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तेल, जिंस के भाव महंगाई को देंगे ताव
बीएस संवाददाता / मुंबई May 02, 2011

पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीकी देशों में राजनीतिक संकट का असर कच्चे तेल और दूसरी जिंसों के भाव पर पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुताबिक भारत समेत तमाम उभरती अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई की हालत इससे बदतर हो सकती है।

आरबीआई की ओर से जारी 'मैक्रोइकोनोमिक ऐंड मोनेटरी डेवलपमेंट्ïस इन 2010-11' रिपोर्ट में कहा गया है, 'हालांकि इस संकट से भारत का कारोबार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने की संभावना नहीं है, क्योंकि इन अर्थव्यवस्थाओं की भारत के अंतरराष्टï्रीय व्यापार में बड़ी भागीदारी नहीं है।'

केंद्रीय बैंक के अनुसार, 'हालांकि तेल कीमतों और अन्य जिंस कीमतों में संभावित वृद्घि से भारतीय अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव अवश्य पड़ेगा। भारत के कुल आयात में तेल की भागीदारी लगभग एक-तिहाई की है।' इन क्षेत्रों में संकट ट्ïयूनीशिया में इस साल के शुरू में जेस्माइन रिवोल्यूशन के साथ शुरू हुआ। भ्रष्टïाचार और बेरोजगारी के खिलाफ व्यापक पैमाने पर आंदोलन ने स्थानीय सरकार को संकट में डाल दिया। जल्द ही यह संकट मिस्र, लीबिया, बहरीन, सीरिया, यमन और जॉर्डन तक पहुंच गया।

राजनीतिक संकट की वजह से तेल कीमतों में वृद्घि हुई। तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गईं। मार्च में कच्चे तेल की औसतन कीमतें ब्रेंट श्रेणी के लिए 114.4 डॉलर प्रति बैरल पर थीं। भारतीय कच्चे तेल की कीमत पिछले महीने औसतन 110.4 डॉलर प्रति बैरल पर थी।  आरबीआई ने कहा है, 'भारतीय संदर्भ में विश्लेषण सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर बढ़ती उत्पादन लागत के विपरीत प्रभाव का संकेत दे रहे हैं।'

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि भूतल एवं हवाई परिवहन, सिंथेटिक फाइबर और केमिकल, कॉटन टेक्सटाइल, पेपर उत्पाद, रबड़ और प्लास्टिक, सीमेंट एवं अनाज जैसे सेक्टर में वृद्घि तेल से संबद्घ क्षेत्रों में ऊंची उत्पादन लागत की वजह से प्रभावित हो सकती है।

पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीकी देशों में संकट की वजह से तेल के अलावा वैश्विक जिंस कीमतें भी और अधिक चढऩे की संभावना है।

आरबीआई ने कहा है, 'वित्त वर्ष 2010-11 की तीसरी तिमाही के दौरान अधिकतर शहरों में संपत्ति की कीमतों में वृद्घि जारी रही, जैसा कि रिजर्व बैंक के क्वाटर्ली हाउस प्राइस इंडेक्स में संकेत दिया गया था। संबद्घ राज्य सरकारों के डिपार्टमेंट ऑफ रजिस्ट्रेशन ऐंड स्टांप्स से जुटाए गए सात शहरों के आंकड़ों पर आधारित इस इंडेक्स में केंद्रीय बैंक ने संपत्ति की कीमतों में बढ़ोतरी बरकरार रहने की आशंका जताई थी।'

केंद्रीय बैंक ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में विकास की रफ्तार तेज होती है तो निवेशक उभरते बाजारों से अपना ध्यान हटा कर अमेरिका जैसी विकसित अर्थव्यव्यवस्थाओं की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। इससे अल्पावधि में घरेलू शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

Keyword: oil, jeans prices, inflation, West Asia, North Africa, India,
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