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बढ़ रही है अंतर्विरोध में फंसी कांग्रेस की उलझन
आदिति फडणीस /  October 14, 2011

कांग्रेस पार्टी में कुछ सदस्य  ऐसे भी हैं जो अन्ना हजारे के प्रति समर्थन और सहानुभूति का रुख रखते हैं। अगस्त में संसद के मॉनसून सत्र के अंत में जब वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पार्टी सांसदों की बैठक को संबोधित किया तब इन सांसदों का पक्ष खुल कर सामने आया। सांसदों ने अनौपचारिक बातचीत में कहा, 'वे (पार्टी प्रबंधक) अन्ना हजारे का मजाक उड़ा रहे हैं। उन्हें इस बात का अहसास नहीं है कि वह आम लोगों की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठा रहे हैं। अगर सरकार, संसद और अन्य संवैधानिक संस्थान भली भांति अपने काम को अंजाम नहीं देंगे तो ऐसे विरोध प्रदर्शन होंगे ही।' राजस्थान की सांसद प्रभा ठाकुर ने कहा, 'जब बच्चे हमसे पूछते हैं कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने की मांग कर रहे लोगों के साथ इतनी कड़ाई से क्यों पेश आ रही है तो यह नहीं सूझता कि इसका जवाब कैसे दिया जाए।'
कमोबेश इसी तरह का सवाल पार्टी के सदस्य जम्मू कश्मीर के बारे में भी पूछ रहे हैं जहां कांग्रेस पार्टी उमर अब्दुल्ल के नेतृत्व वाली नैशनल कान्फ्रेंस सरकार को समर्थन दे रही है। हाजी सई यूसुफ शाह नामक एक व्यक्ति जिस पर पहले 'दलाल' होने का आरोप लगाया गया और जिसे खुद मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने 'धोखेबाज' तक कह डाला, वह मुख्यमंत्री के आवास पर मृत पाया गया। घटना से जुड़े तथ्य इस प्रकार हैं: हाजी सईद यूसुफ शाह, यूसुफ गांदरबली नामक एक अन्य व्यक्ति जिसने जम्मू कश्मीर मंत्रिमंडल में एक पद पाने के लिए 85 लाख रुपये का भुगतान किया (किसे किया यह स्पष्ट नहीं) तथा नैशनल कान्फ्रेंस के एक अन्य कार्यकर्ता अब्दुल सलाम रेशी उम्मर अब्दुल्ला के श्रीनगर स्थित आवास पर इस महीने की शुरुआत में मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने तीनों लोगों को इसलिए बुलाया था ताकि वे मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए पैसे के लेनदेन के बारे में उनसे सवाल जवाब कर सकें। सईद यूसुफ शाह ने इस मामले में बिचौलिये की भूमिका निभाई थी। उमर अब्दुल्ला ने टेलीविजन पर कहा कि वह 'बिचौलिया नहीं बल्कि धोखेबाज थे।' अब्दुल्ला के मुताबिक तीनों व्यक्तियों को जम्मू कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा के हवाले कर दिया गया। जब उन तीनों को पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा था, शाह को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। शाह के रिश्तेदारों का कहना है कि उनको पुलिस हिरासत में प्रताडि़त किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मौत दिल का दौरा पडऩे से हुई। वहीं घटना के साक्षी रेशी का कहना है कि जब शाह को ले जाया जा रहा था उस समय वे उल्टियां कर रहे थे। ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि क्या शाह मुख्यमंत्री अथवा उनके परिवार के लिए पैसे जुटाने का काम करते थे। अब्दुल्ला ने मामला जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को सौंप दिया है। श्रीनगर में लोगों का कहना है कि उनको इस जांच से बहुत अधिक उम्मीद नहीं है। गत वर्ष सरकार ने हिरासत में हुई मौतों को लेकर एक न्यायिक जांच की घोषणा की थी। उस समय इन मौतों का आंकड़ा 17 था अब यह संख्या 120 के पार जा चुकी है लेकिन किसी को दंडित नहीं किया गया है। एक स्थानीय पत्रकार ने पूछा, 'ऐसे में हिरासत में एक और मौत हो जाने से क्या फर्क पड़ता है?'
कश्मीर लोग नैशनल कान्फ्रेंस के मसले से निपटने के लिए पर्याप्त क्षमतावान हैं। लेकिन कांग्रेस का क्या जो भ्रष्टाचार को लेकर खुद आत्मवलोकन की मुद्रा में है। वह राज्य में नैशनल कान्फ्रेंस की सहयोगी मात्र है और 87 सदस्यीय विधानसभा में उसके पास 17 सीटें हैं जबकि नैशनल कान्फ्रेंस को 28 सीटें हासिल हैं। इस तरह 45 सीटों के साथ वे सामान्य बहुमत से ऊपर हैं। विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को 21 सीटें हासिल हैं।
लेकिन नैशनल कान्फ्रेंस महज एक सहयोगी नहीं है। आज उमर अब्दुल्ला की स्थिति यह है कि अगर वह किसी केंद्रीय मंत्री से कश्मीर के लिए कुछ चाहें तो वह अपने सारे कामधाम छोड़कर पहले उनसे मिलेगा। वह दिन में किसी भी समय 10 जनपथ यानी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास पर फोन कर सकते हैं वह भी पूरे यकीन के साथ कि उनकी बात हो ही जाएगी। दिल्ली में कांग्रेस ने इस बात पर खामोशी ओढ़े रखी है कि वह एक ऐसी सरकार का समर्थन कर रही है जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। अनौपचारिक बातचीत में पार्टी स्वीकार करती है कि गठबंधन को कोई खतरा नहीं है। उसे आरोपों को लेकर कोई परेशानी नहीं है क्योंकि उनका साबित होना अभी बाकी है।
शुरुआत में कांग्रेस और नैशनल कान्फ्रेंस के बीच यह समझौता हुआ कि आधे कार्यकाल तक मुख्यमंत्री का पद नैशनल कान्फ्रेंस के पास रहेगा और शेष अवधि में यह कांग्रेस के पास रहेगा। राज्य में बेहद सफल रहे पंचायत चुनावों के बाद कांग्रेस के सरपंचों का एक समूह राहुल गांधी से मिला और उन्होंने उनसे कहा कि अगर समझौते के मुताबिक कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं बना तो राज्य में पार्टी का अस्तित्व समाप्ति की कगार पर पहुंच जाएगा। वहीं कश्मीर विश्वविद्यालय के एक छात्र द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उमर अब्दुल्ला की असफलता के बावजूद उनको दिए जा रहे समर्थन के बारे में सवाल किए जाने पर गांधी ने कहा कि यह धारणा ही गलत है। उन्होंने कहा, 'मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है। पार्टी का निर्णय ही अंतिम है।' जनवरी 2012 में उमर अब्दुल्ला को मुख्यमंत्री का पद संभाले तीन वर्ष पूरे हो जाएंगे।
अब्दुल्ला ने बीते सप्ताह एक टीवी साक्षात्कार में कहा, 'मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। मेरे पास अपना काम है और जांच से सारी सच्चाई बाहर आ जाएगी।' वाकई?

Keyword: anna hajare congress,
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