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वक्त का नया अफसाना दोस्ती का बदलता पैमाना
मधुकर सबनवीस /  December 03, 2011

एयरटेल के 'हर फ्रेंड जरूरी होता है' प्रचार अभियान ने काफी धूम मचाई है। इसमें काफी लुभावना जिंगल है और यह लोगों की जिंदगी में एक बेहद अहम रिश्ते को छूता है, दोस्ती के रिश्ते को। असल में हर किसी की जिंदगी में पहला 'बनाया' हुआ रिश्ता दोस्ती का ही होता है। जब कोई बच्चा अपने घर और परिवार से बाहर कदम रखता है तो दोस्त ही उसकी दूसरी दुनिया बनते हैं। आमतौर पर स्कूल या कॉलेज के दिनों की दोस्ती जिंदगी भर बेहद खास बनी रहती है। हालांकि जिंदगी के सफर में निरंतर नए संपर्क बनते रहते हैं और कोई व्यक्ति कैसे जिंदगी में आगे बढ़ता है और अपने जीवन को चलाता है, इसमें मित्र महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। मित्र अपनी पसंद से बनाए जाते हैं और जन्म या खून के रिश्ते से नहीं तय होते हैं।
मित्रों की भूमिका बहुत गहरी होती है और उसमें आठ अहम पहलू गिने जा सकते हैं। मित्र विकसित करने वाले होते हैं-जो आपको अधिक उपलब्धियों के लिए प्रोत्साहित करते हैं। मित्र उत्साही समर्थक होते हैं-जो हमेशा आपके लिए खड़े रहते हैं, कई मर्तबा तो वे सच छुपाकर भी ऐसा करते हैं। मित्र सहकर्ता भी होते हैं- खासतौर से तब जब हित समान हों और ऐसे में वे नई चीजों को अंजाम देने में आपका सहयोग करते हैं, कई नए कारोबार मित्रों द्वारा ही खड़े किए जाते हैं। मित्र संगत भी देते हैं-ये वही लोग होते हैं जिन्हें आप अच्छे और बुरे समाचार देने के लिए सबसे पहले खोजते हैं। मित्रों से संपर्क बनते हैं-वे आपको दूसरों से रूबरू कराते हैं। मित्रों से ऊर्जा मिलती है- जब आपका मनोबल गिरा होता है तो वे ही आपकी हौसला अफजाई करते हैं। मित्र दिमाग के दरवाजे खोलते हैं-वे आपकी सोच का दायरा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं और नई चीजों से पर्दा उठा सकते हैं और कई मौकों पर आपको सही राह दिखाते हैं। मित्र मार्गदर्शक होते हैं-जिनसे आप सलाह ले सकते हैं और आप उनकी मदद से मुश्किल परिस्थितियों को मात दे सकते हैं। मौजूदा दौर में मित्रता का सबसे लोकप्रिय और जाना-पहचाना चित्रण कालजयी फिल्म 'शोले' में जय और वीरू के रूप में देखने को मिलता है जो आश्चर्यजनक रूप से इनमें से अधिकांश पहलुओं को समाहित किए हुए हैं।
फिर भी भारतीय परिप्रेक्ष्य में ब्रांडिंग की दुनिया में एक माध्यम के तौर पर मित्रता का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसमें सांस्कृतिक कोण भी हो सकता है: भारतीय पौराणिक आख्यानों में कृष्ण-सुदामा को अपवाद छोड़ दें तो मित्रता की महान मिसाल आसानी से याद नहीं आती। पौराणिक मित्रताओं में हमेशा दो सामाजिक स्तर होते हैं-स्वामी और सेवक लेकिन एक समतावादी दुनिया में यह वास्तविक मित्रता नहीं है जो एक तरह से कत्र्तव्य और समर्पण का ही रिश्ता है। (हिंदी सिनेमा में बारंबार राम और हनुमान की मिथकीय मित्रता दिखाई गई है लेकिन हीरो और कॉमेडियन के रूप में! )
फिर भी ब्रांडों ने इन आठ पहलुओं में से किसी का भी इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं के साथ 'मित्रता' की कोशिश की। लेकिन यह मित्रों के बीच जुड़ाव से जरा अलग रहा है- दशकों से ब्रांड जिस तरह से पारिवारिक जुड़ाव की कोशिश कर रहे हैं, या फिर प्रेम और आकर्षण की भावनाओं के सहारे रूमानियत जाहिर कर रहे हैं या उपलब्धियों के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
एक ओर जहां मित्र ब्रांड की कहानी बयां करने का हिस्सा रहे हैं, वे मूल विषयवस्तु के बजाय मुख्यत: 'संदर्भ' ही बने हुए हैं। बियर और मदिरा ब्रांडों ने हमेशा मित्रों के साथ मस्ती और फुरसत के लम्हों का आनंद लेने के लिए अपने ब्रांड के फायदों को पेश किया-इसका ताल्लुक बेहतर वक्त गुजारने और दिल्लगी करने से है। दूरसंचार ब्रांडों ने मित्रता को अपने उत्पाद और सेवाओं को बेचने में इस्तेमाल किया। चाहे नोकिया अपने कैमराफोन के जरिये मित्रों की तस्वीरें साझा करने का फायदा दिखाए या वोडाफोन अपनी कॉन्फ्रेंस कॉल की पेशकश से लुभाए, जहां मित्र एक दूसरे से जुड़े रहते हैं।
शीतल पेय बनाने वाले ब्रांड मित्रता की दुनिया में ही रहते हैं- लेकिन कुछ वर्षों से वे वैयक्तिक हुए हैं और रूमानियत की ओर बढ़े हैं। जब माउंटेन ड्यू ने 'व्हर्लपूल' और  'चीता' जैसे यादगार विज्ञापनों की तर्ज पर अपना विज्ञापन बनाया तो उसके पास पुरुषों को लुभाने का बढिय़ा अवसर था कि वह कुछ दिलचस्प बनाए। हालांकि उसने 'डर के आगे जीत है' विज्ञापन के जरिये बहादुरी दिखाने वाला रास्ता अख्तियार किया जो युवा भारत के 'महत्त्वाकांक्षी' सपनों को हवा देता है। कोक मित्रों और युगलों के बीच झूल रहा है। कुछ साल पहले फाइजर का एक दिलचस्प विज्ञापन आया था जिसमें मित्रता के तीन पहलुओं को उजागर किया गया था, जिसमें बूढ़े, कथित रूप से सेवानिवृत्त लोगों के लिए स्वास्थ्य लाभ से जुड़ा संदेश था।
यहां तक कि महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाए जाने वाले सौंदर्य प्रसाधन या घरेलू काम में आने वाली चीजों के विज्ञापनों में मित्र हमेशा नए उत्पादों के लिए 'सलाहकार' की भूमिका में होते हैं या फिर वे आपकी जलन या कुढऩ का जरिया हो सकते हैं। ऐसे ब्रांड की कल्पना मुश्किल है जहां मित्र ही सर्वोपरि हो। एयरटेल के विज्ञापन का आकर्षण उसके मूल विचार और उसे अंजाम देने से परे जाता है। गहराई से देखें तो ब्रांड ने आज के युवाओं के एकाकीपन में दखल दिया है।
यह शायद डरावना लगे लेकिन संभवत: सच के करीब है। हाल के दौर में दोस्ती के बदलते रूप पर गौर करना कफी दिलचस्प है। यह फेसबुक और सोशल नेटवर्किंग का दौर है जहां लोग तेजी से दोस्त बनाकर उनसे बातचीत कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि लोग अधिक मिलनसार और बहिर्मुखी होते जा रहे हैं। हालांकि साथ ही यह महत्त्वाकांक्षा का भी दौर है। जब जीवन में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है तब लोगों के पास अपने परिवार सहित दूसरों के लिए वक्त कम पड़ता जा रहा है। लगातार सुनने में आ रहा है कि लोग महसूस कर रहे हैं कि वे परिवार के साथ पर्याप्त वक्त नहीं बिता पाते। संबंध सुविधावादी और तात्कालिक फायदे वाले बनते जा रहे हैं।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में, खासतौर से युवाओं के लिए मित्र संगी नही रह गए हैं बल्कि उन्हें उनके साथ टीम में जगह हासिल करने से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक में मुकाबला करना पड़ता है। लोगों पर जल्द बुढ़ापा हावी हो रहा है और उसका दर्द भी उन्हें सता रहा है। पूर्व में  कॉलेज में मित्र बनते थे और कार्यस्थल पर सहकर्मियों को लेकर सतर्क भाव अपनाया जाता जहां भविष्य की वृद्घि और पदोन्नति के लिए उनसे स्पर्धा करनी पड़ती। आज यह पहले ही हो रहा है। अंग्रेजी का एक नया शब्द 'फ्रेनमीज' (मित्रशत्रु) आज की मित्रता की हकीकत बयां करता है। परंपरागत अर्थों में पुरुष जुड़ाव दबाव में है। साथ ही विस्थापन के दौर में जब संयुक्त परिवार विघटित हो रहे हैं और महिलाओं को कामकाजी बनना पड़ रहा है, ऐसे में महिलाओं में भी एक नई किस्म की समीपता पनप रही है।
महिलाएं अब नए बंधन जोड़ रही हैं, अपने राज साझा करने और सलाह लेने में अधिक सहज हो रही हैं- इससे पहले तक यह भूमिका परिवार और पड़ोसी अदा करते थे। फिर मुद्दे पर लौटते हैं। वास्तव में ब्रांड मित्रों के साथ बेहतरीन वक्त गुजारने के फायदों का प्रचार कर सकते हैं। हमारी संस्कृति में परिवार की अहम भूमिका है लेकिन मित्रों की भी कम नहीं है जो हमें दुनिया की असल तस्वीर दिखाते हैं। इस तरह से एयरटेल का विज्ञापन हमें नए रिश्ते की ताकत पर सोचने के लिए मजबूर कर सकेगा।

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