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शेयर गिरवी रखें प्रवर्तक तो निवेशक रहें सतर्क
आपका पैसा
नेहा पांडेय /  March 28, 2011

वित्तीय योजनाकार मुकेश देधिया ने मैसूर की गृहिणी रश्मि को एक बिल्कुल साधारण सलाह दी। यह सलाह थी, 'जिस कंपनी का आपने शेयर खरीदा है वह अगर अपने शेयरों को गिरवी रख रही  है तो इसमें परेशान होने की बात नहीं है।Ó
इसके पीछे उन्होंने एक सामान्य तर्क दिया, 'सिर्फ शेयरों को गिरवी रखने से शेयरधारकों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ता है। आपको यह भी जानने की जरूरत होती है कि कितने शेयर गिरवी रखे गए हैं, कितनी रकम उगाही गई है और शेयर गिरवी रखने के पीछे क्या मकसद है।Ó अनूप ने टाटा मोटर्स और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) के शेयर खरीद रखे हैं। हाल में ही उन्होंने पढ़ा कि इन कंपनियों ने 8 फीसदी से अधिक और 10 फीसदी से अधिक प्रवर्तकों की हिस्सेदारी गिरवी रखी है। ऐसे में उनका सवाल है कि इससे इन कंपनियों में उनके निवेश पर क्या असर पड़ सकता है।
इस सवाल का जवाब सरल नहीं है क्योंकि शेयर गिरवी रखना भारतीय कंपनियों के लिए एक आम बात है। मॉर्गन स्टैनली एशिया पैसिफिक की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2010 तक 774 सूचीबद्ध कंपनियों ने बैंकों के पास अपने शेयर गिरवी रखे हैं और इसके जरिये 83,039.20 करोड़ रुपये जुटाए हैं। कुल सूचीबद्ध कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में इन 774 कंपनियों की हिस्सेदारी 21 फीसदी है।
प्रवर्तक नकदी जुटाने के लिए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी उधार देते हैं। सत्यम घोटाले के बाद भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने प्रवर्तकों और समूहों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि अगर वे सूचीबद्घ कंपनियों के शेयरों को गिरवी रखते हैं तो उन्हें इससे जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी। निवेशक भी अब ऐसी जानकारियों की तरफ ध्यान देने लगे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया तो वे मुसीबत में पड़ सकते हैं। इस पर निगरानी रखने के लिए आप कुछ जरूरी बातों पर ध्यान दे सकते हैं:
कंपनी का आकार
हीरो होंडा के प्रवर्तक हीरो इनवेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (एचआईपीएल) ने आईएलऐंडएफएस ट्रस्ट कॉरपोरेशन में अपनी 5.32 फीसदी हिस्सेदारी गिरवी रखने के बाद पिछले हफ्ते 200 करोड़ रुपये के शेयर गिरवी रखे। बी एम मुंजाल के हीरो ग्रुप ने होंडा की 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए यह फंड जुटाया है। मगर कंपनी के फंडामेंटल काफी मजबूत हैं और इस वजह से बाजार के विशेषज्ञों को शेयर गिरवी रखने पर कोई चिंता नहीं है।
एक विश्लेषक का कहना है, 'मिडकैप और स्मॉल कैप कंपनियों के ज्यादातर प्रवर्तक फंड जुटाने के लिए बड़े पैमाने पर शेयर गिरवी रखते हैं। ऐसे में मार्जिन कॉल पर डिफॉल्ट और इसके परिणामस्वरूप कर्ज प्रदाताओं द्वारा शेयरों की बिक्री अक्सर देखने को मिलती है।Ó उन्होंने कहा कि अगर स्मॉल कैप कंपनियों के साथ ऐसा देखने को मिले तो निवेशकों को अपने शेयर बेचकर बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शेयर गिरवी रखे जाने की स्थिति में अक्सर शेयरों में जबरदस्त उतार चढ़ाव देखने को मिलता है।
हालांकि जिन कंपनियों का फंडामेंटल मजबूत होता है उनके शेयर गिरवी रखने पर बहुत अधिक ऊपर नीचे नहीं जाते हैं, मगर कई दफा शेयर गिरवी रखने पर रियल एस्टेट और दूरसंचार कंपनियों के शेयरों में अत्यधिक उतार चढ़ाव देखने को मिलता है।
कितने शेयर गिरवी रखे गए हैं?
अगर शेयरों को गिरवी रखते वक्त प्रवर्तक की कंपनी में हिस्सेदारी अधिक है, तो निवेशकों को बहुत अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। विश्लेषकों की मानें तो अगर प्रवर्तक अगर 30 फीसदी शेयरों को गिरवी रख रहे हैं तो निवेशकों को इसकी वजह जानने की कोशिश करनी चाहिए। हालांकि यहां ध्यान रखें कि प्रवर्तक अपनी हिस्सेदारी को केवल गिरवी रख रहे हैं उन्हें बेच नहीं रहे हैं। अगर प्रवर्तकों की किसी कंपनी में हिस्सेदारी बहुत कम है, जैसे कि 15 से 20 फीसदी से भी कम और इसके बाद वे 10 फीसदी या इससे अधिक शेयर गिरवी रख रहे हैं, तो निवेशकों को सतर्क हो जाना चाहिए।
गिरवी रखने का उद्देश्य जानें
अगर प्रवर्तक विकास योजनाओं के लिए फंड जुटाने के लिए शेयरों को गिरवी रख रहे हैं तो निवेशक चिंतित न हों। मगर कई दफा प्रवर्तक कारोबार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी शेयरों को गिरवी रखते हैं और अगर ऐसा है तो निवेशकों को सावधान होने की जरूरत है।

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