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मोबाइल के ई-लुटेरों से बचके
प्रदीश चंद्रन /  February 16, 2011

तकनीक आपकी जिंदगी को बेहतर भी बना सकती है और मुमकिन है कि यह आपकी परेशानी का सबब भी बन जाए। तकनीक एक दोधारी तलवार के माफिक है। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप तकनीक का इस्तेमाल कैसे करते हैं। आजकल युवाओं को लुभाने के लिए नई-नई तकनीक वाले स्मार्टफोन, टैबलेट और 3जी सेवाओं से लैस हैंडसेट बाजार में आ रहे हैं। इनसे मोबाइल यूजरों को इंटरनेट सेवाएं लेने में कोई दिक्कत नहीं आती है लेकिन इससे साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे से कोई इनकार नहीं कर सकता है। अब साइबर क्राइम के जरिये पैसे बनाने के लिए नए तरीके अख्तियार किए जा रहे हैं।
वैसे हैंडसेट या मोबाइल जिसमें ज्यादा स्टोरेज क्षमता होती है उन पर साइबर अपराधियों की विशेष नजर होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल फोन में इस्तेमाल किए जाने वाले सिक्योरिटी टूल, कंप्यूटर के मुकाबले ज्यादा आधुनिक नहीं होते हैं। हालांकि ट्रेंड माइक्रो, भारत और दक्षेस (दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन) के कंट्री मैनेजर अमित नाथ का कहना है, 'स्मार्टफोन की बढ़ती तादाद और तेज डाटा स्पीड से भी साइबर हमले की संभावना बढ़ेगी। साइबर अपराधी भी मोबाइल तकनीक के जरिये पैसे बनाने के लिए नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं।'
मिसाल के तौर पर अगर आप मोबाइल ट्रोजन फोन पर डाउनलोड करते हैं तो यह फोन को हानि पहुंचा सकता है। ऐसे में साइबर अपराधी भी यूजर के फोन से कॉल या एसएमएस कर सकते हैं और इसका अंदाजा भी यूजर को तभी होगा जब उनका बिल आएगा। इसके अलावा कई बार यूजर को किसी एप्लीकेशन को डाउनलोड करने के निर्देश भी मिलते हैं। सिक्योरिटी सॉल्यूशन मुहैया कराने वाले मैकेफी के एक अध्ययन के मुताबिक नए मोबाइल में वायरस की संभावनाएं काफी तेजी से बढ़ रही हैं। वर्ष 2010 में वर्ष 2009 के मुकाबले करीब 46 फीसदी साइबर अपराध की गतिविधियां बढ़ी हैं।
मैकेफी के टेक्निकल प्रोडक्ट मैनेजर विनू थॉमस का कहना है, 'मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल देश में बढ़ रहा है और ऐसे में साइबर अपराधी भी काफी सक्रिय हो गए हैं। पहले मोबाइल फोन पर साइबर अटैक की घटनाएं कम होती थीं। लेकिन अब ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में मोबाइल उपकरणों पर ज्यादा संगठित साइबर हमले हो सकते हैं।Ó
मोबाइल पर साइबर अटैक करने वाले हैकर फोन के संपर्क सूची में मौजूद व्यक्तिगत सूचनाएं भी हासिल करना चाहते हैं। मोबाइल उपभोक्ता आमतौर पर बैंक पासवर्ड और कई संवेदनशील आंकड़े भी रखते हैं। अगर एक बार फोन में ऐसी दिक्कत आती है तो इसमें मौजूद डाटा और फोटो का इस्तेमाल वित्तीय लाभ के लिए हो सकता है। आजकल मोबाइल उपकरणों का इस्तेमाल व्यक्तिगत और कारोबारी उद्देश्य के लिए भी किया जाता है और इसमें कई गोपनीय डाटा भी होते हैं जो हैकरों के लिए एक सुनहरे मौके के तौर पर होते हैं। पहले मोबाइल हैकर पैसे के लिए फोन से चुराए गए डाटा को बेच देते थे लेकिन नए रुझान से यह अंदाजा मिलता है कि वे इससे सीधे वित्तीय लाभ के लिए गुंजाइश देख रहे हैं। देश के ज्यादातर कारोबारी लेन-देन के लिए मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं जो साइबर अपराध को बढ़ाने के लिए मुफीद है। वर्ष 2011 के वेबसेंस सिक्योरिटी आउटलुक के मुताबिक इस साल मोबाइल पर होने वाले हमले आईफोन, आईपैड और एंड्रॉयड आधारित मोबाइल फोन के ब्राउजर के जरिये किए जाएंगे।
सिमेंटेक के कंज्यूमर, प्रोडक्ट ऐंड सॉल्यूशन के कंट्री सेल्स मैनेजर गौरव कंवल का कहना है, 'यूजर कई ऐप्लीकेशंस को डाउनलोड करते हैं और साइबर अपराधी कई फीचर आधारित एप्लीकेशंस के साथ मौजूद होते हैं जो यूजर को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। ये ऐप्लीकेशंस इस तरह से डिजाइन किए जाते हैं कि यूजर आसानी से इसकी जाल में फंस जाते हैं।'
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे खतरनाक कंटेंट जो वेबसाइट के जरिये फोन पर असर डालते हैं उसे पहचानना मुश्किल होता है। उनका मानना है कि इसके लिए फोन को पासवर्ड के साथ सुरक्षित रखना ही एकमात्र उपाय होगा। सिक्योरिटी सर्विस प्रदाता भी अब मोबाइल डाटा यूजर के लिए विशेष तरह के प्रोडक्ट पेश कर रहे हैं जो यूजर को साइबर हमले से बचा सकते हैं। वैसे मोबाइल जिनकी इंटरनेट तक आसानी से पहुंच हो और किसी जोखिमपूर्ण कंटेंट का इस पर कोई असर न हो तो ही आप मोबाइल इंटरनेट का मजा उठा सकते हैं।

Keyword: mobile, hacking,
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