बिजनेस स्टैंडर्ड - नवी मुंबई सेज को जुलाई में मिलेगी हरी झंडी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, February 27, 2020 07:59 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिंस खबर

नवी मुंबई सेज को जुलाई में मिलेगी हरी झंडी
नयनिमा बसु / नई दिल्ली June 20, 2011

अगले माह के मध्य तक सरकार ने नवी मुंबई विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) को हरी झंडी देने का मन बना लिया है। पिछले 4 साल से यह मामला अटका हुआ है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर की अध्यक्षता में होने वाली मंजूरी समिति की बैठक में इसे मंजूरी दी जा सकती है। यह बैठक 15 जुलाई को होने की संभावना है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस बैठक में इस मसले पर विचार करने के लिए गठित किया गया दल इसे अंतिम मंजूरी देगा और वहां मौजूद इकाइयों को काम करने की अनुमति दी जाएगी।

इस दल में वाणिज्य विभाग, राजस्व विभाग, आर्थिक मामलों के विभाग, सेंट्रल बोर्ड आफ एक्साइज ऐंड कस्टम्स (सीबीईसी) और प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के प्रतिनिधि शामिल हैं। दल ने पिछले सप्ताह अंतिम जांच के लिए मौके का मुआयना किया था। नवी मुंबई सेज प्राइवेट लिमिटेड मुकेश अंबानी और उनके सहयोगी आनंद जैन प्रवर्तित कंपनी है। उसके प्रस्ताव के मुताबिक 1233 हेक्टेयर भूमि पर बहुउत्पाद सेज विभिन्न 5 अलग-अलग सेज के रूप में विकसित किए जाने थे, जिसे समीपता नियमों के चलते मंजूरी नहीं मिल रही थी।

नवी मुंबई सेज प्राइवेट लिमिटेड के एक अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर बताया, 'इसकी वजह से हमारी अनुमानित लागत में 100-150 करोड़ रुपये की कमी आएगी। इसे पहले अगर हम एक ही क्षेत्र बनाने के लिए फ्लाईओवर या भूमिगत मार्ग बनाते तो कुल लागत 400 करोड़ रुपये के आसपास होती। इसलिए यह प्रस्ताव कम खर्च के हिसाब से बहुत प्रभावी था। इसके अलावा बहुत बड़े सेज का रखरखाव व्यावहारिक नहीं था और इससे सेज की अवधारणा के लाभ नहीं मिल पाते।

हालांकि अधिकारी ने यह भी कहा कि इसे अंतिम मंजूरी मिलने के बाद भी काम शुरू करने में कम से कम 1 साल लगेंगे। कंपनी ने इसे 5 भागों में विभाजित करने का प्रस्ताव रखा है। इस तरह से वह अब बहु उत्पाद सेज होगा, जिसमें एक हल्का इंजीनियरिंग सेज, 2 आटीईएस सेज और 1 वेयरहाउसिंग जोन होगा। सरकार ने द्रोणगिरि स्थित नवी मुंबई सेज को 2007 में औपचारिक स्वीकृति दी थी। बहरहाल इस परियोजना के लिए कंपनी निकटता नियमों के मसले पर परियोजना को मंजूरी नहीं मिल रही थी। ऐसे में वित्त मंत्रालय ने पहल करते हुए आवश्यक कदम उठाए और यह सुनिश्चित किया कि इस परियोजना से राजस्व को कोई नुकसान नहीं होगा।

सामिप्य के न होने से स्थानीय घरेलू बाजारों में विनिर्मित उत्पादों की तस्करी को प्रोत्साहन मिल सकता था। लेकिन डेवलपर्स सेज के निर्माण के लिए निकटता मानकों में ढील दिए जाने की मांग कर रहे थे, क्योंकि उन्हें हाइवे, पानी की पाइपलाइन, रेलवे ट्रैक, नहर और जलनिकासी के निर्माण के संकट से अलग-अलग जूझना पड़ता। इसके चलते उन्होंने सरकार से निवेदन किया था कि सरकार वर्तमान मानकों में ढील दे।

Keyword: sez, navi mumbai, cbec,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दूरसंचार हितों के मद्देनजर वोडाफोन को मिलनी चाहिए राहत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.