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बाजार जब डगमगाए तो बिल्कुल भी न घबराएं
संदीप शानबाग /  May 29, 2011

शेयर बाजार में अनिश्चितता बरकरार है। तीन सालों में 17,200 के स्तर से यह 8,100 तक नीचे चला गया और फिर उछलकर लगभग 21,000 के स्तर को छू चुका है। इस समय यह 18,000 के आस-पास है और अनिश्चितता बनी हुई है।

इतना कुछ होने के बाद भी सबकुछ ठीक नहीं लग रहा है। ग्रीस की क्रेडिट रेटिंग इन्वेस्टमेंट ग्रेड से चार पायदान कम कर दी गई है। नतीजतन इससे वैश्विक साख बाजार के कमजोर होने की आशंका बढ़ गई है। इटली पर भी खतरा मंडरा रहा है जबकि जापान मुश्किलों में हैं और वहीं अमेरिका से आ रहे आंकड़े भी कुछ अच्छी कहानी बयां नहीं कर रहे हैं। भारत में भी पेट्रोल के बाद अब डीजल, केरोसिन और रसोई गैसों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो उत्पादन में अहम भूमिका निभाने वाले कारक महंगे हो जाएंगे और इससे महंगाई की आग को और अधिक हवा मिलेगी। इन परिस्थितियों के बीच निवेशक असमंजस में पड़ गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि मौजूदा माहौल को देखते हुए क्या म्युचुअल फंडों में निवेश भुना लेना चाहिए? विश्व के सबसे सफल निवेशक शायद ऐसा नहीं सोचते हैं। वारेन बफेट कहते हैं, 'हमारे लिए निवेश बनाए रखने के लिए सभी समय उपयुक्त है।Ó

लिहाजा इस मुद्दे को सुलझाने के बजाय की म्युचुअल फंडों में निकासी कैसे करें हमें सबसे पहले इस बात पर विचार करना चाहिए कि कब बिकवाली नहीं करनी चाहिए। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथन काफी प्रासंगिक लगता है।

बर्नस्टीन विलियम अपनी किताब 'द इंटेलीजेंट ऐसेट एलोकेटरÓ में कहते हैं, 'निवेशक  दो तरह के होते हैं। एक वे जो यह नहीं जानते कि बाजार किस दिशा में जा रहा है और दूसरे वे जो यह नहीं जानते कि वे नहीं जानते हैं।Ó इसके अलावा तीसरी श्रेणी भी होती है इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल की जो यह जानते हैं कि वे नहीं जानती लेकिन चूंकि , उनका जीवन-यापन इस पर निर्भर करता है इसलिए वे अपने को जानकार दिखाने की कोशिश करते हैं।

यह कई बार साबित हो चुका है कि बाजार के समय के बारे में कभी अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। इस समय सूचकांक 18,300 के करीब है लेकिन कोई भी यह जानने में सक्षम नहीं है कि कल बाजार किस दिशा में जाएगा या भविष्य में क्या स्थिति रहेगी। लिहाजा अगर आप बाजार की दिशा और संभावित परिणामों के आधार पर रकम लगाते हैं या निकालते हैं तो इसे पूरी तरह कयास ही कहा जाएगा। काफी कुछ जानने के बाद आप कयास लगा सकते हैं या संचयी कर सकते हैं लेकिन दोनों नहीं कर सकते। यह एक बार फिर आपको उस स्थिति में ला देता है जहां से आपने शुरुआत की थी।
कब बेचना चाहिए म्युचुअल फंड निवेश?

खस्ता प्रदर्शन
निवेश कुल मिलाकर लंबी अवधि के लिए होता है। लेकिन यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि निवेश सही जगह हो रहा है। प्रतिस्पद्र्धी फंड कंपनियों से अपने फंड की तुलना करें साथ ही बेंचमार्क प्रतिफल से भी तुलना करनी चाहिए। मान लें कि फंड ने 10 फीसदी मुनाफा अर्जित किया है। इससे आप खुश जरूर हो सकते हैं लेकिन यह आपको बहुत अधिक जानकारी नहीं देता है। फंड के प्रदर्शन का पता लगाने के लिए आप प्रतिस्पद्र्धी फंडों से इसकी तुलना कर सकते हैं।
तुलना के लिए प्रतिस्पद्र्धी फंडों के चयन का भी ध्यान रखें। इक्विटी-डाइवर्सिफइड फंड की तुलना सेक्टोरल या लार्ज-कैप फंड की तुलना मिड-कैप एग्रेसिव फंड से नहीं करनी चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि आप प्रदर्शन का आकलन एक निश्चित अवधि के लिए करते हैं। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कम से तीन से पांच साल के प्रदर्शन पर गौर करें।
संरचना में बदलाव
निवेश बेचने का एक दूसरा कारण यह हो सकता है कि अगर यह समान निवेश नहीं रहता है। मिसाल के तौर पर बैलेंस्ड फंडों को इक्विटी में 50 फीसदी निवेश करना होता है। अब संशोधित नियमों के अनुसार कम से कम 65 फीसदी निवेश इक्विटी में होना चाहिए। प्रतिफल बढ़ाने के लिए अधिकांश फंड प्रबंधक इस अनुपात में बढ़ोतरी भी कर सकते हैं। लिहाजा अगर निवेश जोखिम भरा हो गया है तो इससे बेचा जा सकता है।

प्रबंधक का बदलाव
म्युचुअल फंड कंपनियां इस बात पर जोर देती है कि फंड प्रबंधन एक प्रक्रिया है जिसे व्यक्ति विशेष से कोई लेना-देना नहीं है।  हालांकि अच्छे शेयरों के चयन के लिए अनुभव, कुशलता और दूरदर्शिता जैसे खूबियां होना आवश्यक है। यह सभी मानवीय गुण हैं और इसे महज एक प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जा सकता है। फंड प्रबंधक का जाना अच्छा नहीं माना जाता है लेकिन यह भी हो सकता है कि आने वाला व्यक्ति और भी ज्यादा कुशल और सक्षम हो। लिहाजा फंड प्रबंधक पर नजर रखें।

आवंटन
हरेक निवेशक की जोखिम झेलने की क्षमता अलग-अलग होती है। मान लें कि आपने अपने फंड के आधे हिस्से का निवेश शेयरों में किया है। शेयरों में मौजूदा गिरावट को देखते हुए हो सकता है कि आपको पोर्टफोलियो पहले जैसा नहीं रह गया हो। इसे वापस अपनी जगह पर लाने के लिए आपको बिकवाली करनी होगी। बेचते समय वित्तीय पक्ष का भी ध्यान रखें। पंूजीगत लाभ से जुड़ी करों में छूट के लिए एक साल पुराने फंड की बिकवाली करना ज्यादा बेहतर होगा। हमने अभी तक यह कहा है कि फंड बेचने के सभी कारणों में बाजार में गिरावट या उछाल का आपके फैसले पर असर नहीं पडऩा चाहिए। अगर बाजार में गिरावट शुरू होती है तो अतिरिक्त फंड खरीदें। लेकिन सवाल उठता है कि अगर आपको पैसों की जरूरत है तब क्या होगा? तब निवेश बेचने का यह वाजिब कारण लगता है।

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