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आयकर की कई धाराओं में है कर छूट का प्रावधान
आपका पैसा
दीप्ता जोशी /  March 03, 2011

ज्यादातर लोग कर बचाने के लिए वित्तीय वर्ष के आखिर में बीमा योजनाओं और म्युचुअल फंड योजनाओं की ओर भागते हैं। इन वित्तीय योजनाओं में निवेश पर ग्राहकों को आयकर की धारा 80सी के तहत कर में छूट दी जाती है। पिछले साल आयकर की धारा 80सीसीएफ के तहत कर में छूट की शुरुआत भी की गई थी और निवेशकों के बीच यह भी काफी लोकप्रिय हो चुका है।

मगर शायद बहुत से लोग इस बात से बेखबर होंगे कि आयकर की कुछ और प्रमुख धाराओं के तहत भी कर में छूट का लाभ उठाया जा सकता है। डेलॉयट, हैसकिंस ऐंड सेल्स में टैक्स पार्टनर होमी मिस्त्री बताते हैं, 'आयकर की कई ऐसी धाराएं हैं जिनका इस्तेमाल कर आप अपने कर का बोझ कम कर सकते हैं, हालांकि ये इतने लोकप्रिय नहीं हैं। हालांकि कुछ खास परिस्थितियों में ही इनका फायदा उठाया जा सता है।Ó आइये जानते हैं आयकर की कुछ ऐसी धाराओं के बारे में:
शिक्षा कर्ज पर छूट के लिए धारा 80ई। सीमा: ब्याज भुगतान की पूरी रकम पर कर छूट
अगर आपने अपने खुद को, पति या पत्नी को या फिर बच्चों को देश में उच्च शिक्षा दिलाने के लिए कर्ज ले रखा है तो इस कर्ज के भुगतान के तौर पर आप जो ब्याज देंगे, उस पूरी रकम पर इस धारा के तहत आपको कर में छूट दी जाएगी। कानूनी तौर पर मान्य ऐसे अभिभावक जो किसी छात्र से संबंधित न भी हों, पर अगर उन्होंने उसके लिए कर्ज लिया है तो वे भी इस धारा के तहत कर में छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं। आप इस छूट का फायदा 7 लगातार साल या फिर जब तक पूरा ब्याज चुकता नहीं कर लिया जाता, तब तक ले सकते हैं। बच्चों की ट्यूशन फीस के लिए 80सी के तहत कर टूट का लाभ उठाया जा सकता है।

स्वास्थ्य के लिए धारा 80डीडी, 80डीडीबी और 80यू के तहत। सीमा: 40,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक
धारा 80डीडी के तहत कोई व्यक्ति इलाज या रखरखाव जैसे कि नर्स रखना और किसी आश्रित विकलांग व्यक्ति के पुनर्वास पर खर्च के लिए 50,000 रुपये तक कर में छूट के लिए क्लेम कर सकता है। गंभीर रूप से विकलांग लोगों के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये तक है। हालांकि इस संबंध में कुछ दिशानिर्देश भी हैं। आश्रित व्यक्ति का आयकर की परिभाषा के तहत विकलांग या गंभीर रूप से विकलांग व्यक्ति की श्रेणी में आना जरूरी है। कुछ बीमारियां जैसे ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मल्टीपल डिसएबिलिटी और दूसरी बीमारियों को इस वर्ग में रखा गया है।
कैंसर, एड्स जैसी कुछ बीमारियों के लिए खर्च पर धारा 80डीडीबी के तहत कर में छूट हासिल की जा सकती है। छूट आपके द्वारा खर्च की गई कुल रकम या 40,000 रुपये, जो भी कम हो, पर मिलेगी। वरिष्ठï नागरिकों के लिए छूट की रकम बढ़ाकर 60,000 रुपये रखी गई है।
अनुदान के लिए धारा 80जी, 80जीजीए, 80जीजीसी। सीमा: 50 से 100 फीसदी तक
सरकार द्वारा समर्थन प्राप्त अधिकांश ट्रस्ट अनुदान पर कर में 100 फीसदी की छूट देते हैं। जो अनुदान कर में 50 फीसदी छूट की बात करते हैं, उनके लिए यह छूट और भी कम हो सकती है क्योंकि ऐसी स्थिति में छूट कर प्रदाता की आय पर निर्भर करती है। इसका मतलब है कि कर में 50 फीसदी की छूट केवल 'क्वालीफाइंगÓ रकम के लिए ही होती है।
उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की सालाना आय 5 लाख रुपये है और वह 50,000 अनुदान में देता है तो उस व्यक्ति की कर के दायरे में आने वाली पूरी रकम का आकलन करते वक्त अनुदान की समूची रकम को इसमें शामिल नहीं किया जाता है। सबसे पहले उसकी कुल आय में से कर बचत के लिहाज से किए गए निवेश को घटा दिया जाता है। मान लीजिए कि यह पूरी रकम 1 लाख रुपये है तो ऐसे में कर के दायरे में आने वाली कुल रकम 4 लाख रुपये हो जाएगी। आयकर कानून के मुताबिक इस क्वालीफाइंग रकम या तो कुल कर योग्य आय के 10 फीसदी से कम या फिर अनुदान के रूप में दी गई रकम होगी। इसका मतलब है कि 50,000 रुपये में से केवल 40,000 रुपये कर में छूट के योग्य होंगे। अब इसके 50 फीसदी यानी कि 20,000 रुपये पर कर छूट मिलेगी।

धारा 80जीजी के तहत किराए पर छूट। सीमा: 24,000 रुपये
अगर कोई व्यक्ति मकान का किराया दे रहा है, मगर मकान किराया भत्ता  का लाभ नहीं ले रहा है तो वह इस धारा के तहत कर में छूट का लाभ उठा सकता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी कुल आय की 10 फीसदी से अधिक रकम अपने मकान के किराए पर खर्च करता है तो वह इस अतिरिक्त रकम पर कर में छूट का दावा कर सकता है। इस धारा के तहत एक साल में अधिकतम 24,000 रुपये तक की छूट हासिल की जा सकती है।

Keyword: your money income tax save,
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