रुपये प्रति एकड़ मासिक किराये पर पांच एकड़ भूमि आवंटित की थी। गोपीचंद ने निर्माण के पहले चरण को पूरा करने के लिए करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए। इस रकम से आठ बैडमिंटन कोर्ट, 14 कमरे और एक रसोई का निर्माण कराया गया। गोपीचंद के व्यक्तित्व के बावजूद रकम जुटाना आसान नहीं था।
बैंक कर्मचारी के बेटे गोपीचंद दानदाताओं को लेकर सजग थे। वर्ष 2001 में ऑल इंगलैंड ट्राफी जीतने के बाद गोपीचंद को कोला कंपनी की ओर से प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव यह कहकर ठुकरा दिया कि वह कंपनी  के पेय उत्पाद का प्रचार नहीं कर पाएंगे। राज्य और संस्थागत वित्तीय सहायता की गैर-मौजूदगी में उन्होंने कॉरपोरेट जगत का रुख किया। पुलेला को सबसे ज्यादा मदद उनके रिश्तेदार और मैट्रिक्स लैबोरेटरीज के संस्थापक एन प्रसाद की ओर से मिली। प्रसाद ने तकरीबन 6 करोड़ रुपये की मदद की और इससे थोड़ी कम रकम एक अन्य कारोबारी से मिली। बाकी कमी को पूरा करने के लिए गोपीचंद ने 3 करोड़ रुपये में घर गिरवी रख दिया।
अकादमी फिलहाल चार एकड़ जमीन पर बनी हुई है और इसमें जल्द ही एक एकड़ का इजाफ ा होगा। 42 फुट ऊंची और 270 फुट लंबी मुख्य इमारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के आठ कोर्ट, जिम के साथ हेल्थ क्लब, जकुजी और स्टीम रूम, एक योग केंद्र और मेडिटेशन हॉल की सुविधा है। इस इमारत में 70 खिलाडिय़ों और कोचों के  रहने की सुविधा उपलब्ध है। साधारण शुल्क 2,000 रुपये प्रति माह है और यहीं रहकर प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षुओं को 15,000 रुपये प्रति माह देने होते हैं। इस अकादमी की शुरुआत करने से पहले गोपीचंद गाचीबावली के इनडोर स्टेडियम का इस्तेमाल किया करते थे। फिलहाल दुनिया के टॉप 50 खिलाडिय़ों में से आठ-दस खिलाडिय़ों का ताल्लुक इस अकादमी से है और लगभग इतने ही खिलाड़ी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 100 खिलाडिय़ों की सूची में शामिल हैं। भारत के अलावा कनाडा, श्रीलंका,ऑस्ट्रेलिया और इटली जैसी जगहों से खिलाड़ी एकजुट होकर हैदराबाद में एकत्रित होते हैं। विदेशी खिलाड़ी 15 दिनों और एक महीने के प्रशिक्षण के लिए आते हैं। गोपीचंद कहते हैं, 'यहां प्रवेश के वास्ते पूछताछ के लिए हर दिन 10-15 माता-पिता आते हैं। अब लोगों के बीच मांग इतनी बढ़ गई है कि हमें नए प्रशिक्षुओं को प्रवेश देने से मना करना पड़ता है। अगर अकादमी में 30 नये कोर्ट और भी बना दें तो भी मांग पूरी करने की स्थिति में नहीं जा सकते हैं।' अकादमी के पास 10 कोच हैं और प्रशिक्षण दो सत्रों में दिया जाता है। सुबह और शाम 4.30 से 6 बजे तक। बाकी समय में खिलाड़ी कोर्ट का इस्तेमाल अभ्यास करने में करते हैं। शारीरिक रूप से स्वस्थ होना बहुत ही जरूरी है। इसके लिए कोर्ट पर और बाहर खिलाडिय़ों के लिए कड़े प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।
युवा ओलंपिक के रजत पदक विजेता एचएस प्रणय कहते हैं, 'हमारे खिलाडिय़ों को सिर्फ शारीरिक अस्वस्थता के चलते मैचों में  हार का सामना करना पड़ता है।' वह बताते हैं, 'लेकिन समय बदल रहा है। तीन साल पहले अकादमी में प्रवेश लेने के बाद मुझमें काफी सुधार आया है। यूथ ओलंपिक के मेरे प्रशिक्षण के दौरान गोपी भइया मेरे साथ करीब एक महीने खेले। जिससे मेरे आत्मविश्वास में काफी इजाफा हुआ। वह सुबह से लेकर शाम तक अकादमी में रहते हैं और आप कभी भी उनसे मिलकर अपने खेल के बारे में उनकी राय या टिप्स ले सकते हैं।' इन दिनों गोपीचंद 2012 ओलंपिक के लिए नेहवाल को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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पुराने दिनों को याद करते हुए गोपीचंद कहते हैं, 'अगर मुझे भी ये सारी सुविधाएं मिलतीं तो मैं भी कुछ बेहतर कर सकता था।' युवावस्था में उन्हें उचित प्रशिक्षण सुविधाएं नहीं मिल सकी। ऑल इंगलैंड ट्रॉफी जीतने के वक्त वह चोटिल थे और उनकी उम्र 27 वर्ष थी। खेलने की उनकी बेहतरीन उम्र निकल चुकी थी। वह चाहते थे कि दूसरे खिलाडिय़ों को इन समस्याओं का सामना न करना पड़े। फिलहाल देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की दो अकादमियां हैं। पहली बेंगलूर में प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी और दूसरी गोपीचंद की हैदराबाद स्थित अकादमी। इसके अलावा गोपीचंद कहते हैं कि दक्षिण में बैडमिंटन काफी लोकप्रिय है और आंध्र प्रदेश इन राज्यों में भी सबसे आगे है। अकादमी के 250 प्रशिक्षुओं में से 200 इसी राज्य से आते हैं।
वैसे इस खेल को अभी और भी अधिक समर्थन, टूर्नामेंट और बुनियादी ढांचे की जरूरत है। गोपीचंद ने बताया कि उन्हें हर महीने एक अकादमी खोलने का प्रस्ताव मिला है। हालांकि अभी तक उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार की मदद से ग्वालियर में एक सैटेलाइट अकादमी खोली है। लेकिन गोपीचंद की चिंता बरकरार है। वह कहते हैं, 'जब तक हमें सही लोग और अच्छे कोच नहीं मिलेंगे तब तक इस खेल के लिए लोगों में जागरूकता लाना मुश्किल है।'

Keyword: badmintan, gopichand, training,
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