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पेंशन फंड और विदेशी भी करेंगे अब सीधा निवेश
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली January 01, 2012

वर्ष 2011 में जहां विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयर बाजारों में बिकवाल बने रहे, वहीं वित्त मंत्रालय नए साल में शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को थामने के लिए एक नई व्यवस्था को लेकर आया है। मंत्रालय ने आज अन्य इकाइयों की तरह विदेशी नागरिकों और पेंशन फंडों को सीधे तौर पर पूंजी बाजारों में प्रत्यक्ष निवेश की मंजूरी दे दी।
इन निवेशकों के लिए वैयक्तिक और कुल निवेश की सीमा भारतीय कंपनी में चुकता पूंजी की क्रमश: 5 फीसदी और 10 फीसदी रहेगी। इन सीमाओं में एफआईआई और एनआरआई निवेश की उच्चतम सीमा शामिल नहीं होगी।
सरकार को उम्मीद है कि यह पहल शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव को रोक सकेगी, लेकिन इस पर विश्लेषकों ने कहा कि इस पहल के कारण पूंजी बाजारों में तत्काल पूंजी का प्रवाह नहीं बढ़ेगा और विदेशी निवेशकों में तुरंत दिलचस्पी नहीं जग सकती क्योंकि कंपनियां पहले एडीआर और जीडीआर के माध्यम से विदेशी बाजारों में सूचीबद्ध हैं। हालांकि पेंशन फंडों जैसे दीर्घकालिक निवेशकों ने बाजारों में उतार-चढ़ाव घटने की उम्मीदों को जिंदा रखा है क्योंकि ऐसे निवेशकों का रुझान अल्पकालिक नहीं होता।
आर्थिक मामलों के सचिव आर गोपाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'यह कदम शेयर बाजारों में मजबूती लाने और निवेशकों की तादाद बढ़ाने के लिए उठाया गया है।' नई योजना हाल में बनाई गई श्रेणी पात्र विदेशी निवेशकों (क्यूएफआई) को पूंजी बाजारों में प्रत्यक्ष रूप से मंजूरी देने के लिए है। उम्मीद है कि बाजार नियामक और केंद्रीय बैंक आरबीआई इस संबंध में 15 जनवरी तक दिशा-निर्देश जारी कर देंगे।
बीते साल क्यूएफआई को म्युचुअल फंडों के माध्यम से भारतीय पूंजी बाजारों में निवेश की मंजूरी के बाद यह सरकार द्वारा उठाया गया अगला उचित कदम है। क्यूएफआई विदेश में रह रहा ऐसा कोई भी व्यक्ति, समूह या संघ हो सकता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गठित वित्तीय कार्रवाई बल (एफएटीएफ) के मानकों के अनुरूप काम करता है। इस कार्यबल का गठन एक देश से दूसरे देश में कालेधन या आतंकवादियों के लिए धन के हस्तांतरण पर निगरानी के लिए है। क्यूएफआई में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) या उनके सब अकाउंट शामिल नहीं हैं। एफआईआई को भारतीय बाजार नियामक सेबी के यहां पंजीकरण कराना होता है। पिछले साल अगस्त में विदेशी निवेशकों को इक्विटी और म्युचुअल फंड की ऋण योजनाओं में कुल 13 अरब डॉलर तक का सीधा निवेश करने की मंजूरी दी थी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के मामले में फिलहाल सिर्फ एफआईआई और उनके सब अकाउंट और प्रवासी भारतीयों को भारतीय शेयर बाजार में सीधे निवेश की मंजूरी है। अन्य निवेश एफआईआई द्वारा जारी पार्टिसिपेटरी नोट के माध्यम से किए जाते हैं। नवंबर 2011 तक पी-नोट्स के माध्यम से एफआईआई ने 1.79 लाख करोड़ रुपये या 19.1 फीसदी का निवेश कर रखा था।
शेयर बाजार में उतार चढ़ाव के बीच पिछले साल विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 2,700 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की।

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