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सुजलॉन: धीरे-धीरे चल रही हैं उम्मीद की हवाएं
जितेंद्र कुमार गुप्ता /  December 11, 2011

प्रमुख पवन ऊर्जा कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयर की कीमत में हाल के समय में बड़ी गिरावट आई है। शेयर कीमत में गिरावट की कई वजह हो सकती हैं, लेकिन इस ताजा गिरावट को कंपनी में प्रवर्तक समूह द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने के फैसले से जोड़ कर देखा जा रहा है। एसपीतुलस्यान डॉट कॉम के एसपी तुलस्यान कहते हैं,  'हर बार जब प्रवर्तक अपनी कंपनी में हिस्सेदारी बेचते हैं, शेयर की कीमतों में गिरावट आती है। इस बार, जब कंपनी (सुजलॉन) कई वजहों से सुर्खियों में है, शेयर बाजार प्रवर्तक हिस्सेदारी की बिक्री की खबरों को गिरावट की वजह मानने से परहेज कर रहा है। कंपनी पर भारी-भरकम कर्ज भी इसकी अन्य वजह हो सकती है।'
एक ईमेल संदेश के जवाब में कंपनी प्रवक्ता ने कहा है, 'प्रवर्तक हिस्सेदारी की बिक्री का उद्देश्य भारत में सुजलॉन के व्यवसाय में मददगार अन्य सहायक इकाइयों के वित्त पोषण के लिए रकम जुटाना है। इससे हमें अपने घरेलू बाजार में तेज विकास के लिए भूमि एवं विद्युत इकाइयों के परिचालन में मदद मिलेगी।' फिर भी दीर्घावधि के परिदृश्य से हालात ज्यादा प्रतिकूल नजर नहीं आ रहे हैं, क्योंकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस शेयर पर विपरीत खबरों का ज्यादातर असर दिख चुका है। तुलस्यान कहते हैं, 'अगर आप लंबी अवधि के नजरिये से देखें तो मेरी नजर में कंपनी के हालात में सुधार आ रहा है।'

कर्ज की चिंता
प्रवर्तकों द्वारा शेयरों की बिक्री के अलावा बाजार सुजलॉन के भारी-भरकम कर्ज और इसके एफसीसीबी (विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड) की अदायगी को लेकर भी चिंतित हैं। बाजार कारोबारियों का मानना है कि एफसीसीबी भुगतान पर मार्क-टु-मार्केट (एमटीएम) के संबंध में प्रावधान काफी अधिक हो सकता है और प्रावधान की अधिक मात्रा भविष्य में लाभ को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।
दूसरी तरफ, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सुजलॉन में कोष उचित मात्रा में उपलब्ध है। हेनसेन हिस्सेदारी की बिक्री से जुटाए गए 830 करोड़ रुपये के कोष के साथ साथ आरईपावर (सुजलॉन की सहायक कंपनी) के साथ समेकन के बाद 1700 करोड़ रुपये की नकदी तक पहुंच, देनदार से लगभग 1,000 करोड़ रुपये की प्राप्तियों और अगली चार तिमाहियों के दौरान लगभग 400-500 करोड़ रुपये की आंतरिक रकम आदि को देखते हुए कंपनी 4,000 करोड़ रुपये के कोष तक पहुंच बनाने में सक्षम होगी। इससे कंपनी को लगभग 2000 करोड़ रुपये के अपने एफसीसीबी रिडम्पशन में मदद मिलेगी।

परिचालन में सुधार
अपने एफसीसीबी की अदायगी पर ध्यान दिए जाने के साथ साथ कंपनी अपने अन्य कर्ज में कमी लाए जाने की भी संभावना तलाश रही है जो मौजूदा समय में लगभग 9,000 करोड़ रुपये है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, 'हम अपने डेट प्रोफाइल में कमी लाए जाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि हम अपना कर्ज-पूंजी अनुपात मौजूदा 1.65 से घटा कर इस वित्त वर्ष में 1.4 और अगले वित्त वर्ष में 1:1 पर लाने में सफल रहेंगे। हेनसेन ट्रांसमिशन में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री के साथ हमने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है और अन्य गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों में भी हिस्सेदारी बेचने की संभावना तलाश रहे हैं।'
विभिन्न स्रोतों के जरिये कोष की उपलब्धता से कंपनी को कार्यशील पूंजी ऋणों पर कम निर्भर रहने और ब्याज लागत को नियंत्रित बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा उच्च क्षमता उपयोग के स्वरूप में परिचालन दक्षता बढऩे से मुनाफा और नकदी में भी सुधार आने की संभावना है। हालांकि यह सब तभी संभव होगा जब यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों में मांग परिदृश्य मजबूत बना रहेगा।
सितंबर तिमाही में सुजलॉन का समेकित कारोबार सालाना आधार पर 21 फीसदी की बढ़त के साथ 715 मेगावॉट रहा जिससे राजस्व 34 फीसदी बढ़ कर 5,131 करोड़ रुपये पर पहुंचने में सफल रहा। परिचालन मुनाफा मार्जिन 5 फीसदी सुधर कर 9.3 फीसदी रहा। ब्याज लागत में 34 फीसदी का इजाफा होने के बावजूद कंपनी एक साल पहले की तिमाही के 369 करोड़ रुपये की तुलना में 48 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज करने में सफल रही।
सितंबर तिमाही में आरईपावर का ऑर्डर प्रवाह सालाना 57 फीसदी की शानदार रफ्तार से बढ़ा। सुजलॉन की समेकित ऑर्डर बुक 35.3 फीसदी बढ़ कर 32,456 करोड़ रुपये रही जो इसके वित्त वर्ष 2011 के राजस्व की तुलना में लगभग दोगुना है।

नजरिया
ब्रोकर फर्मों को मार्जिन में सुधार की वजह से चालू एवं अगले वित्त वर्षों में कंपनी के राजस्व एवं मुनाफे में मजबूत वृद्घि की संभावना है। बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच की रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में सुजलॉन द्वारा 528 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2013 में 763 करोड़ रुपये का शुद्घ लाभ दर्ज किए जाने की संभावना है।

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