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विदेशी मीडिया में भी छाया अन्ना का विरोध
प्रणव सिरोही / नई दिल्ली August 17, 2011

जन लोकपाल को लेकर अन्ना हजारे की मुहिम को देसी मीडिया का समर्थन तो मिल हर रहा है वहीं इस मामले में विदेशी मीडिया भी पीछे नहीं है। विदेशी अखबार लिखते हैं कि लोग भ्रष्टïाचार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं और 'भारत माता की जय का उद्घोष कर रहे हैं।
वैश्विक मीडिया में अन्ना के आंदोलन के अलावा प्रधानमंत्री के उस बयान को भी तरजीह दी गई है, जिसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि इस अनशन से देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बिगाडऩे की कोशिश की जा रही है। पाकिस्तान के एक अखबार में तो अन्ना का वह बयान प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार को भारत के लिए पाकिस्तान की तुलना में बड़ा खतरा बताया है।
विदेशी अखबारों में अन्ना के आंदोलन, उनकी गिरफ्तारी, उसके बाद के हालात, अन्ना का सशर्त रिहाई से इनकार और सरकार की मजबूरी को लेकर खबरें प्रकाशित की हैं। अमेरिकी अखबारों द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वॉशिंगटन पोस्ट, द लॉस ऐंजलिस टाइम्स के अलावा ब्रिटिश अखबारों द गार्डियन, द टाइम्स, डेली मेल ने लिखा है कि हजारे की गिरफ्तारी के बाद पूरे भारत में उनके पक्ष में जबरदस्त माहौल उमड़ा है। द टाइम्स में तो फ्रंस्वा इलियट ने यहां तक लिखा है, 'कांग्रेस विरोधी इस माहौल में अगले चुनाव में सत्ता परिवर्तन होता देख रहे हैं। इन अखबारों ने हजारे को भारत में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का अगुआ करार दिया है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखा गया है कि हजारे को गिरफ्तार करने के बाद अजीबोगरीब घटनाक्रम के तहत उन्हें रिहा करने के आदेश दिए गए लेकिन उन्होंने सशर्त रिहाई लेने से मना कर दिया। अखबार में प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण का भी जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भ्रष्टचार से लडऩे के लिए उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि महात्मा गांधी के अनुयायी हजारे कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार की राह में बड़ा रोड़ा बन गए हैं और हाल के दिनों में दोनों पक्षों में तल्खियां बढ़ी हैं। इस समाचार पत्र में हाल के दिनों में देश में सामने आए भ्रष्टïाचार के बड़े मामलों का भी उल्लेख किया है। पत्र में वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर के हवाले से लिखा गया है कि सरकार हड़बड़ी महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को सरकार महज कागजी शेर नजर आ रही है। लॉस ऐंजलिस टाइम्स में प्रशांत भूषण के हवाले से लिखा गया है, 'यह सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नहीं रखती है। हजारे की गिरफ्तारी अवैध और असंवैधानिक है।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में लिखा गया है कि हजारे की गिरफ्तारी के बाद राजधानी दिल्ली सहित देश भर में उनके समर्थन में जनसैलाब उमड़ रहा है। इसी लाइन पर द टाइम्स में लिखा गया है कि भ्रष्टïाचार विरोधी मुहिम के नेता को गिरफ्तार करने के बाद कई शहरों में आक्रोश उमड़ा। द गार्डियन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान का भी जिक्र किया गया है जिसमें उन्होंने हजारे के आंदोलन को 'पूरी तरह से गलत ठहराया है। गार्डियन में हजारे के व्यक्तित्व के जुदा पहलुओं पर भी रोशनी डाली गई है। अखबार लिखता है, 'वह प्रतिबद्घ हिंदू हैं जिन्होंने अपने गांव में शराब, तंबाकू और केबल टीवी पर रोक लगा दी है लेकिन उन्होंने जातिवाद के खिलाफ अभियान भी चलाया है। उन्होंने सूचना के अधिकार के लिए भी कड़ी लड़ाई लड़ी है। अखबार लिखता है कि इस साल अप्रैल में उनके आंदोलन के बाद देश में हिंदी और अंग्रेजी में लिखे मैं अन्ना हूं टोपियों की धूम मच चुकी है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने हजारे के उस बयान को तरजीह दी है जिसमें अन्ना ने मुहिम को आजादी की दूसरी लड़ाई बताया है।

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