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मियाद कम तो ज्य़ादा रकम
बीएस संवाददाता / मुंबई May 13, 2011

छोटी रकम जमा करने वालों की मौज है। बैंकों ने पिछले कुछ दिनों में कम मियाद की ऐसी जमा पर ब्याज की दरें तेजी से बढ़ाई हैं और 6 महीने तक की जमा पर वे खासे मेहरबान हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कमी आएगी।
देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 180 दिन या उससे कम अवधि वाली सभी सावधि जमा (एफडी) योजनाओं पर ब्याज दरों में 100 से 225 आधार अंकों का इजाफा किया है। एसबीआई अब 7 से 90 दिन की एफडी पर 6.25 फीसदी और 91 से 180 दिन की एफडी पर 7 फीसदी ब्याज दे रहा है।
एसबीआई के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'हमें लगता है कि 6 महीने में ही ब्याज दरें नीचे आ जाएंगी क्योंकि महंगाई पर भी काबू हो जाएगा। इसलिए अगर 6 महीने में ब्याज दर नीचे आ ही जानी हैं तो हम भी लंबे समय के लिए ऊंचा ब्याज क्यों दें?Ó
एचडीएफसी बैंक ने भी छोटी अवधि वाली एफडी पर ब्याज बढ़ा दिया है। दूसरे बैंक भी जल्द ही इस जमात में शामिल हो सकते हैं। देना बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, 'छोटी अवधि की दरें बाजार के मिजाज के मुताबिक चलती हैं। इसलिए अगर एसबीआई जैसा बैंक उनमें इजाफा करता है तो बाकी तमाम बैंक भी हमेशा उसी राह पर चल पड़ते हैं।Ó
मौद्रिक नीति का ऐलान होने के बाद कई बैंक जमा दरें बढ़ा चुके हैं लेकिन उन्होंने बचत खाते पर नई ब्याज दरों के मुताबिक खुद को ढालने के लिए ही ऐसा किया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की तस्दीक भी की। उन्होंने कहा, 'दरों में इजाफे से कम अवधि की एफडी ज्यादा आकर्षक हो गई हैं क्योंकि बचत खाते पर बैंक महज 4 फीसदी ब्याज दे रहे हैं।Ó
भारतीय रिजर्व बैंक ने 3 मई से ही बचत खातों पर मिलने वाले ब्याज में 50 आधार अंकों का इजाफा कर दिया है। बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भी कम अवधि वाली एफडी पर ब्याज की दर उसी के मुताबिक बढ़ा दी है। सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन बैंक ने भी जमा दरों में 25 से 275 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है। 7 से 90 दिन में परिपक्व होने वाली एफडी पर अब वह 6.25 फीसदी ब्याज दे रहा है।
जून में अग्रिम कर भुगतान और सरकार द्वारा छोटी अवधि के लिए ऋण लेने के कारण नकदी प्रवाह पर असर पड़ सकता है। दरअसल सरकार भी अब हर हफ्ते 7,000 करोड़ रुपये के बजाय 11,000 करोड़ रुपये ऋण के तौर पर लेगी। भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी ने बताया, 'तंत्र से जितनी बढ़ी हुई रकम निकाली जाएगी उससे नकदी के मोर्चे पर दिक्कत पेश आ सकती है।Ó आरबीआई ने अपनी सालाना मौद्रिक एवं ऋण नीति में उम्मीद जताई है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलेगी।

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