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विरोध प्रदर्शन से आहत न होने से मिली राहत
बीएस संवाददाता /  May 27, 2011

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) की फैकल्टी से जुड़ी अपनी टिप्पणी को लेकर हाल में विवाद में आए पर्यावरण और वन राज्य मंत्री जयराम रमेश गुवाहाटी स्थित आईआईटी के 13वें दीक्षांत समारोह में 'राहतÓ महसूस करते नजर आए। मंत्री ने कहा कि उन्हें आशंका थी कि संस्थान में उन्हें काले झंडे दिखाए जाएंगे।

रमेश ने दीक्षांत समारोह में दिए भाषण की शुरुआत में कहा, 'मुझे आईआईटी गुवाहाटी में सभ्य तरीके से प्रवेश मिला है। मुझे आशंका थी कि यहां काले झंडे दिखाए जा सकते हैं।Ó मंत्री ने कहा, 'मैं शिक्षकों का आभारी हूं जिन्होंने भावनाएं व्यक्त करने में संयम बरता।Ó रमेश सोमवार को यह कहकर विवादों में आ गए थे कि आईआईटी और आईआईएम के शिक्षक नहीं, बल्कि विद्यार्थी विश्व स्तरीय हैं।

रमेश ने देश के प्रौद्योगिकी संस्थान से स्नातक हो चुके विद्यार्थियों से कहा कि वह खुद में वैज्ञानिक अभिरूचि जगाएं, जिसकी दिवंगत प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी पैरवी की थी। रमेश ने कहा, 'आप जो कुछ करें, उसमें नेहरू की वैज्ञानिक अभिरुचि जैसा जज्बा पैदा करने की कोशिश करें। नेहरू के वैज्ञानिक अभिरुचि के प्रति जुनून के सही महत्व को स्वीकारने के लिए आपको उनके राजनीतिक दल का सदस्य बनने की जरूरत नहीं है।Ó जब उनके कांग्रेसी सहयोगी और मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

सिब्बल ने पिछले दिनों यह कहा था रमेश भले ही अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन ऐसी टिप्पणी तथ्य पर आधारित होना चाहिए न कि किसी नजरिये के आधार पर। बिजनेस स्टैंडर्ड से अपनी बातचीत में रमेश ने भरोसा जताते हुए कहा था कि उन्हें देश के साथ-साथ विदेश से भी इस पर समर्थन मिल रहा है। पर्यावरण मंत्री भी आईआईटी के छात्र रह चुके हैं और आईआईटी पर सरकार द्वारा नियुक्त समिति के द्वारा पेश किए गए आंकड़ों में उनका समर्थन भी है।

आईआईटी की स्वायत्तता से जुड़ी काकोडकर समिति की रिपोर्ट में फैकल्टी की गुणवत्ता पर सवाल किए बिना कम फैकल्टी की ओर इशारा किया गया है। आईआईटी की स्वायत्ता और वृद्घि के लिए रोडमैप का सुझाव देने के लिए इस समिति की स्थापना की गई थी और इसके तहत यह सिफारिश की गई है कि आईआईटी में 1,200 फैकल्टी का इंतजाम होना चाहिए और यहां 12,000 छात्र होने चाहिए। पीएचडी वाले छात्रों की बढ़ती संख्या से अधिकतम वृद्घि की संभावनाएं तैयार होंगी। इस समिति ने प्रति फैकल्टी सालाना न्यूनतम 0.6 पीएचडी का संकेत दिया है।

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