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रियल्टी बाजार को एनबीएफसी से आस
राघवेंद्र कामत / मुंबई January 02, 2012

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) इस साल प्राइवेट इक्विटी (पीई) कंपनियों को रियल्टी क्षेत्र सेक्टर में पांव पसारने का मौका देंगी, क्योंकि डेवलपर्स पहले से ही घरों की बिक्री में गिरावट और बैंक कर्ज में कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। पिछले 2 से 3 साल के दौरान कई पीई कंपनियों ने अपने ऋण सौदों को पुनर्गठित किया है या किसी और को सौंप दिया है। पीई कंपनियां 25 से 26 फीसदी की दर वाले कर्ज सौदों को 17 से 18 फीसदी की दर पर गैर एनबीएफसी को बेचकर बाहर निकल गई। एक प्रमुख संपत्ति सलाहकार ने बताया कि इसके बाद अब गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं 18 से 22 फीसदी की दर के बीच सीधे डेवलपरों के साथ बातचीत कर रही हैं। सलाहकार संस्था जोंस लैंग लासॉल के मुताबिक अब रियल एस्टेट क्षेत्र में कम से कम 20 एनबीएफसी संस्थाएं सक्रिय हैं, जबकि 3 साल पहले रियल एस्टेट क्षेत्र में महज 6 कंपनियां ही काम कर रही थीं।
इनमें एचडीएफसी, डीएचएफएल, एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस और कोटक जैसी स्थापित कंपनियों के साथ ही ऐशमोर गु्रप की इंडोस्टार कैपिटल फाइनैंस, एवरस्टोन कैपिटल और गोल्डमैन सैक्स की पीई शाखा, अजय पीरामल समूह की एनबीएफसी पीरामल कैपिटल, जैंडर समूह की एनबीएफसी और एडलवाइज कैपिटल शामिल हैं। ये सभी रियल एस्टेट के क्षेत्र में कर्ज देने वाली कंपनियों में शामिल हैं। 
रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर सलाहकार कंपनी बीएनपी परिबास के प्रबंध निदेशक राजा कौशल ने कहा, 'तेजी से बढ़ती एनबीएफसी कंपनियां इस बात को महसूस कर रही हैं कि वे प्रत्यक्ष तौर पर कर्ज संबंधी सौदा कर सकती हैं और पीई कंपनियों से कर्ज पत्र खरीदकर वे रियल्टी परियोजनाओं में शामिल हो सकती हैं। उनका मानना है कि वे परियोजनाओं का दायित्व संभाल सकते हैं।'
दिग्गज पीई कंपनी ब्लैकस्टोन, रियल्टी कंपनी डीएलएफ और हबटाउन के बीच पुणे के विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए हुए 810 करोड़ रुपये के सौदे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी पीई कंपनियों की नजर बड़े सौदों पर है। उन्होंने कहा, 'एनबीएफसी इस क्षेत्र में जल्द हालात में होने वाले बदलाव, सौदे में लचीलापन और कोष के  आकार की वजह से आई हैं।' दूसरी तरफ सलाहकार और फंड प्रबंधकों को पीई क्षेत्र में कोष में कमी आने की उम्मीद है। वर्ष 2006 और 2007 में करीब 3 अरब डॉलर के कोष जुटाए गए थे जो कि वर्ष 2012 तक बाहर निकलने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि उनका कोष चक्र पूरा होने वाला है। उन्होंने बताया कि केवल इंडियारीट, कोटक, एचडीएफसी और रेड फोर्ट ही अभी नए फंड जुटाने की तैयारियां कर रहे हैं।
ब्रिटेन की वैश्विक संपत्ति सलाहकार नाइट फ्रैंक के राष्ट्रीय निदेशक (पूंजीगत लेनदेन) अमित गोयनका कहते हैं कि रियल एस्टेट क्षेत्र में वर्ष 2011 में निवेश वर्तमान विनिमय दर पर 85 करोड़ डॉलर (4,505 करोड़ रुपये) था। वर्ष 2007 में यह 6.7 अरब डॉलर था जबकि वर्ष 2008 में यह 3.3 अरब डॉलर था। इसके विपरीत वर्ष 2011 में एनबीएफसी ने करीब 3,000 करोड़ का सौदा किया है और वर्ष 2012 में इसके बढऩे का अनुमान है।

अन्य कारण
गोयनका कहते हैं, 'पीई कारोबार घट रहा है और वह दिन दूर नहीं जब एनबीएफसी रियल एस्टेट में पीई कंपनियों के कारोबार पर कब्जा कर लेंगी।' वह कहते हैं, 'सिर्फ कुछ ही पीई कंपनियों ने रियल एस्टेट प्राइवेट इक्विटी में पैसा कमाया है।'
बीएनपी परिबास के कौशल कहते हैं, 'भले ही कर्ज बाजार को पीई कंपनियों ने तैयार किया है, लेकिन नियामक अभी या बाद में उनसे यही कहेगा कि पीई कंपनियां स्थिर रिटर्न वाले सौदे नहीं कर सकतीं। इस प्रकार यह कारोबार सिर्फ एनबीएफसी कंपनियों के लिए ही है।' भारतीय रियल्टी क्षेत्र में पीई कंपनियों की बिकवाली जेएलएल की हाल की एक रिपोर्ट कहती है कि रियल्टी कंपनियों के प्रवर्तकों को सहारा देने में एनबीएफसी प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। रिपोर्ट ने कहा, 'भले ही उधारी दर ऊंची हुई हैं, लेकिन फंडों और 20 सक्रिय एनबीएफसी को धन के इस्तेमाल को लेकर लचीलापन हासिल है। एनबीएफसी बायबैक के लिए वित्तपोषण का प्रमुख साधन बन गई हैं।'

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