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ऑस्ट्रेलिया बना कोयले की आपूर्ति करने वाला प्रमुख देश
नीना भंडारी / सिडनी October 09, 2011

उच्च गुणवत्ता के कोयले, अच्छे बुनियादी ढांचे, राजनीतिक स्थिरता और कारोबार करने में आसानी के कारण भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया प्राथमिक आपूर्तिकर्ता बन गया है। इसके चलते बहुत सी निजी भारतीय कंपनियां इस महाद्वीप के विस्तृत कोयला भंडारों का फायदा उठाने के लिए वहां खदानों का अधिग्रहण और संयुक्त उपक्रम स्थापित कर रही हैं।
गुजरात एनआरई कोक लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अरुण कुमार जगतरामका ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि सभी प्रकार के उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के भंडारों के साथ ही तेजी से बढ़ते ऑस्ट्रेलियाई कोयला उद्योग के लिए भारतीय निवेश बहुत अहम है। गुजरात एनआरई कोक लिमिटेड अपनी 100 फीसदी स्वामित्व वाली दो हार्ड कोकिंग कोल खदानों का परिचालन करती है। ये दो खदानें न्यू साउथ वेल्स में एनआरई नंबर 1 कोयला खदान और एनआरई वॉन्गविली कोयला खदान। इनमें 15 लाख टन कोकिंग कोयले का उत्पादन होता है। कंपनी ने वर्ष 2015 तक बढ़ाकर इसे 60 लाख टन करने की योजना बनाई है, जिससे कंपनी विश्व की 10 सबसे बड़ी हार्ड कोकिंग कोयला उत्पादकों में शामिल हो जाएगी।
जगतरामका का कहना है कि सभी प्रकार के कोयलों की बढ़ती मांग और इंडोनेशिया से आपूर्ति में उभरती चुनौतियों के कारण भारत ऑस्ट्रेलिया में अवसरों की तलाश जारी रखेगा। भारत अपनी कोयला जरूरतें पूरी करने के लिए ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका से इसका आयात करता है। विश्व के सबसे बड़े थर्मल कोयला निर्यातक इंडोनेशिया में कोयला खदानें सस्ती हैं, लेकिन वहां कर ढांचे, प्रशासन और बुनियादी ढांचे में हालिया बदलाव ने भारतीय कंपनियों को ऑस्ट्रेलिया में अवसर तलाशने को विवश कर दिया है। मार्च में लैंको इन्फ्राटेक लिमिटेड ने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ग्रिफिन कोल के साथ 73 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अगस्त में गुजरात स्थित अदाणी समूह ने लिंक एनर्जी की 2.72 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मूल्य की क्वींसलैंड में कोयला खदानें खरीदीं और बोवेन के पास एबोट प्वाइंट टर्मिनल खरीदने के लिए अन्य 2 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर चुकाये।
पिछले महीने जीवीके ने क्वींसलैंड के गालीली बेसिन में हैंकॉक कोल की 1.26 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मूल्य की थर्मल कोल परिसंपत्तियां खरीदीं। जीवीके जैसी बहुत सी भारतीय कंपनियां कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 'पिट टू पोर्ट' यानी खदान से खनन उपकरण, भूमि और समुद्री परिवहन, रेलवे और बंदरगाह आदि में निवेश कर रही हैं।
जिंदल स्टील ऐंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) ने वर्ष 2009 में ऑस्ट्रेलियाई में कोकिंग कोल उत्खनन परियोजनाओं में निवेश किया था। वर्तमान में कंपनी के क्वींसलैंड के बोवेन और सूरत बेसिन में 100 फीसदी स्वामित्व वाले कोयला उत्खनन ब्लॉक हैं और इसने इन उत्खनन ब्लॉकों पर प्रारंभिक अध्ययन शुरू कर दिया है। इसके अलावा कंपनी की एएसएक्स में सूचीबद्ध कोयला उत्खनन कंपनी में 27.29 फीसदी हिस्सेदारी है। जेएसपीएल (ऑस्ट्रेलिया) के निदेशक जसबीर सिंह ने संवाददाता को बताया कि 'हम फिलहाल मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और सीमित मात्रा में इंडोनेशिया से कोकिंग कोल का आयात कर रहे हैं। इंंडोनेशिया में कानून बदलने के कारण इसमें भविष्य में निवेश कम हो सकता है और हम ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में विस्तार कर सकते हैं।'
ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ एग्रीकल्चर ऐंड रिसोर्स इकोनॉमिक्स ऐंड साइंसेज (एबीएआरईएस) ने अनुमान लगाया है कि भारतीय कोयला आयात वर्ष 2010 के 6 करोड़ टन से बढ़कर 2011 में 7.7 करोड़ टन और 2016 में 12.8 करोड़ टन हो जायेगा।
सिडनी में भारत के महावाणिज्य दूत अमित दासगुप्ता ने कहा कि 'ऊंची आर्थिक विकास दर बनाये रखने के लिए सुनिश्चित ऊर्जा आपूर्ति की जरूरत है। इसका मतलब है कि जहां कीमत, गुमवत्ता और अन्य मापकों पर जो खरा उतरता है, वहीं से आयात किया जाये। ऑस्ट्रेलिया स्वाभाविक रूप से प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहेगा।'
भारत के कोयला आयात की बढ़ती कहानी कोकिंग और थर्मल कोल दोनों पर लागू होती है। भारत में अच्छी गुणवत्ता के कोयले की शुद्ध कमी है और बुनियादी ढांचागत समस्याएं लघु और मध्यम अवधि में घरेलू प्रतिक्रिया को सीमित कर देंगी। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप में जिंस शोध के प्रमुख मार्क परवन ने संवाददाता को बताया कि 'यह कीमत का सवाल है। थर्मल पावर में तकनीकी सुधार छोटे से मध्य स्तर के इंडोनेशियाई कोयला उत्पादकों के लिए फायदेमंद होगी। ऑस्ट्रेलिया भी उपलब्धता के कारण लाभान्वित होगा।

Keyword: coal, business, inda,
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