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ड्रैगन के जाल में बनारसी सिल्क बेहाल
सिद्धार्थ कलहंस / वाराणसी April 08, 2011

चीनी रेशम पर आयात शुल्क में कटौती के केंद्र सरकार के कदम से भी बनारसी सिल्क के कारोबारियों को कोई राहत मिलती नही दिख रही है। चीनी रेशम पर आयात शुल्क 30 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किए जाने के बाद अब पड़ोसी मुल्क ने धागे की कीमत में इजाफा कर दिया है। रेशम कारोबारी उत्तर प्रदेश सरकार के वाराणसी में खोले गए सिल्क एक्सचेंज से भी निराश हैं जहां स्थापना के चार महीनों के बाद भी एक इंच धागा उपलब्ध नही हो पाया है।

बनारसी वस्त्र उद्योग संघ के अध्यक्ष जगदीश शाह का कहना है, 'बजट में चीनी सिल्क के धागे पर आयात शुल्क में कटौती का ऐलान करते ही इसके भाव में तेजी आने लगी है। नतीजतन सिल्क के कारोबारियों को इसका कोई खास फायदा नही मिल रहा है।Ó शाह के मुताबिक इस समय बनारस में चीनी सिल्क का धागा 53 से 54 डॉलर प्रति किलो की दर पर उपलब्ध है जबकि पहले इसकी कीमत 50 डॉलर प्रति किलो चल रही थी। शाह के अनुसार पूरे साल इस धागे की कीमत 55 डॉलर प्रति किलो के आस पास रहने वाली है। उनका कहना है कि शुल्क में कटौती तो हुई पर दाम बढ़ जाने के चलते उसका लाभ उचित ढंग से नहीं मिल पाया।

जगदीश शाह ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि सिल्क कारोबारियों ने चीनी फैब्रिक पर आयात शुल्क को 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ाने की भी मांग की थी पर उस पर कोई ध्यान नही दिया गया। उनका कहना है कि दरअसल चीन खुद भारत में अपने फैब्रिक की खपत बढ़ाना चाहता है जिससे हम उत्पादक न होकर केवल कारोबारी बन कर रह जाएंगे। शाह के मुताबिक यह हमारी मौलिकता को खत्म करने की साजिश है। शाह कहते हैं कि अभी बनारस में हम अपना कपड़ा खुद तैयार करते हैं जिससे हमारी पहचान और डिजाइन जिंदा हैं।
बनारसी वस्त्र उद्योग संघ के पदाधिकारी गगनेंद्र कुमार केडिया राज्य सरकार के सिल्क एक्सचेंज से भी खासे निराश हैं। वह इस रेशम धागा बिक्री केंद्र का नाम एक्सचेंज किए जाने पर ही सवाल उठाते हैं और कहते हैं कि इसका नाम सिल्क बैंक होना चाहिए। केडिया कहते हैं कि इस बैंक में न केवल हथकरघा बुनकरों को सिल्क का धागा मिले बल्कि पावरलूम वालों को भी माल उचित दरों पर मिले। साथ ही वह यह भी कहते हैं कि अब वाराणसी में पावरलूम पर नायलॉन, कॉटन, मर्सराइज्ड धागों से भी कपड़ा तैयार किया जाता है लिहाजा इनके धागे की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। केडिया कहते हैं कि चीनी रेशम के धागे की बात तो छोड़ दी जाए अपने देश में भी उपलब्ध सिल्क के धागे के भाव में भी बढ़ोतरी होती जा रही है।

सिल्क कारोबारियों के इस दावे में दम भी नजर आता है। वाराणसी के लहरतारा इलाके में खुले इस एक्सचेंज में बिकने के लिए रेशम का धागा उपलब्ध ही नहीं है। इतना ही नही शायद ही बनारस के किसी बुनकर को सरकार की ओर से शुरू किए गए इस एक्सचेंज के बारे में जानकारी हो।

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