बिजनेस स्टैंडर्ड - नई दवाओं की मंजूरी पर फिलहाल विराम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, October 19, 2021 11:50 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिंस खबर

नई दवाओं की मंजूरी पर फिलहाल विराम
मंजूरी से पहले ली जाएगी विशेषज्ञों की राय
जो सी. मैथ्यू / नई दिल्ली May 06, 2011

देश में दवाओं के विनियामक भारतीय दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने थेरापेटिक खंड में नई दवाओं के लिए विपणन संबंधी मंजूरी देना फिलहाल बंद कर दिया है।

डीसीजीआई के इस कदम से दवा कंपनियों की परेशानी बढ़ सकती है। दरअसल, दवाओं की मंजूरी के लिए डीसीजीआई एक नई प्रणाली लाने जा रहा है। इसके तहत नियामकीय निर्णय लेने से पहले दवाओं पर स्वतंत्र विशेषज्ञों के पैनल की राय ली जाएगी। इसके बाद ही विपणन संबंधी मंजूरी दी जाएगी।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस पहल का उद्ïदेश्य दवाओं की मंजूरी प्रक्रिया को अधिक आसान और पारदर्शी बनाना है। इस प्रणाली के तहत मंजूरी प्रक्रिया में अतिरिक्त देरी हो सकती है, क्योंकि प्रत्येक आवेदन पर समिति के सदस्यों की राय जाहिर करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया जाएगा। घरेलू दवा बाजार में नई दवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू फार्मास्युटिकल्स बाजार में इसकी हिस्सेदारी 60,000 करोड़ रुपये के आसपास है।

भारत में 2010 में 223 नई दवाओं को मंजूरी दी गई थी। इसमें स्वीकृत दवाओं की नई कंबिनेशन भी शामिल हैं। इस वर्ष जनवरी से मार्च की अवधि में 32 नई दवाओं को मंजूरी दी की गई है। वर्ष 2009 और 2008 में क्रमश: 215 और 270 नई दवाओं को मंजूरी दी गई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय की योजना के अनुसार, प्रत्येक थेरापेटिक खंड में नई दवाओं को मंजूरी देने के लिए स्वतंत्र चिकित्सा विशेषज्ञों की 10 सदस्यीय समिति बनाई जाएगी।

मंत्रालय पहले ही इस तहत की 12 समितियों को गठित कर चुकी है। ये समितियां गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, प्रजनन एवं मूत्र विज्ञान, एंटीबायोटिक दवाओं, मेटाबोलिज्म, तंत्रिका विज्ञान व मनोरोग विज्ञान, टीके, नेत्र विज्ञान, हृदय संबंधी रोग, त्वचा विज्ञान व एलर्जी, दर्दनाशक दवाओं और फेफड़े संबंधी रोग के लिए नई दवाओं की जांच करेंगी।

समिति के सदस्य नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च जैसे देशभर के सार्वजनिक क्षेत्र के चिकित्सा संस्थानों से लिए गए हैं।

मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इस समिति का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, 'हम प्रत्येक दो वर्षों के बाद नए विशेषज्ञों की समिति बनाएंगे। इससे चिकित्सा व्यवसाय को अप्रत्यक्ष तौर पर दवाओं के लिए जिम्मेदार बनाया गया है, ताकि देश में उसका उत्पादन और विपणन हो सके।'

Keyword: DCGI, approval for medicines, India,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बाजार में तेजी का सिलसिला अभी बना रहेगा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.