बिजनेस स्टैंडर्ड - नकदी हुई बेहतर तो घट गई उधारी दर
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नकदी हुई बेहतर तो घट गई उधारी दर
मनोजित साहा और / मुंबई July 14, 2011

कारोबार के लिए ऋण लेने वाली कंपनियों के लिए एक अच्छी खबर है। पिछले करीब एक साल से बढ़ रही छोटी अवधि के ऋणों की ब्याज दर में अब गिरावट आनी शुरू हो गई है। इसमें आई गिरावट की वजह है बाजार में नकदी प्रवाह का बेहतर होना। नकदी हालात सुधरने के कारण अब बैंकों ने अपने कारोबारी ग्राहकों को कम दाम पर छोटी अवधि के ऋण देना शुरू कर दिया है।
बैंकों द्वारा रिजर्व बैंक की नकदी सामंजस्य सुविधा (एलएएफ) से लिए जाने वाले ऋण में जून के बजाय जुलाई में काफी गिरावट दर्ज की गई है। जून में औसत रीपो ऋण 74,000 करोड़ रुपये था। आखिरी हफ्ते में तो यह बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये तक हो गया। जबकि जुलाई में यह ऋण औसतन 20,000 करोड़ रुपये ही रह गया, जिससे संकेत मिलता है कि ज्यादातर बड़े बैंकों के पास पर्याप्त कोष उपलब्ध था। नतीजतन बैंकों ने आधार दरें तो बढ़ा दी लेकिन वे सोच समझकर ही ऋण मुहैया करा रहे हैं।
देश के एक बड़े सरकारी बैंक के कार्यकारी निदेशक ने बताया, 'अगर हम मनी मार्केट योजनाओं में निवेश करेंगे तो हमें 7.5-7.6 फीसदी से अधिक रिटर्न नहीं मिलेगा। जबकि कंपनियों को उनकी जरूरत के हिसाब से छोटी अवधि यानी 30 दिन या 60 दिन के लिए आधार दर पर भी ऋण देने से हमें कहीं बेहतर रिटर्न मिलेगा।Ó इस महीने की शुरुआत से अब तक ज्यादातर सरकारी बैंकों ने आधार दर में एक चौथाई फीसदी का इजाफा किया है। फिलहाल अधिकतर सरकारी बैंकों की आधार दर 10.25 फीसदी है जबकि भारतीय स्टेट बैंक की 9.5 फीसदी। पिछले एक साल के दौरान आधार दर में 200-225 आधार अंक की तेजी आई है।
जब नकदी प्रवाह कम था तो बैंक अपने प्रमुख ग्राहकों को आधार दर से 25-50 आधार अंक ज्यादा पर ऋण मुहैया करा रहे थे। लेकिन अब बैंकरों का कहना है कि  वे अपनी प्रमुख ग्राहक कंपनियों को आधार दर पर ही ऋण मुहैया करा रहे हैं। रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार कुछ श्रेणियों को छोड़कर बैंक आधार दर से कम दरों पर ऋण नहीं दे सकते हैं।
ब्याज दरों के आधार दर के बराबर ही रहने से चालू तिमाही में बैंकों के बहीखाते पर इसका असर देखने को मिल सकता है। नकदी के बेहतर हालात का असर कॉमर्शियल पेपर दर पर भी पड़ा है, जो जुलाई में नरम पड़ गई। कॉमर्शियल पेपर के जरिये कंपनियां एक साल तक की मैच्योरिटी के लिए कर्ज जुटा सकती हैं।
बाजार के खिलाडिय़ों के अनुसार बेहतर नकदी हालात देखते हुए कॉमशिर्यल पेपर की दरों में गिरावट आई है। एडलवाइज सिक्योरिटीज के वरिष्ठï उपाध्यक्ष अजय मंगलूनिया ने बताया, 'कॉमर्शियल पेपर की दर पिछले एक महीने में 50-60 आधार अंक कम हो गई है।Ó फिलहाल कंपनियां तीन महीने के कॉमर्शियल पेपर 9-9.5 फीसदी और 6 महीने से लेकर एक साल की अवधि वाले पेपर करीब 10 फीसदी की दर पर जारी कर रही हैं। उन्होंने बताया, 'अगले कुछ दिन तक इनकी दरों में कोई गिरावट आने की उम्मीद नहीं है।Ó
इस बीच, बढ़ती मुद्रास्फीति पर चिंता जताते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई की दर को संतोषजनक स्तर पर लाने के लिए साथ-साथ काम कर रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि
केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है।

Keyword: credit score, CIBIL,
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