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पर्दे पर 'गांधी टू हिटलर
वीनू संधू /  June 20, 2011

यह बात वर्ष 1939 की है जब अहिंसा और शांति के दूत महात्मा गांधी ने जर्मनी के गैस चैंबरों में हजारों लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार एडोल्फ हिटलर को पत्र लिखा था। इस पत्र को लेकर वर्ष 2008 में एक युवा लेखक की उत्सुकता बढ़ी और लगभग 3 साल बाद नलिन रंजन सिंह ने मोहनदास करमचंद गांधी और एडोल्फ हिटलर पर फिल्म बनाकर तैयार कर ली है। बीसवीं सदी का इतिहास रचने वाली इन दो शख्सियतों ने एक ही ताकत के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ी थी लेकिन विचारधारा के स्तर पर इनमें जमीन-आसमान का फर्क था।

सिंह का कहना है, 'गांधीजी चाहते थे कि भारत में ब्रिटिश हुकूमत खत्म हो और अंग्रेज यहां से चले जाएं। वहीं हिटलर भी दूसरे विश्व युद्घ में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई रहा था लेकिन इन दोनों शख्सों के संघर्ष करने के तरीके अलग थे। सिंह ने स्क्रिप्ट लिखने के साथ इस फिल्म में अपनी अदाकारी का जौहर भी दिखाया है। वह 'गांधी टू हिटलरÓ फिल्म के सहनिर्माता भी हैं। यह फिल्म बंकर में गुजारे गए हिटलर की जिंदगी के आखिरी दिनों से जुड़ी है। इसी दौरान हिटलर के इवा ब्राउन के साथ रिश्ते बने और आखिरी दिनों में उसने शादी भी की। वहीं गांधी ने दूसरे विश्व युद्घ को रोकने की कोशिश की, यह भी इस फिल्म में दिखाया गया है।
पोलैंड पर जर्मनी के हमले से एक महीने पहले गांधी ने पहली बार हिटलर को 2 पत्र लिखे। इस पत्र में गांधी ने कहा, 'मैं यह स्पष्टï तौर पर समझ सकता हूं कि आप दुनिया के एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो इस युद्घ को रोक सकते हैं। यह युद्ध मानवता पर संकट हो सकता है। क्या आपको ऐसे बड़े उद्देश्य के लिए कोई कीमत नहीं चुकानी चाहिए?Ó लेकिन हिटलर ने अपना हमला जारी रखा जिससे दूसरे विश्वयुद्घ की शुरुआत हो गई। हिटलर के मन में भारतीयों के प्रति नफरत की भावना थी और उसने कई दफा यह कहा था कि वे एक साम्राज्यवादी शक्ति के गुलाम बनने के लिए खुद ही जिम्मेदार हैं। वैसे, यह पहली बार नहीं है जब हिटलर किसी हिंदी फिल्म में नजर आएगा। श्याम बेनेगल की वर्ष 2005 की फिल्म, 'बोस: दी फॉरगॉटन हीरोÓ में भी हिटलर की भूमिका थी। इस फिल्म को बेहतरीन फिल्म के लिए नरगिस दत्त अवॉर्ड भी मिला। इस फिल्म में सुभाष चंद्र बोस 'नेताजी हिटलर से कहते हैं कि वह भारतीयों की कमजोरी से जुड़ी उनकी विचारधारा पर सहमत नहीं हैं। इतिहासकारों का यह दावा है कि हिटलर ने बोस की बातों पर ध्यान नहीं दिया। इसके अलावा कई और वजहों से भी बोस का झुकाव जापानियों की ओर बढ़ा।

जुलाई के पहले हफ्ते में गांधी टू हिटलर पूरी दुनिया में रिलीज हो रही है। वैसे इस फिल्म को बर्लिन फिल्म फेस्टिवल और कान में दिखाया जा चुका है लेकिन यह पूरी फिल्म नहीं थी बल्कि इसे लघु फिल्म के तौर पर अंग्रेजी में डब करके अंतरराष्टï्रीय दर्शकों के लिए पेश किया गया था।

हिंदी में है अनूठी फिल्म
इस फिल्म का टाइटल भले ही अंग्रेजी में है। लेकिन यह पूरी तरह से हिंदी फिल्म है। बॉलीवुड में ऐसा प्रयोग पहली बार हो रहा है जब इतिहास के एक विशेष कालखंड को लेकर अंतरराष्टï्रीय थीम पर आधारित हिंदी में फिल्म बनाई जा रही हो। वैसे, इस फिल्म में कई चीजें कल्पना से परे लगती है। मसलन हिटलर को हिंदी में बोलते हुए देखना। बंकर में गुजारे हुए आखिरी दिनों के दौरान हिटलर अपने सलाहकारों के साथ गंभीर वार्तालाप में दिखता है और साथ ही अपनी जिंदगी की बेहद खास महिला के साथ वक्त बिताते हुए नजर आता है। इस सीन में हिटलर की आदतों और व्यवहार की झलक सहजता से दिख जाती है। हिटलर जैसे शख्स पर हिंदी में फिल्म बनाना आसान नहीं था। हिटलर के प्रोपेगेंडा मंत्री जोसेफ गोएबल्स की भूमिका निभाने वाले सिंह कहते हैं, 'इस फिल्म को हिंदी में बनाना आसान नहीं था लेकिन मैं इस मानसिक अवरोध को खत्म करना चाहता था। हिटलर जर्मन भाषा बोलता था। लेकिन उस पर कई सफल अंग्रेजी फिल्में बनाई गई है,ं मसलन दी लास्ट टेन डेज। वैसे गांधी और स्लमडॉग मिलियेनायर जो पूरी तरह से भारतीय फिल्में थीं लेकिन दोनों ही फिल्में अंग्रेजी में बनाई गई थीं। ऐसे में मुझे लगता है कि हिटलर और उसके सहयोगी हिंदी क्यों नहीं बोल सकते हैं?

इस फिल्म में हिटलर की भूमिका में रघुवीर यादव है। पहले इस भूमिका को अनुपम खेर निभाने वाले थे लेकिन विरोध के बाद उन्हें यह भूमिका को छोडऩी पड़ी। नेहा धूपिया ने ब्राउन की भूमिका अदा की है। इस फिल्म की शूटिंग फिल्म सिटी नोएडा, गुडग़ांव के गांवों और लद्दाख में हुई है और फिल्म की लागत करीब 10 करोड़ रुपये है। इस स्क्रिप्ट के लिए निर्माताओं का साथ मिलने में काफी मुश्किलें आईं क्योंकि हिंदी में हिटलर जैसे विषय पर कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं था। आखिरकार रियल एस्टेट डेवलपर आम्रपाली ने इसके लिए पैसा लगाने का फैसला किया। आम्रपाली समूह के अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा कहते हैं, 'मैं एक नई कंपनी लॉन्च करना चाहता था जो हमारे विज्ञापन और डॉक्यूमेंटरी के लिए काम करे। सिंह की स्क्रिप्ट ने वह काम कर दिखाया और हमने अपना एक प्रोडक्शन हाउस लॉन्च किया-आम्रपाली मीडिया विजन।

संगीत में भी प्रयोग
इस फिल्म में देसीपन बरकरार रखने के लिए गीत-संगीत भी शामिल  है। इसमें 5 गाने हैं। इनमें भी प्रयोग किया गया है। फिल्म का मुख्य गीत 'वंदे मातरमÓ मूलत: बांग्ला और संस्कृत में लिखा गया है। लेकिन इसका अनुवाद शब्दश: हिंदी में किया गया है और इसे रॉक संगीत की धुनों में पिरोया गया है। आम्रपाली मीडिया विजन की सीईओ और फिल्म की सह निर्माता एवं गीतकार पल्लवी मिश्रा का कहना है, 'युवा वर्ग किसी गंभीर कविता के अर्थ को नहीं समझते हैं। ऐसे में इसे सहज बनाने का विचार सही लगता है। गांधी के पसंदीदा भजन वैष्णव जन का अनुवाद भी गुजराती से हिंदी में किया गया है। इस फिल्म के गानों को जगजीत सिंह, दलेर मेंहदी और शान ने अपनी आवाज दी है। फिल्म को फ्रेंच, जर्मन, अंग्रेजी, तमिल और बंगला में डब किया जाएगा। ङ्क्षसंह का कहना है, 'हम इसे  देश के छोटे-बड़े 300 सिनेमा हॉल में दिखाएंगे। यह इतिहास का ऐसा पन्ना है जिसे पढऩे और समझने की जरूरत है। अब अहम सवाल है कि क्या अपनी आत्महत्या के 65 साल बाद हिटलर बिकेगा और गांधी की हत्या के 63 सालों के बाद फिल्म में दर्शक उन्हें देखेंगे?

Keyword: mahatma gandhi, hitlar, peace,
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