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बीमा योजना में निवेश और शुल्क का मकडज़ाल
दीप्ता जोशी और नेहा पांडेय /  April 24, 2011

बीमा पॉलिसी के  खरीदार खर्चों को लेकर हमेशा ऊहापोह की स्थिति में होते हैं। प्रीमियम आवंटन शुल्क, पॉलिसी प्रशासन शुल्क, मत्र्यता शुल्क आदि खरीदारों को ऊहापोह में डालते हैं। जब इन शुल्कों में सालाना बदलाव होते हैं तो पॉलिसी खरीदारों के लिए समस्याएं और जटिल हो जाती हैं। मिसाल के तौर पर मुंबई निवासी एच एस पाठक का उदारहण लेते हैं। पाठक इस बात पर काफी आश्चर्य चकित हैं कि एक ही बीमा कंपनी के दो चाइल्ड प्लान के प्रीमियमों का अंतर 40,000 रुपये क्यों हैं। एक योजना के लिए 36,000 जबकि दूसराी के लिए 76,000 रुपये के प्रीमियम की बात उनकी समझ से परे है।

प्रीमियम में अंतर क्यों
हालांकि मुख्य तौर पर यह अंतर पॉलिसियों के साथ जुड़ी खूबियों की वजह से हो सकता है लेकिन बात जब मत्र्यता शुल्क की होती है तो और अधिक भ्रम पैदा हो जाता है। बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस का मैक्स एडवांटेज प्लान (एनएवी की गारंटी) खरीदने वाले 35 साल के एक पुरुष के लिए जोखिम पर मत्र्यता शुल्क प्रति 1,000 रुपये 3.03 रुपये है। इसी बीमा कं पनी की स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान पर वह 2.03 रुपये का भुगतान करते हैं। दुर्घटना डेट बेनिफिट साथ जुड़े होने के कारण एनएवी गारंटी योजना अधिक शुल्क लेती है। पॉलिसीधारकों को डेथ बेनिफिट की सुविधा देने पर कंपनियां मत्र्यत शुल्क लेती हैं। चूंकि, ये शुल्क औसत भारतीय की जीवन प्रत्याशा (लगभग 67 साल) से जुड़ी होती है, लेकिन कोई भी विभिन्न उम्रों, उत्पादों और कंपनियों के लिए यह शुल्क एक समान होने की उम्मीद करेगा।

मत्र्यता शुल्क का निर्धारण
बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि मत्र्यता शुल्क पॉलिसीधारक की उम्र,लिंग, वित्तीय स्थिति, रहने के स्थान और पेशे पर निर्भर करता है। अधिकारी ने कहा, 'मत्र्यता सम एट रिस्क (बीमित रकम- फंड की कीमत) पर निर्भर करता है और पॉलिसी की अवधि के दौरान फंड वैल्यू बढऩे के साथ ही इसमें कमी आनी चाहिए।' मत्र्यता शुल्क तय करते समय बीमा कंपनियां दावे संबंधी अपने अनुभव के अलावा इंडियन एश्योर्ड लाइफ मोर्टेलिटी (आईएएलएम) टेबल 1994-96 का संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल करती हैं। आईआरडीए के अधिकारी ने कहा, 'बीमा उद्योग में दावों की संख्या बीमा कंपनियों के पास आए दावों से अलग हो सकती हैं जिससे कई गुना अधिकप्रीमियम का रास्ता आसान हो जाता है। लिहाजा कंपनियां अपने अनुभवों और मान्यताओं के हिसाब से भी शुल्क तय करती है।

बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस के प्रमुख (प्रोडक्ट डेवलपमेंट) रितुराज भट्टïाचार्य कहते हैं, 'एक ही श्रेणी की पॉलिसियों के लिए मत्र्यता शुल्क विभिन्न कारणों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। यह बीमा कंपनियों की अपनी मान्याताओं, दावों के निपटान के अनुभव, उत्पाद वितरण पर भी निर्भर करता है।' यह बात बिल्कुल सही है कि वितरण चैनल भी मत्र्यता शुल्क तय कर सकते हैं। बीमा कंपनियां जब अपनी पॉलिसियों के साथ पॉलिसीधारकों को अतिरिक्त लाभ देती हैं तो वे अधिक मत्र्यता शुल्क लेते हैं लेकिन वे इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेती हैं। एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस के परेश परासनिस के अनुसार शुल्क कंपनियों द्वारा किए जाने वाले आवश्यक खर्च के बराबर ही होता है। वह कहते हैं, 'चूंकि बचत के साथ ही जोखिम से सुरक्षा की बात भी जुड़ी होती है, इसलिए पॉलिसीधारकों को तब तक मत्र्यता शुल्क देना पड़ता है जब तक बचत बीमित राशि को पार नहीं कर जाती है।'

बीमा कंपनियों के अनुसार मत्र्यता शुल्क उस सामाजिक-आर्थिक वर्ग पर निर्भर करेगा जिस पर पॉलिसी लक्ष्य करके  चल रही है। इस बाबत मैक्य न्यू यॉर्क लाइफ के चीफ एक्चुरी संचित मैनी कहते हैं, 'दूसरे शब्दों में कहा जाए तो धनाढ्य लोगों के लिए मत्र्यता शुल्क कम  होगा क्योंकि उनकी जीवन-शैली बेहतर होती है।' ऐसा हो सकता है कि वितरण चैनल के आधार पर पॉलिसी पर लिया जाने वाला प्रीमियम अलग-अलग हो सकता है। जब कोई पॉलिसी ऑनलाइन बेची जाती है तो कोई कमीशन देय नहीं होता और इसका लाभ ग्राहकों को दिया जाता है।

महंगी योजनाओं पर लगाम
पिछले साल सितंबर में आईआरडीए ने यूलिप पॉलिसियों के संबंध में नए दिशानिर्देश जारी किए थे। एक ओर जहां बीमा नियामक ने महंगे फ्रंट-एंड शुल्कों जैसे प्रीमियम आवंटन और पॉलिसी प्रबंधन खर्चों की सीमा तय की वहीं मत्र्यता शुल्क को इससे बाहर रखा गया। बीमा अभिकर्ताओं का कहना है कि कुछ बीमा कंपनियों ने इस अवसर का लाभ उठाया है। हालांकि बीमा कंपनियां इस बात से इनकार करती हैं। परासनिस कहते हैं, 'कंपनियां जानती हैं कि कोई भी अवैध शुल्क अंतत: यूलिप उत्पादों के प्रतिफल पर असर डाल सकती है और करके उन्हें बीमा नियामक के कोप का भाजन भी बनना पड़ सकता है।'

Keyword: insurance policy, premium,
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